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वर्ल्ड स्ट्रोक डे : देश में हर 40 सेकेंड में एक व्यक्ति होता है स्ट्रोक का शिकार

मरीजों को जल्दी इस बीमारी का उपचार शुरू करना जरूरी है। ऐसा न करने पर आजीवन विकलांगता और कई केसों में मृत्यु का भी खतरा बना रहता है।

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जयपुर। वर्ल्ड स्ट्रोक डे के मौके पर निम्स हार्ट एंड ब्रेन हॉस्पिटल द्वारा जागरूकता अभियान चलाया गया। जिसमें अस्पताल के चिकित्सकों द्वारा स्ट्रोक की रोकथाम, उपचार और फास्ट रिकवरी के बारे में लोगों को अवेयर किया गया। इस मौके पर एक विशेष कैंपेन भी चलाया गया है जिसमें स्ट्रोक से उबर चुके मरीजों द्वारा बीमारियों एवं चुनौतियों से उबरने की प्रेरक कहानियां भी शेयर की।

एम्स दिल्ली के न्यूरो इंटरवेंशनल सर्जन डॉ.मदन मोहन गुप्ता ने बताया कि जिस तरह से हार्ट स्ट्रोक दिल की नसों की बीमारी है। उसी तरह ब्रेन स्ट्रोक दिमाग की नसों की बीमारी है। उन्होंने बताया कि देश में हर 40 सेकेंड में एक व्यक्ति ब्रेन स्ट्रोक का शिकार बनता है और हर चार में से एक इस बीमारी से पीड़ित होता है।

डॉ गुप्ता ने स्ट्रोक के मरीजों की बढ़ती संख्या की वजह बदलती लाइफ स्टाइल को बताया। मरीजों को जल्दी इस बीमारी का उपचार शुरू करना जरूरी है। ऐसा न करने पर आजीवन विकलांगता और कई केसों में मृत्यु का भी खतरा बना रहता है।

वहीं न्यूरो फिजिशियन डॉ.रवि जाखड़ ने बताया कि स्ट्रोक में काफी कम समय मिलता है और देश एवं प्रदेश में हाई स्टैंडर्ड अस्पतालों की कमी है। ऐसे में मरीजों को इलाज के लिए काफी परेशान होना पड़ता है। इस मौके पर एमरजेंसी मेडिसीन से डॉ. सुमित आनंद, कार्डियोलोजिस्ट डॉ. अनिल चौधरी, न्यूरो सर्जन डॉ. पंकज सिंह, मेडिकल नक्लोजिस्ट डॉ. अनुश्री चतुर्वेदी, पीडियाट्रिक डॉ. एम एल गुप्ता व डॉ. बी एस शर्मा, डायरेक्टर एडमिनिस्ट्रेशन मनीषा चौधरी और बिजनेस हेड प्रतीक वर्मा उपस्थित रहे।

लोगों में जागरूकता है उद्देश्य

बता दें कि 29 अक्टूबर को पूरी दुनिया में ग्लोबल स्ट्रोक डे मनाया जाता है जिसका उद्देश्य स्ट्रोक की रोकथाम, इलाज और रिकवरी के बारे में लोगों में जागरूकता को बढ़ाना है। वर्ल्ड स्ट्रोक डे-2024 का थीम 'ग्रेटर थन स्ट्रोक' बनना है। इस अभियान का उद्देश्य स्ट्रोक समुदाय से आशा और दृढ़ संकल्प की प्रेरक कहानियों को लोगों के साथ शेयर करना है। इसके जरिए व्यक्तियों को सशक्त बना सकता है और उन्हें स्ट्रोक की चुनौतियों से उबरने में मदद कर सकता है।

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