21 अप्रैल 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

छोटे प्रयासों से बदलाव संभव, पानी की बचत और पौधरोपण से बनेगी अनुकूल स्थति

जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण और तेजी से घटते प्राकृतिक संसाधनों के बीच यह दिन पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।

2 min read
Google source verification

जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण और तेजी से घटते प्राकृतिक संसाधनों के बीच यह दिन पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। रेगिस्तानी क्षेत्र जैसे जैसलमेर में पृथ्वी दिवस का महत्व और बढ़ जाता है, जहां पानी की कमी, बढ़ता तापमान और मरुस्थलीकरण जैसी चुनौतियां लगातार गहरा रही हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि अभी ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में स्थिति और गंभीर हो सकती है।

बढ़ते पर्यावरणीय खतरे

-जलवायु परिवर्तन से तापमान में लगातार वृद्धि

-भूजल स्तर में गिरावट और जल संकट

-प्लास्टिक और कचरे से बढ़ता प्रदूषण

-हरित क्षेत्र में कमी और वनस्पति का नष्ट होना

-अनियंत्रित शहरीकरण और संसाधनों पर दबाव

-स्थानीय स्तर पर चुनौतियां

पानी :सबसे बड़ी चुनौती

जैसलमेर और आसपास के क्षेत्रों में पानी की कमी सबसे बड़ी समस्या है। पारंपरिक जल स्रोत जैसे तालाब और कुएं धीरे-धीरे खत्म होते जा रहे हैं। वहीं, बढ़ते टूरिज्म और शहरी विस्तार ने कचरा प्रबंधन की समस्या को भी गंभीर बना दिया है।

इन उपयोगों की दरकार

-पानी का सीमित और समझदारी से उपयोग करें

-प्लास्टिक का उपयोग कम करें और पुन: उपयोग को बढ़ावा दें

-पेड़-पौधे लगाएं और हरियाली बढ़ाएं

-कचरे का सही निपटान और स्वच्छता बनाए रखें

-पर्यावरण संरक्षण के लिए जागरूकता फैलाएं

पारंपरिक तकनीकों को पुनर्जीवित करना बेहद जरूरी

पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, पृथ्वी दिवस केवल एक दिन का आयोजन नहीं, बल्कि एक निरंतर जिम्मेदारी का संदेश है। यदि हम आज भी पर्यावरण के प्रति गंभीर नहीं हुए, तो आने वाली पीढ़ियों को इसका भारी खामियाजा भुगतना पड़ेगा। वे यह भी बताते हैं कि छोटे-छोटे प्रयास—जैसे पानी बचाना, ऊर्जा की खपत कम करना और पेड़ लगाना—भी बड़े बदलाव ला सकते हैं। खासकर मरुस्थलीय क्षेत्रों में जल संरक्षण की पारंपरिक तकनीकों को पुनर्जीवित करना बेहद जरूरी है।

एक्सपर्ट व्यू - हर दिन हो पृथ्वी-संरक्षण का संकल्प करने का प्रयास

मोटिवेशनल स्पीकर डॉ. गौरव बिस्सा का कहना है कि पृथ्वी दिवस के अवसर पर स्कूलों, कॉलेजों और सामाजिक संगठनों की ओर से रैलियां, रोपण कार्यक्रम और जागरूकता अभियान आयोजित किए जाते हैं। इन गतिविधियों के माध्यम से लोगों को पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार बनने के लिए प्रेरित किया जाता है। आज जरूरत इस बात की है कि हम केवल एक दिन नहीं, बल्कि हर दिन पृथ्वी के संरक्षण के लिए प्रयास करें क्योंकि स्वस्थ पर्यावरण ही मानव जीवन और भविष्य की सबसे बड़ी सुरक्षा है।