
जैसलमेर का विहंगम दृश्य।
जैसलमेर. थार मरुस्थल की गोद में बसे आज के जैसलमेर को देखकर सहसा विश्वास नहीं होता कि महज चार दशक पहले तक नगर रेत से अटा हुआ था। जहां आमजन को दैनिक जीवन की आधारभूत सुविधाएं तक सलीके से मुहैया नही थी। थोड़ी बहुत संख्या में विदेशी सैलानी यहां घूमने आते थे। देश के पर्यटनप्रिय लोगों को इस शहर की विशेषताओं के बारे में पता तक नहीं था। आज सितारा होटलों की पूरी शृंखला है। करीब 400 छोटी-बड़ी होटलें तथा हजारों की संख्या में सैलानियों की सुविधा के लिए वाहनों की उपलब्धता है। लंबी चौड़ी सडक़ें हैं और रोजमर्रा के जीवन की तमाम सुख सुविधाएं इफरात में मौजूद हैं। आज यह शहर ट्रेन के माध्यम से राज्य राजधानी जयपुर, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से लेकर आर्थिक राजधानी मुम्बई, काठगोदाम तक सीधे तौर पर जुड़ गया है। करीब 100 करोड़ रुपए की लागत से तैयार किया गया सिविल एयरपोर्ट भी बन चुका है और पर्यटन सीजन के करीब सात महीनों में जैसलमेर नियमित हवाई सेवा से भी जुड़ रहा है।
- जैसलमेर में पर्यटन व्यवसाय का विस्तार 1980 के दशक में प्रारंभ हुआ। स्थानीय टूरिस्ट बंगला’ जो राजस्थान पर्यटन विकास निगम की ओर स्थापित किया गया, आज मूमल होटल कहलाता है।
- इसके बाद जैसलमेर में जैसे पर्यटन विकास का तूफान आ गया। 1982 में यहां महज 10 होटल थे जो 1986 में बढ़ कर 29, 1989 में 35, 1993 में 68, 1995 में 83, 1999 में 94, 2001 में 121 और आज यह तादाद 400 के पार जा चुकी है।
- जैसे होटलें बढ़ी, उसी अनुपात में रेस्टोरेंट्स, ट्रेवल एजेंसियां और अन्य व्यापारिक प्रतिष्ठान भी बढ़े। और तो और अकेले सम क्षेत्र में करीब 200 रिसोट्र्स संचालित हो रहे हैं।
- प्रतिवर्ष करीब 15 लाख सैलानी जैसलमेर का दीदार करने पहुंच रहे हैं। सैलानियों के लिए कई हैण्डीक्राफ्टऔर पुराने सामान की दुकानें खुलने से करीब 50 हजार लोगों को सीधे तौर पर रोजगार मिला है। गांवों में सम और खुहड़ी के रेत के टीलों का सैलानियों के सैर-सपाटे का प्रमुख स्थल बना दिया है। ऊंटों के उपयोग से कैमल सफारी चलन में आई।
स्वर्णमयी आभा के कारण जैसलमेर के पीले पत्थर की चमक अब विदेशों तक जा पहुंची है। देश के विभिन्न स्थानों पर यह पत्थर काम में लिया जा रहा है वहीं चीन, कनाडा, दोहा, कतर, बांग्लादेश, स्पेन, आस्ट्रेलिया, यूके और संयुक्त अरब अमीरात सहित अरब देशों में भी जैसलमेरी पत्थर भवन निर्माणों में पसंद किया जा रहा है। सोनार दुर्ग की सुनहरी आभा और पीले पत्थरों पर की गई बारीक नक्काशी के कार्य को देखने के लिए सात समन्दर पार से हजारों सैलानी प्रति वर्ष यहां पहुंचते हैं, वहीं अब तो यह शहर देशी सैलानियों के लिए भी प्रमुख पर्यटन स्थल बन गया है।
साल 2001 से जैसलमेर में पवन ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना की जो शुरुआत हुई, वह बढ़ते-बढ़ते 4000 तक पहुंच गई है। विगत वर्षों में जिले भर में सौर ऊर्जा उत्पादन और आने वाले समय में सीमेंट उद्योगों का आगाज, सीमांत जिले को औद्योगिक क्षेत्र में बदलने के लिए तैयार है।
Updated on:
23 Aug 2026 08:59 pm
Published on:
23 Aug 2026 08:59 pm
