हाल ही में जैसलमेर में आए तेज तूफान से एक बार फिर ऐतिहासिक सोनार किले में वैकल्पिक मार्ग की जरूरत महसूस की गई। हकीकत यह भी है कि सोनार दुर्ग में आवाजाही करने के लिए एकमात्र चार घाटियों वाले रास्ते के अलावा रिंग रोड की तरफ से सीढिय़ां बनाकर वैकल्पिक मार्ग बनाए जाने की जरूरत को लेकर जिम्मेदारों ने मूंद रखी है।
हाल ही में जैसलमेर में आए तेज तूफान से एक बार फिर ऐतिहासिक सोनार किले में वैकल्पिक मार्ग की जरूरत महसूस की गई। हकीकत यह भी है कि सोनार दुर्ग में आवाजाही करने के लिए एकमात्र चार घाटियों वाले रास्ते के अलावा रिंग रोड की तरफ से सीढिय़ां बनाकर वैकल्पिक मार्ग बनाए जाने की जरूरत को लेकर जिम्मेदारों ने मूंद रखी है। एक बार फिर जब प्राकृतिक आपदाओं की आशंकाओं के बीच यह जरूरत पूरी शिद्दत के साथ जैसलमेर दुर्ग के बाशिंदों सहित आमजन के सामने है। पर्यटन सीजन के चरम काल के दौरान कम से कम 10-15 ऐसे होते हैं, जब इस दुर्ग की घाटियों पर पैदल चलने वालों का जाम लग जाता है और हालात डरावने बन जाते हैं। इसके साथ ही भूकम्प, अतिवृष्टि या तेज तूफान आदि प्राकृतिक आपदाओं के कारण अगर कभी मुख्य रास्ता बंद हो गया तो राहत व बचाव कार्य करने भारी पड़ जाएंगे। अब जबकि केंद्र में कला एवं संस्कृति मंत्रालय का जिम्मा जोधपुर सांसद गजेंद्रसिंह शेखावत को मिला है, ऐसे में उम्मीद जगी है कि पुरातत्व विभाग के जिम्मेदारों को बनी बनाई टेक से हट कर सोचने के लिए प्रेरित कर सकेंगे। इसी तरह से राजस्थान के मुख्य सचिव पद पर सुधांश पंत आसीन हैं, जिन्होंने कुछ साल पहले सोनार दुर्ग से वैकल्पिक मार्ग के लिए प्रयास करने के संबंध में जिला प्रशासन को प्रेरित किया था। इस तरह से उच्च प्रशासनिक स्तर पर सोनार दुर्ग में तलहटी से आवाजाही करने के लिए वैकल्पिक मार्ग को लेकर एक किस्म की सहमति बनी है और पूर्व में बॉम्बे आईआईटी जैसे तकनीकी संस्थान की रिपोर्ट में भी इसकी आवश्यकता जताई जा चुकी है।
-भूकम्प जैसी किसी प्राकृतिक आपदा या पर्यटन सीजन के चरम पर रहने के दौरान हजारों लोगों के एक साथ दुर्ग में चढऩे और उतने के समय वाली परिस्थितियों में भगदड़ से लेकर किसी का दम घुटने जैसी अप्रिय घटनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता।
पुरातत्व एवं सर्वेक्षण विभाग ने सोनार दुर्ग को संरक्षित स्मारकों की फेहरिस्त में शामिल किया हुआ है। दुर्ग के मौलिक स्वरूप व सौन्दर्य को बनाए रखने के लिए कई नियमों की पाबंदियां लगा रखी हैं। इसी वजह से सैकड़ों साल प्राचीन चार प्रोलों वाले एकमात्र रास्ते के साथ एक और नया मार्ग बनाने की किसी भी सिफारिश को अब तक स्वीकार नहीं किया गया है।
विभाग के नियम जब बने तब इतनी तादाद में दुर्ग में सैलानियों की आवक के बारे नहीं सोचा गया था। यह वह दौर था, जब दुर्ग में भी कम लोग निवास करते थे और वहां व्यावसायीकरण नहीं था। गौरतलब है कि वर्षों पहले राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) ने दुर्ग में करीब साढ़े तीन हजार की आबादी और दर्जनों होटल्स, गेस्ट हाऊस व हजारों पर्यटकों की आवाजाही आदि के मद्देनजर दुर्ग के दक्षिण-पूर्वी हिस्से से 99 सीढिय़ों वाले वैकल्पिक मार्ग की जरूरत जताई थी। कुछ साल पहले जिला प्रशासन ने पुरातत्व विभाग को वैकल्पिक मार्ग निर्माण की स्वीकृति के लिए पत्राचार किया था। जिसे विभाग ने नामंजूर किया।