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बेहद उदास और निराश है आज का युवा

ब्रिटेन में हुए शोध में खुलासा, 16 से 25 साल का युवा है निराश के घेरे में, आत्मविश्वास पहुंचा बेहद निचले पायदान पर

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आज का युवा बीते एक दशक में सबसे नाखुश है क्योंकि उसे यह नहीं पता कि सेटबैक्स से कैसे बाहर निकलना है। उसकी नाखुशी चरम पर पहुंच चुकी है। ब्रिटेन के प्रिंस ट्रस्ट की ओर से किए गए एक शोध में यह निष्कर्ष सामने आया है।
ट्रस्ट के मुताबिक, भविष्य और पैसे की चिंता के साथ ‘बेहतर नहीं होना’ 16 से 25 साल के युवाओं को उदासी के घेरे में ले रहा है।
इस शोध में पाया गया है कि 2009 की तुलना में आज का युवा न केवल नाखुश है, बल्कि उसकी भावनात्मक सेहत भी काफी खराब है। इसके इंडेक्स में युवाओं की भावनात्मक सेहत को 0 से 100 तक बीच की रेटिंग प्रदान की गई है, जो यह बताती है कि उनकी काम और रिश्तों को लेकर उसकी खुशी का स्तर क्या है।
इस साल के सर्वे में कुल मिलाकर औसत आंकड़ा 57 का था, जो पिछले साल की तुलना में चार कम था और एक दशक पहले जब से यह सर्वे शुरू हुआ, उसकी तुलना में 70 कम था। सर्वे में शामिल करीब आधे युवाओं का यह कहना था कि वह उन्हें नहीं पता कि जिंदगी में सामने आई परेशानियों और सेटबैक्स से वे कैसे उबरें। वहीं बहुत से युवाओं को अपनी आर्थिक स्थिति की चिंता सता रही थी। सर्वे में शामिल तीन में से एक युवा का यह भी कहना था कि नौकरी न होना उनकी मानसिक सेहत को खतरे में डाल रहा है। दस में एक का यह कहना था कि उनकी नौकरी किसी न किसी वजह से चली गई है और 54 फीसदी ने माना कि उनकी चिंता पैसों को लेकर सबसे ज्यादा है। वहीं 61 फीसदी युवाओं का यह कहना था कि वे लगातार स्ट्रेस महसूस करते हैं। 53 फीसदी ने कहा कि उनके सिर पर हमेशा चिंता सवार रहती है और 27 फीसदी का यह कहना था कि वे अक्सर ‘होपलैस’ महसूस करते हैं। सर्वे में शामिल युवाओं में से आधे ने स्वीकारा कि उनके साथ मानसिक सेहत को लेकर समस्या रही है।
प्रिंट ट्रस्ट के यूके चीफ एग्सक्यूटिव निक स्टेस के मुताबिक, यह हम सभी के लिए खतरे की घंटी है। युवा पीढ़ी पहले की तुलना में निराशा के दलदल में धंसती जा रही है। इस पीढ़ी का खुद में विश्वास खो रहा है। युवाओं का इस बात में यकीन कम होता जा रहा है कि वे जिंदगी में अपने बनाए लक्ष्य हासिल कर पाएंगे। ऐसे वक्त में सबसे जरूरी चीज जो हम लोग कर सकते हैं, वह यह है कि हम युवाओं को बताएं कि ऊंची उम्मीदें होने जरूरी है। नौकरी, कॅरियर और जिंदगी में आगे बढऩे के अनेक अवसर हमें मिलते हैं और उनका साथ हम हमेशा देंगे।’

क्या कहते हैं आंकड़े

10 में से एक
5 से 16 आयुवर्ग के बच्चे और युवा मानसिक सेहत संबंधी समस्या से जूझ रहे हैं।

68 फीसदी
बढ़ोतरी हुई है अस्पताल आने वाले ऐसे युवाओं की संख्या में बीते 10 साल में, जिन्होंने अपने आपको नुकसान पहुंचाया था।

50 फीसदी
वयस्कों को बचपन में मानसिक सेहत संबंधी समस्या हुई थी।