
RAVINDRA SINGH BHATI CHOTU SINGH RAWNA
राजस्थान के सबसे चर्चित सियासी विवादों में से एक 'भाटी-रावणा प्रकरण' में एक बड़ा अपडेट सामने आया है। प्रसिद्ध भजन गायक छोटू सिंह रावणा ने शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी सहित 5 अन्य लोगों के खिलाफ नामजद मामला दर्ज करवाया है। पुलिस ने मामले की गंभीरता और विधायक के शामिल होने के कारण इसकी जांच CID-CB को सौंप दी है।
वायरल हुई शिकायत के अनुसार, छोटू सिंह ने बताया कि विवाद की शुरुआत एक 'कैंसर पीड़ित बच्चे' के वीडियो पर किए गए उनके कमेंट से हुई थी। छोटू सिंह ने लिखा था— "काश बेटा आप रील स्टार होते तो सारे नेता आपके पास होते।" गायक का आरोप है कि इसी कमेंट से नाराज होकर विधायक ने उन्हें फोन किया।
एफआईआर में छोटू सिंह ने दावा किया है कि 27 मार्च 2026 की रात करीब 11 बजे, जब वे भोपाल में एक कार्यक्रम में थे, तब उनके पास विधायक रविंद्र सिंह भाटी का फोन आया। आरोप है कि विधायक ने उन्हें धमकाते हुए कहा— "तुझे दो बार पहले छोड़ दिया था, लेकिन इस बार तू नहीं बचेगा।" इस कॉल के बाद से ही गायक और उनका परिवार गहरे खौफ में है।
शिकायत के मुताबिक, धमकियों का सिलसिला यहीं नहीं रुका।
चूंकि मामला एक मौजूदा विधायक से जुड़ा है, इसलिए राजस्थान पुलिस ने इसकी जांच CID-CB (अपराध शाखा) को ट्रांसफर कर दी है। इलाके में बढ़ते तनाव और दो समाजों के बीच की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन पूरी सतर्कता बरत रहा है। छोटू सिंह के समर्थकों ने इस मामले की निष्पक्षता के लिए उच्च स्तरीय CBI जांच की मांग की थी।
एक छोटे से कमेंट से शुरू हुआ यह विवाद अब राजस्थान की अस्मिता और कानून व्यवस्था का मुद्दा बन गया है। छोटू सिंह ने अपनी शिकायत में BNS की धारा 351(3), 351(4) और IT एक्ट का हवाला देते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की है। वहीं, विधायक समर्थकों का कहना है कि यह केवल राजनीतिक रूप से बदनाम करने की साजिश है।
भारतीय न्याय संहिता (BNS), जिसने भारतीय दंड संहिता (IPC) की जगह ली है, उसमें धारा 351 'आपराधिक धमकी' (Criminal Intimidation) से संबंधित है। गायक छोटू सिंह रावणा द्वारा विधायक रविंद्र सिंह भाटी के खिलाफ दर्ज करवाई गई FIR में इन धाराओं का उल्लेख विशेष महत्व रखता है।
यहाँ इन धाराओं और IT एक्ट का विस्तृत कानूनी विश्लेषण दिया गया है:
BNS की धारा 351 के तहत 'आपराधिक धमकी' को परिभाषित किया गया है। जब कोई व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति के शरीर, प्रतिष्ठा या संपत्ति को क्षति पहुँचाने की धमकी देता है ताकि वह व्यक्ति भयभीत हो जाए, तो इसे आपराधिक धमकी माना जाता है।
धारा 351(3): यदि धमकी मृत्यु कारित करने (जान से मारने) की हो या घोर उपहति (Grievous Hurt) पहुँचाने की हो, तो यह उप-धारा लागू होती है। सजा: इसमें 7 वर्ष तक का कारावास या जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं।
धारा 351(4): यह धारा 'अनाम संसूचना' (Anonymous Communication) से संबंधित है। यदि धमकी देने वाला व्यक्ति अपनी पहचान छिपाकर या किसी ऐसे माध्यम से धमकी देता है जिससे उसकी पहचान तुरंत न हो सके (जैसे अज्ञात नंबर या फर्जी प्रोफाइल), तो यह धारा लगती है।- सजा: इसमें धारा 351(3) के तहत मिलने वाली सजा के अतिरिक्त 2 वर्ष तक की और सजा का प्रावधान है।
चूंकि यह विवाद सोशल मीडिया कमेंट और व्हाट्सएप (WhatsApp) कॉल/मैसेज के माध्यम से शुरू हुआ, इसलिए इसमें IT एक्ट की धाराएं जोड़ी गई हैं:
धारा 66C (पहचान की चोरी): यदि किसी दूसरे के इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर या पहचान चिन्ह का गलत इस्तेमाल हुआ हो।
धारा 66D (कंप्यूटर संसाधन का उपयोग कर धोखाधड़ी): यदि प्रतिरूपण (किसी और के नाम से) द्वारा संवाद किया गया हो।
धारा 67: यदि सोशल मीडिया पर कोई ऐसी सामग्री पोस्ट की गई हो जो अपमानजनक या अश्लील हो और जिससे सार्वजनिक शांति भंग होने का खतरा हो।
छोटू सिंह रावणा की FIR के अनुसार, ये धाराएं निम्नलिखित आधारों पर लगाई गई हैं:
जान का खतरा: छोटू सिंह का आरोप है कि उन्हें "जान से मारने की धमकी" दी गई, जो 351(3) के तहत गंभीर अपराध है।
पहचान छिपाना: शिकायत में विदेशी नंबरों (+351...) का जिक्र है, जो 351(4) के तहत 'अनाम धमकी' की श्रेणी में आता है।
डिजिटल साक्ष्य: चूंकि धमकियां कॉल और मैसेज के रूप में हैं, इसलिए IT Act के तहत डिजिटल साक्ष्यों (Screenshots and Call Logs) की तकनीकी जांच की जाएगी।
Published on:
03 Apr 2026 10:11 am
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