
जिम्मेदार कब लेंगे सुध... जर्जर भवन हो रहे खंडहर
सरकार की ओर से आवश्यकता के समय सरकारी भवनों का निर्माण तो कर दिया जाता है, लेकिन काम पूरा होने के बाद इन भवनों की सुध नहीं ली जाती। जिसके कारण सरकार की ओर से खर्च की गई लाखों रुपए की धनराशि का कोई उपयोग नहीं हो जाता है। गांव में एक दर्जन से अधिक ऐसे सरकारी भवन है, जिनका वर्षों से उपयोग नहीं हुआ। भवन खंडहर होने के कगार पर पहुंच गए है। जबकि जिम्मेदार केवल मूकदर्शक बने हुए है। गांव में लंबे समय से ऐसे कई सरकारी भवन जिम्मेदारों की उपेक्षा का दंश झेल रहे है। लाखों रुपए की धनराशि खर्च कर सरकारी भवनों का निर्माण तो करवाया गया, लेकिन अब न तो समय पर सार- संभाल की जा रही है, न ही इनकी मरम्मत कर उपयोग लायक बनाया जा रहा है। ऐसे भवन जर्जर होकर खंडहर में तब्दील होते जा रहे है। यदि इनकी मरम्मत की जाती है तो कई मौकों पर इनका उपयोग भी किया जा सकता है।
ये भवन हो रहे खंडहर
गांव में पोकरण रोड पर यात्रिका भवन का निर्माण वर्षों पूर्व करवाया गया था। लाखों रुपए की धनराशि खर्च कर बनाए गए इस यात्रिका भवन का वर्षों से उपयोग नहीं हुआ है। हालांकि कुछ वर्ष पूर्व बाबा रामदेव के ***** मेले यहां सुरक्षाकर्मियों को ठहराया गया, लेकिन इसके बाद भवन की उपेक्षा इस कदर हुई कि दरवाजे व खिड़कियां अज्ञात लोग उठाकर ले गए। भवन की दीवारों में दरारें आ गई और भवन पूरी तरह से जर्जर हो गया। इसी प्रकार आरसीपी रोड पर राजकीय प्राथमिक विद्यालय को राउमावि में मर्ज कर दिए जाने से यह भवन भी लावारिस पड़ा है। एक कक्ष की छत भी गिर चुकी है। जिसका मलबा भी विद्यालय में ही पड़ा है। गांव के राजकीय आयुर्वेद आवासीय भवन का भी 3 दशक से कोई उपयोग नहीं हुआ है। गांव में नाचना चौराहे के पास सार्वजनिक निर्माण विभाग का गैंगहट भवन तो उपेक्षा ही सारे हदें पार कर चुका है। यहां जमा कीचड़, गंदगी व लगी झाडिय़ां ही स्थिति बयां कर रही है कि इसका उपयोग वर्षों से नहीं हुआ। इन सभी भवनों की समय पर देखभाल नहीं की जाती है तो इनके खंडहर होने का खतरा बना हुआ है। साथ ही भवनों के गिरने से किसी बड़े हादसे से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
मेले के दौरान हो सकता है उपयोग
गांव में प्रतिवर्ष बाबा रामदेव का ***** मेला आयोजित होता है। इस दौरान लाखों श्रद्धालु यहां पहुंचते है। जिनके लिए प्रशासनिक इंतजामों व व्यवस्थाओं को लेकर अधिकारियों व कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाती है तो सुरक्षा के लिए भी दो हजार से अधिक पुलिस, आरएसी, होमगार्ड के जवान तैनात किए जाते है। प्रतिवर्ष मेले के दौरान उन्हें ठहराने के लिए अलग-अलग व्यवस्था करनी पड़ती है। रामदेवरा सहित आसपास गांवों के विद्यालयों की छुट्टी कर पुलिसकर्मी ठहराए जाते है। यदि गांव में स्थित इन एक दर्जन भवनों की मरम्मत कर उपयोगलायक बनाया जाता है तो आवास की व्यवस्था हो सकती है। इसी प्रकार यात्रिका भवन को मिड-वे के रूप में तैयार किया जाता है तो यहां आने वाले वीआइपी अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों के रुकने की व्यवस्था की जा सकती है।
यहां गोदाम हो रहे जर्जर
नाचना. गांव में आरसीपी कॉलोनी में करीब 3 दशक पूर्व निर्माण करवाए गए बड़े गोदाम क्षतिग्रस्त होकर जर्जर होते जा रहे है। जानकारी के अनुसार करीब 30 वर्ष पूर्व इंदिरा गांधी नहर निर्माण के दौरान सीमेंट व अन्य निर्माण सामग्री को रखने के लिए गांव की आरसीपी कॉलोनी में 10-12 गोदामों का निर्माण करवाया गया था। निर्माण के बाद एक बार भी इनकी मरम्मत नहीं की गई। यही नहीं नहर निर्माण के बाद इनका उपयोग तक नहीं हुआ। ऐसे में लाखों रुपए की धनराशि खर्च कर निर्माण करवाए गए ये गोदाम उपेक्षा पर आंसू बहा रहे है। गोदामों की छत पर लगाए गए टिनशेड टूट चुके है और दीवारें क्षतिग्रस्त हो गई है। गोदामों के चारों तरफ झाडिय़ां लग गई है। जबकि इनकी मरम्मत व देखभाल को लेकर जिम्मेदारों की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। जिसके कारण गोदामों के खंडहर होकर ध्वस्त होने का खतरा बढ़ता जा रहा है। यदि जिम्मेदारों की ओर से इनकी मरम्मत की जाती है तो इनका उपयोग भी किया जा सकता है।
Published on:
10 Dec 2023 12:03 pm
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