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रात को जब शहर सोता है तो यह रोता है

-पुराने ग्रामीण बस स्टैण्ड पर सुरक्षा के लिहाज से पुख्ता प्रबंध करने की दरकार, पूर्व में चोरी की वारदातें घटित होने के बावजूद नहीं लिया सबक

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shantiprakash gour

Aug 10, 2016

Jsm Not Allrt

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जैसलमेर. रात होते ही यहां अंधेरा पसर जाता है, चहुुं ओर पशुराज, यहां आने पर न कोई टोकने वाला और न ही कोई रोकने वाला..। सुरक्षा व्यवस्था राम भरोसे। यह सूरते हाल है जैसलमेर के पुराने ग्रामीण बस स्टैण्ड का..। विगत दिनों में यहां घटित चोरी की वारदातों के बाद भी सबक नहीं लिया गया है। ऐसे में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर यहां सुरक्षा के चाक चौबंद करने की जरूरत जोर पकड़ रही है। स्वर्णनगरी के अमरसागर प्रोल के समीप महाराणा प्रताप मैदान के पीछे स्थित यह बस स्टैण्ड ग्रामीण लोगों की ओर से खरीददारी के लिए पसंदीदा स्थान है। यही नहीं रिटेल से लेकर हॉलसेल तक की दुकानें यहां मौजूद है। इसी क्षेत्र में होलसेल बाजार बनाने की कवायद भी चल रही है। सैकड़ों लोगों की आवाजाही वाले इस क्षेत्र में अभी तक रात्रिकालीन प्रकाश की माकूल व्यवस्था नहीं की गई है। यहां सुरक्षा व्यवस्था का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि आए दिन यहां चोरी की वारदातें घटित हो रही है। ऐसे में यहां सुरक्षा के लिहाज से लापरवाही महंगी पडऩे की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। शहर के महत्वपूर्ण मार्गों में से एक इस मार्ग पर सीसीटीवी कैमरे भी नहीं लगे हैं। ऐसे में यहां संदिग्धों या समाजकंटकों पर निगरानी रखने के लिए कोई प्रबंध देखने को नहीं मिल रहे। दिन भर सैकड़ों लोगों की चहल-पहल से गुलजार रहने वाले इस क्षेत्र में रात होते ही सन्नाटा छा जाता है। अंधेरा पसरने व पशुओं के स्वच्छंद के बाद यहां शुरू हो जाता है अज्ञात भय का दौर। सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण इस पुराने ग्रामीण बस स्टैण्ड के पास ही दूरदर्शन केन्द्र, हनुमान चौराहा, प्र्रताप मैदान, गीता आश्रम जैसे महत्वपूर्ण स्थान है। इससे सटे मोहल्लों में बड़ी संख्या में परिवार रहते हैं। ऐसे में यहां सुरक्षा के लिहाज से माकूल प्रबंध करने की दरकार है।

फैक्ट फाइल

-40 के करीब दुकानें इस क्षेत्र में हो रही है संचालित

-2 दर्जन के करीब ठेलों का भी यहां रहता है ठहराव

-8 सौ के करीब लोगों की हर दिन यहां रहती है आवाजाही

-1 दर्जन के करीब यहां हो चुकी है अब तक चोरी की घटनाएं

-20 बड़े गोदाम बनाए गए हैं होलसेल बाजार के लिए

-6 वर्ष डेडानसर में स्थानांतरित हुए था ग्रामीण बस स्टैण्ड