
सीमांत जैसलमेर जिले में प्रशासनिक अधिकारियों के बीच का विवाद अब मुख्यमंत्री की चौखट पर पहुंच गया है। गत 7 मई को पोकरण के तत्कालीन एसडीएम और आरएएस प्रभजोत सिंह गिल की ओर से जैसलमेर कलक्टर प्रताप सिंह के खिलाफ कार्मिक विभाग को शिकायती पत्र भेजा था। उसके बाद सरकार ने उनका नागौर जिले में स्थानांतरण कर दिया। दो दिन पहले गिल का वह पत्र वायरल हो गया। अब इस मामले में आरएएस अधिकारियों के संगठन राजस्थान प्रशासनिक सेवा परिषद की एंट्री हो गई है। परिषद ने इस मामले में मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन भेजकर जिला कलक्टर के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है। गौरतलब है कि आरएएस प्रभजोतसिंह गिल पोकरण में उपखंड अधिकारी के पद पर कार्यरत थे। जिनका गत दिनों नागौर के मूंडवा उपखंड अधिकारी पद पर स्थानांतरण हो गया। स्थानांतरण के बाद मंगलवार की शाम उनकी ओर से एक पोस्ट सोशल मीडिया पर की गई। इस पोस्ट में उनकी ओर से बिना नाम लिए कई अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों पर भ्रष्टाचार व दबाव बनाने जैसे आरोप लगाए गए। इस पोस्ट को एक घंटे बाद डिलीट कर दिया गया, लेकिन स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर वायरल हो गए। बुधवार रात आरएएस गिल की ओर से कार्मिक विभाग के प्रमुख शासन सचिव को लिखा गया एक पत्र वायरल होने लगा। हालांकि यह पूरा पत्र नहीं है, इसमें से एक-दो पन्ने गायब है, लेकिन जो पत्र के टुकड़े वायरल हो रहे हैं, उनमें कलक्टर पर आरोप लगाए गए हैं। जिसके चलते चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है।
परिषद की ओर से मुख्यमंत्री को भेजा गया एक पत्र गुरुवार रात सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा। इस पत्र में आरएएस गिल के साथ जैसलमेर कलक्टर की ओर से अभद्रता करने का आरोप लगाया गया। साथ ही कई मामलों में दबाव बनाने की बात कही गई। इस पत्र में कलक्टर की ओर से जिले में कार्यरत एक अन्य आरएएस मुकेश कुमार मीना द्वितीय के साथ भी अभद्र व्यवहार करने का आरोप लगाया गया। परिषद ने कलक्टर को पद से हटाने के साथ अनुशासनात्मक कार्यवाही करने की मांग की गई अन्यथा सभी आरएएस अधिकारी हड़ताल पर जाने के लिए विवश हो जाएंगे।
Published on:
16 May 2025 09:30 pm
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