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जैसलमेर. नगर निकाय चुनाव को लेकर इस बार चुनावी प्रचार का एक नया मैदान मोबाइल स्क्रीन पर भी तैयार हो रहा है। उम्मीदवार वार्ड की सड़क, पानी, सफाई, नाली, स्ट्रीट लाइट और पार्क जैसे स्थानीय मुद्दों को एआइ से तैयार पेज, रील्स और शॉर्ट वीडियो में बदलकर मतदाताओं तक पहुंचा रहे हैं। कुछ सेकंड की वीडियो अब उम्मीदवार की पहचान, मुद्दे और राजनीतिक संदेश तीनों को एक साथ सामने रख रही है। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि उम्मीदवार अब सोशल मीडिया पर केवल अपनी तस्वीर या चुनाव चिह्न नहीं दिखा रहे। वे अपना नैरेटिव खुद तैयार कर रहे हैं। एआइ से तैयार पेज पर किस समस्या को मुद्दा बनाना है और किस स्थान पर वीडियो शूट करना है, किस मतदाता की प्रतिक्रिया लेनी है और किस स्थानीय डिजिटल पेज से संदेश आगे बढ़ाना है, यह सब चुनावी रणनीति का हिस्सा बन रहा है।
नगर निकाय चुनाव का डिजिटल कंटेंट हाइपर-लोकल होता जा रहा है। जिस सड़क पर रोजाना लोग परेशान होते हैं, उसी सड़क का वीडियो चुनावी मुद्दा बन रहा है। जिस मोहल्ले में पानी की समस्या है, वहां का दृश्य सीधे मोबाइल स्क्रीन पर पहुंच रहा है। डिजिटल प्रचार का नया फॉर्मूला कुछ ऐसा दिखाई दे रहा है— समस्या दिखाओ, जनता की आवाज लो, समाधान बताओ और अगली प्रगति दिखाओ। इससे उम्मीदवार का सोशल मीडिया अकाउंट वार्ड की गतिविधियों का डिजिटल रिकॉर्ड भी बन रहा है।
नगर निकाय चुनाव में स्थानीय सोशल मीडिया पेजों की भूमिका तेजी से बढ़ रही है। बड़े राजनीतिक अकाउंट की तुलना में लोकल पेज वार्ड और शहर के मुद्दों पर ज्यादा केंद्रित रहते हैं। किसी सड़क, सफाई, पानी या यातायात से जुड़ी पोस्ट स्थानीय स्तर पर तेजी से चर्चा में आ रही है। युवा मतदाता डिजिटल रणनीति के केंद्र में युवा मतदाताओं तक पहुंचने में रील्स और शॉर्ट वीडियो तेजी से उपयोगी माध्यम बन रहे हैं। लंबे भाषण के बजाय छोटी, स्पष्ट और स्थानीय वीडियो ज्यादा आसानी से देखी और साझा की जा रही हैं। उम्मीदवारों की डिजिटल ब्रांडिंग में अब कुछ नए पैमाने दिखाई दे रहे हैं— कितने स्थानीय लोगों तक वीडियो पहुंची, कितने लोगों ने प्रतिक्रिया दी, कितनों ने वीडियो साझा की? किस मुद्दे पर सबसे ज्यादा चर्चा हुई, वीडियो के बाद उम्मीदवार की सार्वजनिक गतिविधि कितनी बढ़ी... यानी लाइक और व्यू से आगे बढ़कर लोकल एंगेजमेंट डिजिटल प्रचार का महत्वपूर्ण पैमाना बन रहा है।
राजनीतिक सोशल मीडिया कंटेंट में केवल उम्मीदवार का चेहरा दिखाने के साथ-साथ वास्तविक समस्या का विजुअल प्रभाव पैदा करने का प्रयास किया जा रहा है। टूटी सड़क, जलभराव, बंद स्ट्रीट लाइट या कचरे के ढेर का वास्तविक दृश्य मतदाता को समस्या से सीधे जोड़ता है। इसके बाद उम्मीदवार का कैमरे पर आकर समाधान बताना वीडियो को राजनीतिक संदेश में बदल देता है।
1. चेहरा: उम्मीदवार कितना सक्रिय और संवादशील दिखाई देता है।
2. मुद्दा: वह वार्ड की वास्तविक समस्याओं पर कितना बोलता है।
3. प्रमाण: उसके दावों और किए गए काम का जमीन पर कितना आधार है।
स्थानीय चुनाव में डिजिटल कंटेंट तभी प्रभावी होता है, जब वह मतदाता की रोजमर्रा की समस्या से जुड़ा हो। सामान्य प्रचार वीडियो की तुलना में प्रमाण सहित स्थानीय मुद्दे पर एआइ से बना पेज और छोटी वीडियो ज्यादा विश्वसनीयता पैदा करती है।
-डॉ. अरविंद मेहता, डिजिटल कम्युनिकेशन विशेषज्ञ
चुनाव के समय अचानक सोशल मीडिया पर सक्रिय होना पर्याप्त नहीं है। मतदाता लगातार एक जैसी डिजिटल मौजूदगी, स्पष्ट भाषा और वास्तविक स्थानीय मुद्दों पर संवाद को ज्यादा गंभीरता से लेता है। नगर निकाय चुनाव में उम्मीदवार की पहुंच अब दो स्तरों पर दिखाई दे रही है— जमीन पर जनसंपर्क और मोबाइल पर डिजिटल संपर्क।
- ललित थानवी, सोशल मीडिया विश्लेषक
Updated on:
22 Aug 2026 08:28 pm
Published on:
22 Aug 2026 08:28 pm
