3 जनवरी 2026,

शनिवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

बच्चों की सुरक्षा को लेकर समन्वित कार्रवाई पर जोर, बाल संरक्षण से जुड़े विभागों ने जताई एकजुटता

मानव दुर्व्यापार विरोधी दिवस के अवसर पर सिकोईडिकोन संस्था की पहल पर जैसलमेर में बाल तस्करी की रोकथाम और बच्चों की सुरक्षा को लेकर कार्यशाला आयोजित की गई।

2 min read
Google source verification

मानव दुर्व्यापार विरोधी दिवस के अवसर पर सिकोईडिकोन संस्था की पहल पर जैसलमेर में बाल तस्करी की रोकथाम और बच्चों की सुरक्षा को लेकर कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यक्रम में बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष मुकेश व्यास, सदस्य परवेज खान, मानव तस्करी विरोधी यूनिट के प्रभारी हरी राम, जीआरपी प्रभारी दुर्ग सिंह भाटी, जिला बाल संरक्षण इकाई से वीरेंद्र शेखावत, एफपीएफ प्रभारी सोमवीर चौधरी और चाइल्डलाइन कोऑर्डिनेटर डोली कवालियां शामिल हुए।

कार्यशाला में सभी वक्ताओं ने एक सुर में कहा कि बच्चों की तस्करी से निपटने के लिए सभी विभागों और एजेंसियों के बीच समन्वित और ठोस कार्रवाई की आवश्यकता है। यह भी रेखांकित किया गया कि बाल तस्करी केवल बाल मजदूरी या यौन शोषण तक सीमित नहीं है, बल्कि कई बच्चियों को जबरन विवाह के लिए भी तस्करी का शिकार बनाया जाता है। यह गंभीर सामाजिक संकट है जिस पर पर्याप्त चर्चा और कार्रवाई नहीं हो रही है।कार्यशाला में कानून प्रवर्तन एजेंसियों के समक्ष आने वाली चुनौतियों पर चर्चा करते हुए कहा गया कि मौजूदा कानूनों के प्रति जागरूकता बढ़ाना, संवेदनशील तबकों को ट्रैफिकिंग गिरोहों के कामकाज के तरीकों से सतर्क करना और सभी विभागों के बीच मजबूत तालमेल कायम करना जरूरी है। इससे न केवल तस्करी की रोकथाम संभव होगी बल्कि मुक्त कराए गए बच्चों को समयबद्ध न्याय और पुनर्वास भी सुनिश्चित किया जा सकेगा।

संगठन की ओर से बताया गया कि जुलाई में रेलवे सुरक्षा बल के सहयोग से रेलवे स्टेशनों पर जागरूकता अभियान चलाया गया। इस दौरान यात्रियों, रेलकर्मियों, दुकानदारों, विक्रेताओं और कुलियों को बाल तस्करी के संकेत पहचानने और सुरक्षित रिपोर्टिंग के लिए प्रशिक्षित किया गया।सिकोईडिकोन संस्था के निदेशक पी एम पांल ने कहा कि बच्चों की तस्करी रोकने के लिए सबसे जरूरी है कि तस्करी में लिप्त लोगों को शीघ्र और सख्त सजा मिले। जब कानून का भय बनेगा तभी ट्रैफिकिंग गिरोहों पर प्रभावी नियंत्रण संभव होगा। उन्होंने कहा कि मजबूत प्रशासनिक समन्वय और समयबद्ध कानूनी कार्रवाई ही बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकती है।