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Year Ender 2022-गोवंश और पशुपालकों पर लम्पी की मार, देर से जागी सरकार

Year Ender 2022- साल 2022 की विदा होने वाला है। प्रदेश के पशुपालकों के लिए यह साल बेहद परेशानी से भरा रहा। वहीं पशुपालन विभाग भी बिना निदेशक के चलता रहा जिसके चलते कई विभागीय काम प्रभावित हुए। खासतौर पर स्थिति उस समय खराब हो गई जबकि लम्पी से प्रदेश के गोवंश को अपनी चपेट में ले लिया। देर से सही सरकार और विभाग जागे और लम्पी से निपटने के कई कदम भी उठाए।

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जयपुर

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Rakhi Hajela

Dec 31, 2022

Year Ender 2022-गोवंश और पशुपालकों पर लम्पी की मार, देरी से जागी सरकार

Year Ender 2022-गोवंश और पशुपालकों पर लम्पी की मार, देर से जागी सरकार

Year Ender 2022 साल 2022 की विदा होने वाला है। प्रदेश के पशुपालकों के लिए यह साल बेहद परेशानी से भरा रहा। वहीं पशुपालन विभाग भी बिना निदेशक के चलता रहा जिसके चलते कई विभागीय काम प्रभावित हुए। खासतौर पर स्थिति उस समय खराब हो गई जबकि लम्पी से प्रदेश के गोवंश को अपनी चपेट में ले लिया। देर से सही सरकार और विभाग जागे और लम्पी से निपटने के कई कदम भी उठाए।

लम्पी की चपेट में गोवंश
कोविड का कहर अभी पूरी तरह थमा भी नहीं था कि एक और बीमारी से राजस्थान में प्रवेश कर लिया। जब तक कुछ समझ आता यह प्रदेश के गोवंश को अपनी चपेेट में ले चुकी थी, बात हो रही है लम्पी की। विभागीय अधिकारियों के बीमारी को हल्के में लिए जाने का असर यह पड़ा कि प्रदेश के सीमावर्ती जिलों से शुरू हुई इस बीमारी से देखते ही देखते पूरे प्रदेश के गोवंश को अपनी चपेट में ले लिया। साल 2020 में देश में कोरोना फैला तो चाहे केंद्र सरकार हो या राज्य सरकार तुरंत सक्रिय हुईं और कोरोना की रोकथाम में जुट गईं, लेकिन जब बेजुबान गायों में फैले लम्पी वायरस को लेकर शुरुआत से ही लापरवाही बरती गई। हालात इस कदर खराब रहे हैं कि राजस्थान के कई जिलों में लम्पी से प्रतिदिन मरने वाली गायों की संख्या दो हजार से भी पहुंच गई। कई जगहों पर गोवंश को खुले में फेंका गया। राज्य सरकार ने लम्पी को महामारी घोषित नहीं किया और केंद्र को इसे लेकर पत्र लिखे लेकिन केंद्र ने भी इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाए। बीमारी फैलने के डर से लोगों ने दूध पीना बंद कर दिया। जिससे ना केवल शहर बल्कि गांवों में दूध और घी की सप्लाई प्रभावित हुई। जब स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई तो विभाग ने वैक्सीनेशन का काम शुरू किया। वर्तमान स्थिति की बात करें तो वर्तमान में साढ़े पंद्रह लाख से अधिक गाय संक्रमित हैं, जबकि 15 लाख 21 हजार से अधिक गोवंश का इलाज किया जा चुका है। 14 लाख से अधिक गोवंश लम्पी से रिकवर हो चुका है और साढ़े 75 हजार से अधिक गोवंश की मौत हो चुकी है और पशुपालन विभाग 98 लाख 9 हजार 694 गोवंश का वैक्सीनेशन किया जा चुका है।

