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मोबाइल स्क्रीन से निकोटिन के जाल तक… युवा पीढ़ी पर बढ़ता असर

संगठन ने युवाओं को लक्ष्य बनाकर किए जाने वाले तम्बाकू और निकोटिन उत्पादों के प्रचार को गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बताया है। कई डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ऐसे उत्पाद आधुनिक जीवनशैली, फैशन और सामाजिक स्वीकार्यता के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किए जाते हैं, जिससे किशोर और युवा वर्ग अधिक प्रभावित होता है।

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मोबाइल स्क्रीन पर कुछ सैकंड के वीडियो, कंटेंट, प्रभावशाली इन्फ्लुएंसर और डिजिटल ट्रेंड नई पीढ़ी की पसंद-नापसंद तय कर रहे हैं। इसी डिजिटल दुनिया में निकोटिन और तम्बाकू उत्पादों की मौजूदगी स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए नई चिंता बन गई है। तम्बाकू की लत अब केवल पारंपरिक बीड़ी और सिगरेट तक सीमित नहीं रही, बल्कि सोशल मीडिया के जरिए नए रूपों में युवाओं तक पहुंच रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार दुनिया में लगभग 1.3 अरब लोग तम्बाकू का उपयोग करते हैं।

संगठन ने युवाओं को लक्ष्य बनाकर किए जाने वाले तम्बाकू और निकोटिन उत्पादों के प्रचार को गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बताया है। कई डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ऐसे उत्पाद आधुनिक जीवनशैली, फैशन और सामाजिक स्वीकार्यता के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किए जाते हैं, जिससे किशोर और युवा वर्ग अधिक प्रभावित होता है। तम्बाकू नियंत्रण की लड़ाई अब केवल दुकानों और सार्वजनिक स्थानों तक सीमित नहीं है। यह संघर्ष मोबाइल स्क्रीन, डिजिटल कंटेंट और सोशल मीडिया के उस प्रभाव से भी जुड़ गया है, जो नई पीढ़ी के व्यवहार और निर्णयों को आकार दे रहा है।

स्क्रीन पर दिखता ट्रेंड, आदत में बदलता व्यवहार

विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया एल्गोरिद्म बार-बार समान प्रकार का कंटेंट दिखाते हैं। यदि कोई युवा निकोटिन या वेपिंग से जुड़ा कंटेंट देखता है तो उसके सामने ऐसे वीडियो और पोस्ट की संख्या बढ़ सकती है। धीरे-धीरे यह व्यवहार सामान्य और स्वीकार्य प्रतीत होने लगता है। युवाओं के बीच आधुनिक निकोटिन उत्पादों को लेकर जिज्ञासा और प्रयोग की प्रवृत्ति भी बढ़ रही है। डिजिटल माध्यमों पर दिखाई जाने वाली जीवनशैली और वास्तविक स्वास्थ्य जोखिमों के बीच का अंतर अक्सर स्पष्ट नहीं हो पाता।

बदलती तस्वीर

-तम्बाकू का प्रचार अब पारंपरिक माध्यमों से आगे निकल चुका

-डिजिटल प्लेटफॉर्म युवाओं तक पहुंच का बड़ा माध्यम बने

-आकर्षक पैकेजिंग और आधुनिक छवि जोखिम को छिपा रही

-ऑनलाइन ट्रेंड ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों तक पहुंच रहे

ग्रामीण इलाकों में भी बदल रहा परिदृश्य

जैसलमेर जैसे दूरस्थ जिलों में स्मार्टफोन और इंटरनेट की पहुंच बढ़ने के साथ डिजिटल प्रभाव भी बढ़ा है। पहले जहां तम्बाकू का उपयोग स्थानीय सामाजिक परिवेश तक सीमित था, वहीं अब राष्ट्रीय और वैश्विक डिजिटल ट्रेंड ग्रामीण युवाओं तक भी पहुंच रहे हैं। स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े लोग इसे आने वाले समय की महत्वपूर्ण चुनौती मान रहे हैं।

डेटा जो बढ़ा रहा चिंता

-दुनिया में लगभग 1.3 अरब तम्बाकू उपयोगकर्ता मौजूद हैं।

- लगभग 80 प्रतिशत तम्बाकू उपयोगकर्ता निम्न और मध्यम आय वाले देशों में रहते हैं।

-विश्व स्वास्थ्य संगठन युवाओं को लक्ष्य बनाने वाले तम्बाकू विपणन को गंभीर खतरा मानता है।

-किशोर और युवा वर्ग तम्बाकू उद्योग की प्रमुख लक्ष्य आबादी माने जाते हैं।

एक्सपर्ट व्यू: ऑनलाइन कंटेंट की निगरानी और तथ्य आधारित जागरूकता जरूरी

जनस्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. निवेदिता शर्मा का कहना है कि किशोर और युवा आयु वर्ग विज्ञापन, डिजिटल प्रभाव और सामाजिक स्वीकृति से सबसे अधिक प्रभावित होता है। इस कारण तम्बाकू नियंत्रण अभियान अब केवल चेतावनी संदेशों तक सीमित नहीं रह सकते। डिजिटल साक्षरता, ऑनलाइन कंटेंट की निगरानी और तथ्य आधारित जागरूकता को भी अभियान का हिस्सा बनाना होगा।