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जयपुरः बचेंगे आशियाने या फिर चलेगा बुलडोजर, सांगानेर की 87 कॉलोनियों को लेकर हाईकोर्ट ने सरकार को दिया ये आदेश

Jaipur Sanganer Encroachment News: इस बहुचर्चित मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य सरकार को अहम निर्देश दिए हैं।

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Bulldozer action

Bulldozer action प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source - Patrika)

Jaipur News: राजस्थान की राजधानी जयपुर के सांगानेर इलाके में राजस्थान आवासन मंडल (RHB) की कीमती जमीन पर बसी 87 कॉलोनियों के अतिक्रमण का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बहुचर्चित मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य सरकार को अहम निर्देश दिए हैं। अदालत ने विवाद के अंतिम निपटारे के लिए पूरे इलाके का गूगल मैप (Google Map) पेश करने को कहा है।

क्या है पूरा मामला?

यह पूरा विवाद सांगानेर इलाके में आवासन मंडल की करीब 5037 बीघा अधिग्रहित भूमि से जुड़ा है। राज्य सरकार ने हाईकोर्ट को सूचित किया है कि इस कुल जमीन में से लगभग 4 हजार बीघा जमीन का उपयोग मंडल द्वारा पहले ही किया जा चुका है। महत्वपूर्ण बात यह है कि इस जमीन पर वर्तमान में नागरिक सुविधाएं और बसावट पूरी तरह विकसित हो चुकी है।

हाईकोर्ट में सरकार का आश्वासन

मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को भरोसा दिलाया है कि जो जमीन वर्तमान में खाली बची है, वहां 'यथास्थिति' (Status Quo) बरकरार रखी जाएगी। यानी खाली जमीन पर फिलहाल कोई नया निर्माण या बदलाव नहीं किया जाएगा। जस्टिस पीएस भाटी की खंडपीठ ने इस आश्वासन को रिकॉर्ड पर लेते हुए आगे की कार्यवाही के निर्देश दिए।

गूगल मैप से होगा विवाद का अंत

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस विवाद को हमेशा के लिए सुलझाने के लिए सटीक भौगोलिक स्थिति का पता होना जरूरी है। इसी उद्देश्य से अदालत ने राज्य सरकार और अन्य संबंधित पक्षकारों को निर्देश दिया है कि वे सांगानेर के इस पूरे प्रभावित इलाके का लेटेस्ट गूगल मैप मुहैया कराएं। इस मैप के जरिए यह स्पष्ट हो सकेगा कि कितनी जमीन पर निर्माण हो चुका है और कितनी वास्तव में खाली है।

PIL पर आया कोर्ट का आदेश

आपको बता दें कि यह आदेश 'पब्लिक अगेंस्ट करप्शन' की ओर से दायर एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई के दौरान दिया गया है। याचिका में सरकारी जमीन पर अवैध तरीके से बसाई गई कॉलोनियों और उनमें हुए अतिक्रमण को चुनौती दी गई थी। अब गूगल मैप आने के बाद कोर्ट इस पर अपना अंतिम फैसला सुना सकता है, जिससे हजारों लोगों के आशियाने और सरकारी जमीन के भविष्य का फैसला होगा।

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