
jaisalmer
पर्यटन सीजन पर अमूमन चाक चौबंद व्यवस्थाओं के लिए कमर कसने वाली नगरपरिषद अब सुस्त नजर आ रही है। शायद व्यवस्थाओं व सुविधाओं की जरूरत 'मेहमानों' को ही है, स्थानीय बाशिंदों को नहीं। मौजूदा स्थिति यह है कि जैसलमेर नगर की सड़कों-गलियों में इन दिनों अहसास होता है कि यहां 'पशु-राज' कायम है।मुख्य मार्गों से लेकर भीतरी भागों तक और आवासीय कॉलोनियों से लेकर बाजारों तक में दर्जनों की संख्या में स्वच्छंद भाव से घूमते, आपस में लड़ते और लोगों की जान को जोखिम में डालते गाय-बैल, श्वान तथा गंदगी को कई गुना बढ़ाते सूअर नजर आते हैं।
यह और बात है कि इन पर अंकुश लगाने की जिम्मेदारी जिस नगरपरिषद की है, बस उसे ही शायद यह सब मंजर नजर नहीं आता। इसके अलावा शहर की सफाई व्यवस्था की बदहाली की कहानी जगह-जगह जमा कूड़ा-करकट के ढेर और सड़कों पर निर्बाध बहता गंदा पानी कह रहा है।
दिन-ब-दिन बढ़ रही समस्या
जैसलमेर शहर में पर्यटन सीजन के 'ऑफ' हो जाने के बाद तो लगता है, मूलभूत कार्यों के प्रति नगरपरिषद और प्रशासन ने भी अपनी आंखें मूंद ली है। यही कारण है कि आवारा पशुओं को पकड़कर कांजी हाऊस में डालने की कवायद पिछले कई महीनों से बंद पड़ी है। शहर भर में बेसहारा गायों और बैलों की भारी तादाद ने स्थानीय लोगों के साथ छिटपुट संख्या में अब भी आने वाले सैलानियों की नाक में दम कर रखा है। शहर की शांति व्यवस्था को भंग करने वाले श्वानों को पकडऩे और गंदगी के प्रसार के प्रमुख कारक सुअरों को हटवाने की ओर परिषद प्रशासन का कतई ध्यान नहीं होने से उनकी तादाद निरंतर बढ़ रही है।
डरावने बन गए हैं हालात
ऐतिहासिक सोनार दुर्ग समेत शहर के हृदय स्थल गोपा चौक से लेकर सदर बाजार, कचहरी मार्ग, गांधी चौक और अमरसागर प्रोल से बाहर, उधर पुराना चुंगीनाका, गड़ीसर प्रोल से गुलासतला, आसनी पथ, गांधी कॉलोनी, कलाकार कॉलोनी, अंबेडकर कॉलोनी के साथ पटवा हवेली क्षेत्र में आए गली-मोहल्लों में बेसहारा पशुओं के हर समय मंडराते रहने से वाहन चालकों से लेकर पैदल चलने वाले राहगीरों की शामत आई रहती है। बाजारों में दुकानदार और अन्य लोग बेतहाशा परेशान हैं। गाय-बैल आपस में कब भिड़ जाए अथवा पास से गुजर रहे व्यक्ति को निशाना बना दे, कोई नहीं कह सकता। विगत वर्षों के दौरान बीसियों लोग उनके शिकार होकर अस्पताल पहुंच चुके हैं। जिनमें से कुछेक की मौत तक हो गई।
कागजी साबित हुए प्रयास
नगरपरिषद का सबसे बुनियादी कार्य साफ-सफाई व्यवस्था ही उससे नहीं संभल रही। प्रशासन की ओर से अन्य विभागीय अधिकारियों को सफाई व्यवस्था की निगरानी के लिए प्रभारी बनाए जाने की कवायद भी कागजी साबित हुई। शहर में जगह-जगह गंदगी के ढेर और नाली-नालों का पानी ओवरफ्लो होकर सड़कों पर बहने से यहां घूमने आने वाले लोगों की परेशानी देखी जा सकती है।
फैक्ट फाइल -
-12 से अधिक स्थानों पर बना हुआ है गंदगी का साम्राज्य
-10 से अधिक मुख्य मार्गों पर दिन भर बना रहता है 'पशुराज'
-25 से अधिक आवारा पशुओं से चोटिल होने के मामले आ चुके हैं सामने
-35 वार्डों में सफाई व्यवस्था पर निगरानी रखने के लिए लगाए गए हैं अधिकारी
-3 महीने तक जैसलमेर में बना हुआ है पर्यटन सीजन का असर
-5 मुख्य स्थानों पर पशुराज ने बढ़ा दी है राहगीरों की परेशानी
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