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Jaisalmer: रील शूट करने से पहले सुरक्षा का फ्रेम तय करना सबसे जरूरी कदम

रील्स और शॉर्ट वीडियो के बढ़ते चलन में बेहतर लोकेशन और रोमांचक बैकग्राउंड की चाह युवाओं को जोखिम भरी जगहों तक ले जा रही है। नहर, तालाब, बांध और रेलवे ट्रैक जैसी जगहें कैमरे के लिए आकर्षक दिखती हैं, लेकिन यहां जरा सी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।
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जैसलमेर. रील्स और शॉर्ट वीडियो के दौर में बेहतर लोकेशन, अलग एंगल और रोमांचक बैकग्राउंड हासिल करने की कोशिश कई बार युवाओं को जोखिम वाली जगहों तक ले जा रही है। नहर, तालाब, बांध, ऊंची इमारत, रेलवे ट्रैक या सुनसान इलाका रील के लिए आकर्षक लोकेशन दिखाई दे सकता है, लेकिन कैमरा ऑन करने से पहले सुरक्षा का फ्रेम तय करना सबसे जरूरी हो जाता है। हाल में नहर में रील बनाने उतरे दो युवकों की डूबने से हुई मौत की घटना सोशल मीडिया कंटेंट के पीछे बढ़ते जोखिम की गंभीर तस्वीर सामने रखती है। कुछ सेकंड की वीडियो के लिए पानी में उतरना, तेज बहाव के करीब जाना या ऐसी जगह खड़ा होना जहां वापसी मुश्किल हो, मनोरंजन को सीधे खतरे में बदल सकता है।

बेहतर एंगल के पीछे बढ़ता जोखिम

रील में अलग और आकर्षक दृश्य दिखाने की कोशिश युवाओं को सामान्य सुरक्षित स्थान से बाहर ले जाती है। पानी के किनारे खड़े होकर शूट करने से लेकर नहर के भीतर उतरने तक जोखिम धीरे-धीरे बढ़ता है। कई बार मोबाइल कैमरे का फोकस सिर्फ फ्रेम पर रहता है और आसपास की परिस्थितियां नजरअंदाज हो जाती हैं।

खतरे वाले फ्रेम

-तेज बहाव या गहरे पानी के किनारे शूटिंग

-फिसलन वाले पत्थरों और ढलान पर खड़ा होना

-रेलवे ट्रैक या सड़क के बीच शूट करना -ऊंची इमारतों की छत या किनारे जाना -सुनसान और अपरिचित स्थान पर अकेले शूट करना

कैमरा ऑन करने से पहले लोकेशन चेक जरूरी

रील शूट करने से पहले सबसे पहला सवाल यह होना चाहिए कि जिस जगह को कैमरे में दिखाया जा रहा है, वह कितनी सुरक्षित है? पानी की गहराई, बहाव, फिसलन, मौसम, आसपास की भीड़ और आपात स्थिति में बाहर निकलने का रास्ता पहले देखना जरूरी है। किसी स्थान पर चेतावनी बोर्ड लगा है या प्रवेश प्रतिबंधित है, तो वहां बेहतर शॉट के लिए नियम तोडऩा जोखिम बढ़ाता है। सोशल मीडिया पर वीडियो कुछ सेकंड का होता है, लेकिन हादसे का असर जीवनभर रह सकता है।

व्यूज की संख्या सुरक्षा से बड़ी नहीं

रील का वायरल होना या ज्यादा लाइक्स मिलना उपलब्धि जैसा लग सकता है, लेकिन इसके लिए जोखिम वाली गतिविधि को सामान्य बनाना खतरनाक है। खासकर पानी से जुड़े स्थानों पर दृश्य परिस्थितियां तेजी से बदल सकती हैं। सुरक्षित दूरी से शूट किया गया सामान्य वीडियो भी प्रभावी हो सकता है।

साथी मौजूद है तो जिम्मेदारी भी तय हो

अकेले शूट करने की तुलना में किसी साथी के साथ शूटिंग करना अपेक्षाकृत बेहतर हो सकता है, लेकिन साथी की मौजूदगी सुरक्षा की गारंटी नहीं है। जोखिम वाली जगह पर दूसरा व्यक्ति भी दुर्घटना की स्थिति में मदद करने में असमर्थ हो सकता है। इसलिए जरूरी है कि पहले लोकेशन देखें, फिर जोखिम पहचानें।

पहले सुरक्षित दूरी तय करें, फिर करें कैमरा ऑन

रील का उद्देश्य कुछ सेकंड का आकर्षक कंटेंट तैयार करना है, जिंदगी को जोखिम में डालना नहीं। बेहतर एंगल के लिए सुरक्षा सीमा पार करना किसी भी वीडियो को यादगार नहीं बनाता, बल्कि उसे हादसे की वजह बना सकता है। रील शूट करते समय कैमरे के फ्रेम से पहले सुरक्षा का फ्रेम तय होना चाहिए। शूटिंग स्थल पर प्रवेश, पानी की स्थिति, फिसलन, ऊंचाई और निकासी का रास्ता देखकर ही कैमरा चलाना चाहिए।

-अमित चौधरी, सुरक्षा विशेषज्ञ