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Jaisalmer patrika Campaign- उपेक्षा के चलते खंडहर में तब्दील हो रहे ऐतिहासिक व धामिक स्थल

परमाणु नगरी बने पर्यटन नगरी-8धर्मकुण्डा पर ध्यान दें तो बढ़ेगा पर्यटन महत्व
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जैसलमेर

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Jitendra Kumar Changani

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Updated: 21 Dec 2017, 2:08 PM IST

Jaisalmer patrika

patrika news

पोकरण . परमाणु नगरी में पर्यटन व धार्मिक महत्व रखने वाला ऐतिहासिक धर्मकुण्डा उपेक्षा के चलते बदहाल है। दूसरी ओर धर्मकुण्डा के पास निर्मित कलात्मक प्राचीन बारादरी भी देखरेख व सरकारी सहायता के अभाव में जमींदोज होने लगी है। वर्षों पूर्व निर्मित इस लाल पत्थर की कलात्मक बारादरी की पुन: मरम्मत व रख रखाव नहीं होने से गिरने की कगार पर है। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए पुरातात्विक स्थल को प्रशासन की पहल पर पर्यटन विभाग, नगरपालिका अथवा पुरातत्व विभाग की ओर से संरक्षित व विकसित किया जाता है, तो यहां देसी-विदेशी पर्यटकों का आवागमन बढ़ सकता है। दूसरी तरफ समय रहते इसकी मरम्मत नहीं हुई, तो इसका अस्तित्व ही खत्म हो जाएगा।
भामाशाह ने करवाया था निर्माण
धर्मकुण्डा शिव मंदिर का ऐतिहासिक महत्व है। इसके चलते लोगों का जुड़ाव है। गौरतलब है कि बांदोलाई तालाब के पास एक बरसाती नाले के ऊपर करीब 200 वर्ष पूर्व माहेश्वरी समाज के एक भामाशाह ने कुण्ड व शिव का मंदिर बनवाया था। बारिश के दौरान यह कुण्ड पानी से लबालब हो जाता था। इसका भगवान शिव के जलाभिषेक के लिए उपयोग होता था। इस कुण्ड के ऊपर शिव मंदिर के कारण ही इसका नाम धर्मकुण्डा शिव मंदिर रखा गया। मंदिर के पास विश्राम गृह व कलात्मक बारादरी का भी निर्माण करवाया गया। इसके चलते इस स्थान का धार्मिक व ऐतिहासिक महत्व है।

IMAGE CREDIT: patrika

लोगों ने श्रमदान कर किया सुधार
इस स्थल के सुधार के नाम पर कोई कार्य नहीं हो रहा है। हालांकि कुछ धर्म प्रेमियों व समाजसेवी लोगों ने डेढ़ दशक पूर्व जीर्णोद्धार का कार्य शुरू किया तथा पेड़-पौधे लगा छोटी-छोटी वाटिकाएं विकसित की। इसका कार्य आज भी जारी है तथा मंदिर व आसपास का क्षेत्र धीरे धीरे विकसित होने लगा है। इसके अलावा कई बार राष्ट्रीय सेवा योजना एनएसएस के शिविर लगाकर भी यहां साफ-सफाई का कार्य किया गया है। जबकि कलात्मक बारादरी की मरम्मत, जीर्णोद्धार व विकास को लेकर यहां प्रशासनिक स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।
धर्मकुण्डा के सौंदर्यीकरण व विकास को लेकर सरकारी प्रयास हो तो यह पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो सकता है। इससे यहां धर्म प्रेमियों व पर्यटकों की चहल-पहल बढ़ेगी तथा कस्बे के लोगों को निकट पिकनिक स्थल उपलब्ध हो सकेगा।