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Barmer Election Result 2019 : भाजपा छोड़ कांग्रेस में आए मानवेन्द्र सिंह के लिए जोरदार झटका

Barmer Election Result 2019 : बाड़मेर-जैसलमेर सीट के शुरुआती रुझान में भाजपा प्रत्याशी की बढ़त लगातार बरकरार है। भाजपा उम्मीदवार कैलाश चौधरी 116532 मतों से कांग्रेस के मानवेन्द्र सिंह से आगे चल रहे हैं।

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manvendra singh

जैसलमेर। Barmer Election Result 2019 : बाड़मेर-जैसलमेर सीट के शुरुआती रुझान में BJP प्रत्याशी की बढ़त लगातार बरकरार है। भाजपा उम्मीदवार कैलाश चौधरी ( Kailash Chaudhary ) 116532 मतों से कांग्रेस के मानवेन्द्र सिंह से आगे चल रहे हैं। बाड़मेर-जैसलमेर लोकसभा क्षेत्र में आने वाले सभी 8 विधानसभा क्षेत्र में भाजपा कांग्रेस से आगे है।

इस सीट से कांग्रेस ने 42 साल बाद राजपूत प्रत्याशी को उतारा है। 1952 से 2019 तक हुए चुनावों में दो बार कांग्रेस ने राजपूत प्रत्याशी को टिकट दिया और दोनों ही बार हार हुई। 1977 में मिली शिकस्त के बाद कांग्रेस ने यहां जाट-मुसलमान और अनुसूचित जाति के फैक्टर पर ही भरोसा किया, लेकिन इस बार जाट प्रत्याशी को टिकट नहीं दिया गया है।

1952 से अब तक हुए चुनावों में कांंग्रेस के लिए बाड़मेर-जैसलमेर में जाट- मुसलमान और अनुसूचित जाति का गठजोड़ फायदेमंद रहा। इसी का नतीजा रहा कि कांग्रेस 1991, 1996, 1998,1999 में लगातार जीती। वर्ष 2004 के चुनावों में भाजपा ने मानवेन्द्र सिंह को टिकट दिया तो मानवेन्द्र ने कांग्रेस के जातिगत गठजोड़ में सेंध मारी और मुस्लिम वोटों को अपने पक्ष में किया।

मानवेंद्र की 2 लाख 71 हजार 888 वोटों से रेकार्ड जीत हुई। 2009 के चुनावों में कांग्रेस ने हरीश चौधरी को टिकट दिया। हरीश ने कांग्रेस के इस गठजोड़ को काफी हद तक फिर साध लिया और मानवेन्द्र को शिकस्त खानी पड़ी। 2014 के चुनावों में समीकरण एकदम ही बदल गए। कांग्रेस ने हरीश चौधरी को टिकट दिया तो भाजपा ने भी कर्नल सोनाराम चौधरी को मैदान में उतार दिया।

इस दौरान भाजपा से नाराज जसवंत सिंह निर्दलीय उतर गए। एेसे में वोटों के बंटवारे में कर्नल सोनाराम चौधरी ने जीत दर्ज की। कांग्रेस जाट मतदाताओं को अपने साथ जोड़े हुए रही, लेकिन कर्नल सोनाराम चौधरी के भाजपा में जाने के साथ ही जाट मतदाताओं का झुकाव कर्नल सोनाराम के साथ रहा।

इस बार के चुनावों में नया समीकरण आ गया है। कांग्रेस ने मानवेन्द्र सिंह को टिकट देकर राजपूत मतदाताओं पर दांव खेला है। कांग्रेस ने 1962 के चुनावों में रामराज्य परिषद के तनसिंह के सामने ओंकार सिंह को टिकट दिया था जो हार गए। इसके बाद 1977 में तनसिंह ने खेतसिंह को हरा दिया। 1977 के बाद कांग्रेस ने राजपूत प्रत्याशी को मैदान में नहीं उतारा है।