
रासला में होटल का सामान और दो झोंपड़े जले
जैसलमेर. जिले के फतेहगढ़ उपखंड क्षेत्र के रासला गांव स्थित मुख्य चौराहा पर स्थित एक होटल और पास बने दो झोपड़ों में आग लगने से काफी सामान जल कर खराब हो गया। बताया जाता है कि पटाखे की चिनगारी से आग लगी। आग से होटल का फर्नीचर समेत अन्य सामान और झोपडी में रखा घरेलू सामान जल गया। सूचना मिलने पर जैसलमेर से रासला पहुंची दमकल की गाड़ी ने आग को बुझाया लेकिन तब तक करीब एक लाख रुपए का सामान का नुकसान हो गया। घटना शनिवार दोपहर बाद की है। बताया जाता है कि गांव के मुख्य चौराहा पर चाय, नाश्ता व किराना की दुकानों के आगे किसी ने पटाखा फोड़ा। पटाखे की वजह से होटल के बाहर लगे लकड़ी के छप्पर ने आग पकड़ ली। आग अचानक इतनी तेजी सी बढ़ी कि उसने पास ही में बने दो झोपड़ो को भी अपनी चपेट में ले लिया। आसपास उपस्थित ग्रामीणों ने अपने स्तर पर आग बुझाने के प्रयास किए तथा फायर ब्रिगेड को सूचना दी। जैसलमेर से आई दमकल ने आधे घंटे में आग पर काबू पाया। देवीकोट चौकी पुलिस मौके पर पहुंची। जानकारी के अनुसार गणपतराम की होटल में आग की वजह से कुर्सी टेबल, रेफ्रीजरेटर व पानी की मोटर जल गए। पास ही में फतन खान के झोपड़ों में आग से चारपाई, बिस्तर व अन्य घरेलू सामान जल गया।
हाइटेंशन लाइनों ने छुड़ाया कृषि कार्य, किसान परेशान
लाठी. क्षेत्र के सांवता गांव के कुछ खेतों के ऊपर से गुजर रही हाइटेंशन विद्युत तारों के कारण किसान खेती छोडऩे को मजबूर हो रहे है। ढीले तारों के कारण ऊंचाई मात्र 10 से 12 फीट रह गई है। जिसके कारण हर समय हादसे की आशंका बनी रहती है। सांवता के भोमसिंह सहित किसानों ने बताया कि करीब 6 वर्ष पूर्व निजी कंपनी की ओर से क्षेत्र में हाइटेंशन विद्युत तारेंं लगाई गई थी। इस दौरान किसानों ने विरोध किया था, लेकिन कंपनी की ओर से पोल व तारेंं लगा दी गई। सांवता गांव के खसरा संख्या 434 में हाइटेंशन विद्युत तारें ढीली हो गई है। यहां दो विद्युत पोलों के बीच दूरी अधिक होने के कारण ढीली तारें मात्र 10 से 12 फीट तक रह गई है। करीब 5 वर्ष पूर्व बारिश के मौसम में पेड़ के नीचे बैठी 2 बकरियों की करंट से मौत हो गई। इसके बाद से ही किसान भयभीत है और यहां खेती छोड़ दी है। तारों की बजाय अन्य जगह खेती कर रहे है। उन्होंने बताया कि दो विद्युत पोलों के बीच 600 फीट की दूरी है। जबकि नियमानुसार 300 फीट होनी चाहिए। ऐसे में विद्युत तारें ढीली होकर नीचे झूल रही है। जिसके कारण यहां हर समय हादसे की आशंका बनी रहती है। किसानों ने बताया कि इस संबंध में कई बार जिम्मेदारों को अवगत भी करवाया गया, लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जिससे यहां कभी किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता।
Published on:
22 Oct 2022 08:13 pm
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