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60 दिन की नहरबंदी में पहले 30 दिन पीने के लिए मिलेगा पानी

इंदिरा गांधी नहर परियोजना के रखरखाव और जरूरी मरम्मत कार्य के लिए अलग-अलग स्थानों पर नहरबंदी की जा रही है।

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इंदिरा गांधी नहर परियोजना के रखरखाव और जरूरी मरम्मत कार्य के लिए अलग-अलग स्थानों पर नहरबंदी की जा रही है। इसके तहत नहर के अंतिम छोर पर आए जैसलमेर जिले में आगामी 26 मार्च से 27 मई तक नहरबंदी प्रभावी रहेगी। जिसमें पहले 30 दिन यानी 26 अप्रेल तक नहर में केवल पीने के लिए पानी उपलब्ध रहेगा और उसके बाद की अवधि में वह भी नहीं दिया जाएगा वहीं नहरी किसानों को सिंचाई के लिए पानी नहीं मिलने वाला है। जानकारी के अनुसार नहरबंदी के शुरुआती 30 दिनों में 2000 क्यूसेक पानी छोड़ा जाएगा। इसके बाद 27 अप्रेल से 27 मई तक नहर में पूरी तरह से पानी की आवक बंद कर दी जाएगी।

जलापूर्ति व्यवस्था की चुनौती

नहरबंदी के मद्देनजर जलदाय विभाग की ओर से समय रहते सारे इंतजाम किए जाने की दरकार है और पूर्ण नहरबंदी के समय लाखों लोगों तक पीने का पानी सुचारू रूप से पहुंचाना बड़ी चुनौती होगी। जैसलमेर के मोहनगढ़ में बाड़मेर लिफ्ट परियोजना के तहत जैसलमेर व बाड़मेर शहरों के साथ करीब 400 गांवों व सैन्य बलों को पीने का पानी मुहैया करवाया जाता है। विभाग को समय पर पूरी डिग्गी को भर कर रखना होगा ताकि भीषण गर्मी में लोगों तक पीने का पानी पहुंच सके।

हर साल होती है नहरबंदी

गर्मी के मौसम में इंदिरा गांधी नहर के आवश्यक मरम्मत व साफ-सफाई कार्य को लेकर नहरबंदी की जाती है। पंजाब सरकार की अनुमति के बाद ही नहरबंदी शुरू होती है। नहरबंदी में पेयजल की समस्या खड़ी नहीं हो इसके लिए जलदाय विभाग की ओर से पहले ही पानी का भंडारण करने की कवायद की जाती है। नहरबंदी की अवधि में जैसलमेर के साथ पड़ोसी बाड़मेर और जोधपुर, बीकानेर, हनुमानगढ़ व श्रीगंगानगर जिलों की पेयजल व्यवस्था को सुचारू रखना जिम्मेदारों के लिए चुनौतीपूर्ण होता है।