
पोकरण कस्बे में कचरे के निस्तारण के लिए माकूल प्रबंध नहीं है। गत कुछ वर्षों से कस्बे से एकत्र किए जाने वाले कचरे को शहर से दो किलोमीटर दूर खुले स्थान पर डाला जा रहा है, जहां पशुओं का जमावड़ा नजर आ रहा है। इसके अलावा व्यास कॉलोनी के पीछे भी कचरे के ढेर देखने को मिल रहे है। गौरतलब है कि करीब पांच किमी क्षेत्रफल में फैले पोकरण की आबादी 25 हजार से अधिक है। सीवरेज के गंदे पानी की निकासी के लिए कोई ट्रीटमेंट प्लांट भी अधूरा पड़ा है, जिसका पानी सीधा रिण क्षेत्र में जा रहा है।
नगरपालिका की ओर से कुछ वर्ष पूर्व फलसूंड रोड पर राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या- 125 के किनारे करीब 400 बीघा भूमि कचरे के निस्तारण व ट्रीटमेंट प्लांट निर्माण के लिए आरक्षित की गई है। कस्बे से ट्रेक्टर व टैक्सी के माध्यम से कचरा उठवाकर यहां खुली जगह में डाला जा रहा है। यहां जगह-जगह कचरे के ढेर लगे पड़े है। चारों तरफ पॉलीथिन बिखरी पड़ी है, जिसका निस्तारण नहीं किए जाने के कारण विचरण करते पशु पॉलीथिन व कचरे को खा रहे है और बीमार हो रहे है।
पोकरण के विभिन्न गली मोहल्लों में सीवरेज लाइन अवश्य लगा दी गई है, लेकिन ट्रीटमेंट प्लांट अधूरा पड़ा है। इन सीवरेज से गंदा पानी नाले नालियों के माध्यम से व्यास कॉलोनी के पीछे से होते हुए जोधपुर रोड के उत्तर की तरफ स्थित रिण क्षेत्र में जा रहा है, जिससे नमक उत्पादन क्षेत्र भी दूषित हो रहा है। इसी तरह यह गंदा पानी मोहल्लों के बीच से होकर गुजरता है। ऐसे में यहां निवास कर रहे लोगों का भी दुर्गंध के कारण बेहाल हो रहा है। कस्बे में फलसूंड तिराहे के पास ट्रीटमेंट का कार्य शुरू कर यहां मशीनें भी लगाई गई, लेकिन न तो इसे पूरा किया गया, न ही चालू किया जा रहा है। ऐसे में सीवरेज के गंदे पानी का निस्तारण नहीं हो पा रहा है।
कस्बे में सफाई व्यवस्था के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे है। पोकरण में स्थित 25 वार्डों में नगरपालिका व ठेकेदार के सफाई कर्मचारियों की ओर से कचरा एकत्र किया जाता है, जिन्हें ट्रैक्टरों व टैक्सी के माध्यम से बाहर फिकवाया जाता है। गली-मोहल्लों की संख्या को देखते हुए सफाई कर्मचारियों की संख्या नाकाफी है। ऐसे में कस्बे में पर्याप्त सफाई नहीं हो पाती है। कस्बे के गली व मोहल्लों में स्थित नाले नालियों की समय पर सफाई नहीं होने से आए दिन गंदा पानी ओवरफ्लो होकर सडक़ पर जमा हो जाता है। बावजूद इसके नगरपालिका की ओर से व्यवस्था सुधारने को लेकर कोई कवायद नहीं की जा रही है।
Published on:
03 Jan 2025 10:54 pm
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