9 दिसंबर 2025,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

जैसलमेर: भीषण गर्मी में बिजली ने छोड़ा साथ, अंधेरे में डूबी स्वर्णनगरी

तपती धूप और चढ़ते पारे के बीच स्वर्णनगरी इन दिनों बिजली संकट से जूझ रही है। शहर में लगातार हो रहे विद्युत व्यवधान और वोल्टेज की समस्या ने जन-जीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है।

2 min read
Google source verification

तपती धूप और चढ़ते पारे के बीच स्वर्णनगरी इन दिनों बिजली संकट से जूझ रही है। शहर में लगातार हो रहे विद्युत व्यवधान और वोल्टेज की समस्या ने जन-जीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। गर्मी के मौसम में जहां हर घर में कूलर-पंखों की जरूरत बढ़ जाती है, वहीं बिजली की आंखमिचौली ने लोगों की नींद और चैन दोनों छीन लिए हैं। शहर के कई इलाकों में दिन में कई घंटों तक बिजली गुल हो रही है। रात को भी विद्युत कटौती आम हो गई है। इससे न केवल घरेलू जन-जीवन प्रभावित हो रहा है, बल्कि व्यापारिक गतिविधियां भी बाधित हो रही हैं। बच्चों व बुजुर्गों का स्वास्थ्य और छोटे व्यवसाय सब पर असर पड़ा है।

समाधान दूर, आम जन में रोष

स्थानीय लोगों का कहना है कि विद्युत निगम को कई बार शिकायत दी गई, पर समाधान अब तक नहीं हुआ। अधिकारी एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं। शहरवासी पूछ रहे हैं कि जब हर साल यही हाल होता है तो समय रहते इंतजाम क्यों नहीं किए जाते? गौरतलब है कि जैसलमेर जैसे पर्यटन और सीमावर्ती जिले में इस तरह की बिजली व्यवस्था न केवल आमजन के लिए परेशानी है, बल्कि जिले की छवि पर भी सवाल खड़े करती है। लोगों ने मांग की है कि गर्मी के इस दौर में बिजली आपूर्ति को प्राथमिकता दी जाए और स्थायी समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं।

दिन में चैन नहीं, रात को नींद नहीं

दिनभर बिजली गुल रहती है। बच्चे गर्मी में रोते रहते हैं। पंखे नहीं चलते, खाना नहीं बनता। रात को भी अंधेरे में नींद उड़ जाती है। गर्मी ने जीना दूभर कर दिया है।

- राधा देवी, गृहिणी

दुकान चलाना हो गया घाटे का सौदा

बार-बार बिजली जाने से ग्राहक रुकते ही नहीं। इन्वर्टर से सबकुछ नहीं चलता। गर्मी में दुकान पर बैठना भी मुश्किल है। रोजाना हजारों का नुकसान हो रहा है।
-इकबाल खान, दुकानदार

सामान फुंकने का डर बना रहता है

फ्रिज और कूलर बंद पड़े हैं। बिजली आती भी है तो वोल्टेज इतना कम कि कुछ चलता ही नहीं। डर लगता है कि कोई बड़ा सामान खराब न हो जाए।
-रेखा सोलंकी, गृहिणी