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जैसाण में मनाई बीज, देखे शगुन और खाया खीच

जैसलमेर जिले में अक्षय तृतीया से एक दिन पहले आखाबीज का पर्व परंपरागत रूप से उत्साह के माहौल में मनाया गया। गुरुवार सुबह से ही शहर के सोनार दुर्ग स्थित लक्ष्मीनाथ मंदिर, बाबा रामदेव मंदिर, गणेश मंदिर व शिव मंदिरों में दर्शनार्थियों की भीड़ रही। युवाओं ने पतंगबाजी का भी लुत्फ उठाया। सामूहिक रूप से भोजन किया। इस दिन महिलाओं ने अपने घरों में गेहूं व बाजरे का खीच बनाया और घर आने वाले सगे संबंधियों व परिचितों को भोजन करवाया।

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जैसलमेर जिले में अक्षय तृतीया से एक दिन पहले आखाबीज का पर्व परंपरागत रूप से उत्साह के माहौल में मनाया गया। गुरुवार सुबह से ही शहर के सोनार दुर्ग स्थित लक्ष्मीनाथ मंदिर, बाबा रामदेव मंदिर, गणेश मंदिर व शिव मंदिरों में दर्शनार्थियों की भीड़ रही। युवाओं ने पतंगबाजी का भी लुत्फ उठाया। सामूहिक रूप से भोजन किया। इस दिन महिलाओं ने अपने घरों में गेहूं व बाजरे का खीच बनाया और घर आने वाले सगे संबंधियों व परिचितों को भोजन करवाया। बुजुर्गों ने शगुन देखकर सुकाल होने की कामना की। अबूझ सावा होने से यहां विवाह समारोहों के कारण अच्छी रौनक देखने को मिली। ग्रामीणांचलों में विभिन्न समाज के लोगों ने अपने बुजुर्गों से आशीर्वाद लिया। लोगों ने एक-दूसरे के घर जाकर रामा श्यामा की और साथ बैठकर भोजन किया। पोकरण क्षेत्र में अक्षय तृतीया के तीन दिवसीय लोकपर्व के दूसरे दिन गुरुवार को अक्षय द्वितीया का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस मौके पर लोगों ने अपने घरों में गेहूं, बाजरे का खीच, गळवाणी, आखी बड़ी, काचरी व ग्वार फली की सब्जी के साथ भोजन किया। अक्षय द्वितीया के मौके पर कस्बे व ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों ने एक साथ बैठकर भोजन किया और एक दूसरे को द्वितीया के मौके पर बधाई व शुभकामनाएं दी। गौरतलब है कि रबी की फसल की कटाई के बाद विशेषकर मारवाड़ क्षेत्र में अक्षय तृतीया का पर्व परंपरागत रूप से मनाया जाता है। आपसी भाइचारे व सद्भाव को मजबूत बनाने के लिए हाळी अमावस्या से शुरू होने वाला यह पर्व अक्षय तृतीया तक चलता है। इस दौरान किसान वर्ग इस त्यौहार को हर्षोल्लास व परंपरा के अनुसार मनाते है। तीन दिवसीय पर्व के मौके पर कस्बे के माहेश्वरी गांधी समाज की ओर से विशेष पहल की गई।