कभी डाक्टर तो कभी कार्मिक आंदोलन की राह पर
वर्ष 2022 पशुपालन विभाग के लिए आंदोलन का साल रहा। कभी कार्मिक तो कभी वेटरनरी डॉक्टर्स आंदोलन करते रहे। जब लम्पी प्रदेश में अपने चरम पर था उसी समय पशु चिकित्सा कर्मियों ने अपनी मांगों को लेकर एक लंबा आंदोलन किया, आमरण अनशन पर बैठे, सरकार से मिले आश्वासन के बाद उन्होंने अपना आमरण अनशन समाप्त किया तो अब वेटरनरी डॉक्टर्स ने क्रमिक अनशन शुरू कर दिया जो अब भी जारी है। और तो और अब नए साल में एक बार फिर कार्मिक हड़ताल पर जाने वाले हैं।

तीन साल मिला विभाग को स्थाई निदेशक
प्रदेश में पशुपालन विभाग एकमात्र ऐसा विभाग रहा जो बिना निदेशक के चल रहा था। तीन साल के लंबे समय तक इस विभाग में स्थाई निदेशक की नियुक्ति ही नहीं की गई। पिछले दिनों निदेशक के पद पर डीपीसी की गई जिसके बाद स्थाई निदेशक के रूप में डॉ. भवानी सिंह राठौड़ को पदभार सौंपा गया। इसी प्रकार आरएलडीबी को भी इसी डीपीसी के जरिए स्थाई सीईओ मिला। डॉ. एनएम सिंह को आरएलडीबी का नया सीईओ बनाया गया। हाल में ही उन्होंने पदभार ग्रहण किया।
विभाग में निदेशक पद की डीपीसी की प्रक्रिया को पूरी कर ली गई लेकिन सयुंक्त निदेशक पदों की डीपीसी की प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हो पाई है, नतीजा विभागीय अधिकारी और कार्मिक बिना पदोन्नति ही सेवानिवृत्त हो रहे हैं।

पशुधन बीमा योजना को फिर से किया शुरू
पिछले एक साल से बंद पड़ी पशु धन बीमा योजना को सरकार ने हाल ही में एक बार फिर से शुरू किया। इसके लिए अब पशु पालन विभाग ने उच्च स्तर पर निजी कंपनी से बीमा अनुबंध किया , इससे पशुपालकों को राहत की उम्मीद जगी है। पूर्व में भामाशाह पशुधन बीमा योजना करीब एक साल चलने के बाद अचानक बंद कर दी गई थी। लंबे समय से परेशान पशुपालक अब पशुओं का बीमा कराने के साथ ही बैकिंग योजनाओं भी आसानी से लाभ उठा सकेंगे। पशु बीमा कराने के बाद चिकित्सा अधिकारी से टैग लगाना होगा। पशु की फोटो करानी होगी। जिस पशु का बीमा किया गया है यदि उसका टैग गिर जाता है या खो जाता है तो पशु चिकित्सक अधिकारी को सूचित कर नया टैग लगवाना होगा। दुधारू पशुओं में गाय का दो से 10 वर्ष एवं भैंस का तीन से दस वर्ष आयुवर्ग तक ही बीमा किया जा सकेगा। इसी तरह भार वाहक पशुओं में दो से आठ वर्ष, ऊंट का तीन से आठ वर्ष एवं छोटे पशुओं में सूअर तथा भेड़ आदि का एक से तीन वर्ष की आयु होने पर ही बीमा हो सकेगा। इसमें अधिकतम बीमित देय राशि पचास हजार रहेगी। भेड़, बकरी व सूअर की केटल यूनिट में दस पशु मानते हुए पचास पशुओं का अथवा पांच बड़े पशुओं गाय.भैंस आदि का बीमा किया जा सकेगा।

यूटीबी पर 300 पशुधन सहायक 200 वेटरनरी डॉक्टर्स हुई भर्ती
लम्पी के बढ़ते प्रकोप और विभाग में रिक्त पदों को देखते हुए सरकार ने यूटीबी पर पिछले दिनों 300 पशुधन सहायकों और 200 वेटरनरी डॉक्टर्स की विभाग में नियुक्ति की।इसके साथ ही ब्लॉक स्तर पर 352 सूचना सहायक अधिकारी के नए पदों का सृजन किया गया।

