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जेडीए की प्रवर्तन शाखा शहर में अवैध निर्माण पर अपनी मर्जी के अनुसार कार्रवाई कर रही है। स्थिति यह है कि एक जैसे अपराध के लिए सजा अलग-अलग दी जा रही है। कहीं अवैध विला ध्वस्त किए जा रहे हैं तो कहीं सील कर ही छोड़ दिया जा रहा है। शनिवार को जेडीए ने वाटिका रोड पर श्याम वाटिका में सात विला ध्वस्त कर दिए। हालांकि, इससे पहले जेडीए की प्रवर्तन शाखा ने एक मई को धारा 32, 33 जेडीए एक्ट ने नोटिस जारी कर अवैध निर्माण हटाने के लिए कहा था। अवैध निर्माण आगे न हो, इसके लिए गार्ड भी तैनात कर दिया था।
सीएम ने भी उठाया था सवाल
23 फरवरी, 2020: राजस्थान अवासन मंडल के कार्यक्रम में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा था कि यदि आवासन मंडल को शक्तियां दे दीं तो जेडीए की तरह भ्रष्ट हो जाएगा। उन्होंने यहां तक कहा था कि जेडीए में अच्छा अधिकारी लगना नहीं चाहता। दो इमारतें हैं, एक को तंग करेंगे और एक को छूट देंगे।
नोटिस देकर किया सील
05 मई: जोन-13 के ग्राम आकेड़ा, लक्ष्मीनारायणपुरा में आठ अवैध विला सील किए। जबकि, प्रवर्तन शाखा ने खुद माना है कि इनमें फिनिशिंग का काम चल रहा था। 13 अप्रेल को धारा 32, 33 जेडीए एक्ट के तहत नोटिस भी जारी कर अवैध निर्माण हटाने को कहा था। इन विला के प्रवेश द्वारों और सीढ़ियों पर ईंटों की दीवार लगाकर सील कर दिया।
12 अप्रेल: जोन-10 के इकोलॉजिकल जोन में 17 विला सील किए। आगरा रोड स्थित राजेंद्र नगर योजना में इनका निर्माण हो रहा था। इससे पहले 23 मार्च को एक्ट 32 के तहत नोटिस जारी किया गया था। इसमें निर्माणकर्ता ने नोटिस का जवाब तक नहीं दिया था और न ही निर्माण संबंधी कोई दस्तावेज प्रस्तुत किए।
वाटिका रोड पर जो कार्रवाई हुई है, वहां अवैध कॉलोनी में बिल्डर विला बना रहा था। इनको बेचने के लिए बनाया जा रहा था। पहले जिनको सील किया है, उनमें नियमन की संभावना रही होगी। नियमन नहीं होगा तो उनको भी ध्वस्त किया जाएगा। कुछ के मामले कोर्ट में विचाराधीन हैं। —रघुवीर सैनी, मुख्य नियंत्रक, प्रवर्तन शाखा
Published on:
29 May 2022 07:02 pm
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