16 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

जयपुर

ममता सिंह की लिखी अनूठी कहानियां-writer mamta singh

जयपुर। ममता सिंह का कहानी संग्रह ‘राग मारवा’ इन दिनों खूब चर्चा में है। वागीश्वरी सम्मान के बाद इस संग्रह के खाते एक और प्रतिष्ठित अवॉर्ड आया है। उन्हें महाराष्ट्र राज्य साहित्य अकादमी का मुंशी प्रेमचंद अवॉर्ड मिला है। जानिए लेखिक और किताब को....

Google source verification

जयपुर

image

Tasneem Khan

Nov 01, 2019

जयपुर। ममता सिंह का कहानी संग्रह ‘राग मारवा’ इन दिनों खूब चर्चा में है। वागीश्वरी सम्मान के बाद इस संग्रह के खाते एक और प्रतिष्ठित अवॉर्ड आया है। उन्हें महाराष्ट्र राज्य साहित्य अकादमी का मुंशी प्रेमचंद अवॉर्ड मिला है। जानिए लेखिक और किताब को….

बहुत अजीब दौर है यह, जब नई पीढ़ी बहुत जल्द पुरानी हो जाती है और पुरानी पीढ़ी को महज तभी तक काम का समझा जाता है, जब तक कि वह सिक्कों की खनखन जुटा सके और जब ऐसा होता है, तो सिक्कों की धुन पर न केवल ‘राग मारवा’ जैसी कहानी सामने आती है, बल्कि इसी नाम से एक पूरा का पूरा कहानी संग्रह हमारे सामने होता है, जो बदलते वक्त की बनती बिगड़ती धुनों को सामने रखने की कोशिश करता है, बता दें कि ये कोशिश ममता सिंह की है। ममता सिंह वो नाम, जिसे लोग रेडियो सखी के तौर पर भी जानते हैं। जिस तरह उन्होंने अपनी आवाज के तिलिस्म को शब्दों में उतारा है, उससे एक उम्मीद बनती है कि आगे भी कई बेहतर रचनाएं सामने आएंगी।
राजपाल एंड संस से प्रकाशित इस संग्रह को मध्यप्रदेश के प्रतिष्ठित वागीश्वरी पुरस्कार से नवाजा जा चुका है। इस संग्रह में ग्यारह लंबी कहानियां हैं। शीर्षक कहानी ‘राग मारवा’ एक उम्रदराज गायिका कुसुम जिज्जी की कहानी है, जिसके गले में अब वो सुर न रहे, लेकिन बहू उनके लिए कॉन्ट्रेक्ट जुटाने में लगी रहती है। पैसा आता रहता है, जिज्जी गाती रहती हैं, सुरों को संभालने में जुटी रहती हैं और जुटा लेती है एक घर परिवार के लिए, पर यहां भी उसे चैन कहां!
संग्रह की अन्य कहानियां भी अपने समय की बेचैनियों का लयात्मक दस्तावेज है। चाहे वो ‘गुलाबी दुपट्टे वाली लडक़ी’ की कहानी हो, जो अपने कोख में एक बीज चाहती है और फिर उसे ही एक प्रयोगशाला में तब्दील कर देती है। एक सवाल छोड़ जाती है कि क्या औरत सिर्फ बच्चा पैदा करने की मशीन है! ‘जनरल टिकट’ भी पितृसत्तात्मक सोच पर प्रहार करती हुई कहानी है।
ममता की कहानियों में मेट्रो शहर की मुश्किलें भी नजर आती हंै। कामकाजी माता-पिता की मजबूरियों ने नन्हों के हिस्से क्रेच दे दिया है, क्या हो जो एक रोज वो अकेला वहां से निकल जाए! ‘फैमिली ट्री’ अभिभावकों के मन में चल रही उथल-पुथल को बहुत से बयां करती हैं। ‘धुंध’ और ‘लोकेल’ भी मेट्रो कल्चर को पेश करती है।
‘आखिरी कॉन्ट्रेक्ट’ इस संग्रह की बहुत महत्वपूर्ण कहानी है। दो लोगों का प्रेम यूं तो हमेशा ही समाज को खटका है, लेकिन यह प्रेम जब विधर्मी होता है, तो हालात और भी मुश्किल हो जाते हैं। बिंदी और बुर्के की बहस के बीच एक हिंदू लडक़ी किस तरह एक मुस्लिम लडक़े से अपने प्रेम को निभाती है, उसे दिल छू लेने वाले अंदाज में पेश किया गया है।