टैस्टिंग लैब में लम्पी के टेस्ट की सुविधा
लम्पी की टेस्टिंग में हो रही परेशानी को देखते हुए पांच बत्ती स्थित राज्य रोग निदान केंद्र में लम्पी डायग्नोस करने की सुविधा इसी साल शुरू की गई। इससे समय की बचत तो हो ही रही है साथ ही समय की भी बचत होगी। राज्य रोग निदान केंद्र को यह सुविधा सीएसआर फंड के तहत एचजी इन्फ्रास्ट्रक्चर की ओर से उपलब्ध करवाई गई है। जिसमें तकरीबन 25 लाख रुपए का खर्च आया है। जांच के लिए किट्स आदि की सुविधा पशुपालन विभाग उपलब्ध करवा रहा है। अभी तक राज्य का पशुपालन विभाग लम्पी की जांच के लिए पशुधन के सैम्पल कृषि अनुसंधान परिषद की भोपाल स्थित प्रयोगशाला, लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय हिसार और आईवीआरआई बरेली भेज रहा था। इन तीन प्रयोगशालाओं में रैंडम आधार पर सैम्पल भेजे जा रहे थे जिससे रिपोर्ट आने में शुरुआत में 8 से10 दिन का समय लग रहा था लेकिन जैसे जैसे लम्पी राजस्थान के साथ दूसरे राज्यों में फैलने लगा रिपोर्ट आने में और भी समय लगने लगा था। ऐसे में पशुधन के इलाज में भी देरी हो रही थी।

900 पशु चिकित्सा अधिकारी भर्ती पर लगा ग्रहण
प्रदेश के पशुपालन विभाग की रीढ़ कहलाने वाले पशुचिकित्सक के 70 फीसदी पद पिछले 7 वर्षों से रिक्त पड़े हैं। स्थाई पशुचिकित्सक पद के लिए अंतिम नियुक्ति वर्ष 2015 मे हुई थी उसके बाद आज तक एक भी पद पर डॉक्टर्स की स्थाई नियुक्ति नहीं हुई है। पहले तो इस भर्ती की विज्ञप्ति जारी करने में सरकार ने 2 वर्ष लगा दिए और वर्ष 2020 के बाद से ही यह भर्ती प्रक्रिया कोर्ट में अटकी हुई है। सितंबर 2022 में विधानसभा का सत्र होने से सरकार ने इस मामले की हाई कोर्ट में पैरवी के लिए महाधिवक्ता को नियुक्त किया जिससे इस मामले की कोर्ट में चार दिन तक लगातार सुनवाई हुई और 29 सितंबर को फैसला सुरक्षित रखा गया था लेकिन फैसला सुरक्षित रखे हुए को तीन माह हो गए लेकिन फैसला नहीं आया।

ऊंटों के संरक्षण व संवद्र्धन के लिए विशेष नीति
जन घोषणा पत्र में किए गए वादे को पूरा करने के लिए सरकार ने उष्ट्र संरक्षण योजना लागू करने की घोषणा की। जिसके तहत अब 2.60 करोड़ रुपए का वित्तीय प्रावधान किया गया। इस योजना में पशुपालकों की तरफ से मादा ऊंट और बच्चे को टैग लगाकर पहचान पत्र जारी किए जाने की बात कही गई है। योजना के तहत पशु चिकित्सक को हर पहचान पत्र के लिए 50 रुपए का मानदेय दिए जाने, पहचान पत्र जारी करने के बाद ऊंट पालक को भी 5 हजार रुपए पहली किस्त के रूप मेंए ऊंट के बच्चे की उम्र एक साल होने पर भी पशुपालक को दूसरी किस्त के 5 हजार रुपए देने का प्रावधान किया गया है। राज्य सरकार की तरफ से अनुदान सीधा ऊंट पालक के बैंक खाते में ट्रांसफर किया जाएगा।


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