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JAISALMER NEWS- जंगल में सक्रिय हुआ यह जानवर, दुलर्भ वन्यजीवों को दे रहा मौत!

पानी की तलाश में आ रहे वन्यजीवों को बना रहा शिकार

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जैसलमेर. भीषण गर्मी का दौर शुरू होते ही जंगल के पेयजल स्थलों पर घात लगाकर एक खतरनाक जानवर प्यासे वन्यजीवों को मौत के घाट उतार रहा है। इस जानवर ने रविवार को एक साथ नौ दुर्लभ चिंकारा को मौत की नींद सुला दिया है। मामला तब सामने आया, जब ग्रामीण यहां पहुंचे और हरिणों के शव तालाब और आस-पास बिखरे हुए थे। गर्मी में तालाब पर प्यास बुझाने आने वाले वन्यजीवों के लिए शिकारी बने श्वान मौत का कारण बन रहे है, लेकिन जिम्मेदार गर्मी में गश्त करने की बजाए शीतल स्थलों पर चैन की नींद सो रहे है, जिससे वन्यजीवों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है।

एक साथ नौ हरिणों को उतारा मौत के घाट, एक हरिण हुआ घायल
लाठी क्षेत्र के खेतोलाई गांव में रविवार को सुबह श्वान हरिणों के लिए काल साबित हुए तथा उन्होंने हमला कर एक साथ नौ श्वानों को मौत के घाट उतार दिया, जबकि एक हरिण गंभीर रूप से घायल हो गया। खेतोलाई गांव के पास स्थित पानी के कुण्ड पर रविवार को सुबह हरिणों का झुण्ड पानी पीने के लिए आया था। इस दौरान यहां बैठे श्वानों ने उन पर हमला कर दिया। बुरी तरह से नोच व काट देने से नौ हरिणों की मौके पर ही मौत हो गई। जबकि एक हरिण गंभीर रूप से घायल हो गया। हरिणों के चिल्लाने की आवाज सुनकर वन्यजीवप्रेमी नींबाराम, जगदीश, जयनारायण, विकास जाणी, पंकज, राज जाजूदा तत्काल मौके पर पहुंचे तथा पत्थर मारकर श्वानों को भगाया एवं हरिणों को छुड़ाया। ग्रामीणों ने यहां पहुंचकर देखा, तो नौ हरिणों की मौत हो चुकी थी तथा एक हरिण गंभीर रूप से घायल तड़प रहा था। उन्होंने इसकी सूचना वन विभाग लाठी को दी। जिस पर लाठी वन विभाग के वनरक्षक हमीरसिंह, बच्चूखां, हनीफखां, अखिल भारतीय जीव रक्षा विश्रोई सभा के तहसील संयोजक राधेश्याम पेमाणी खेतोलाई पर पहुंचे तथा ग्रामीणों के सहयोग से शवों का अंतिम संस्कार करवाया। उन्होंने घायल हरिण का लाठी पशु चिकित्सालय में उपचार करवाकर अस्थायी रेस्क्यू सैंटर में भर्ती किया।

आए दिन होती है वन्यजीवों की मौत
लाठी, धोलिया, खेतोलाई, चांधन, ओढाणिया, चाचा आदि गांव वन्यजीव बाहुल्य क्षेत्र है। यहां बड़ी संख्या में गोडावण, बाज, हरिण, लोमड़ी सहित अन्य वन्यजीव जंतु रहते है। इसी के चलते क्षेत्र में बड़ी संख्या में आवारा श्वान भी विचरण करते है। ये श्वान इन वन्यजीवों पर हमला कर उन्हें अपना भोजन बना लेते है। कई बार समय पर उपचार नहीं मिलने की स्थिति में उनकी मौत भी हो जाती है।

वन्यजीवप्रेमियों में रोष
क्षेत्र के खेतोलाई, धोलिया, ओढाणिया, चाचा आदि विश्रोई व ब्राह्मण समाज बाहुल्य गांव है। यहां वन विभाग का लम्बा चौड़ा क्षेत्र भी है तथा किसी व्यक्ति के शिकार पर भी पूरी तरह से पाबंदी है। क्षेत्र में निवास कर रहे विश्रोई, पालीवाल ब्राह्मण व अन्य समाज के लोग वन्यजीवप्रेमी है। जिसके चलते यहां बड़ी संख्या में हरिण व अन्य जीव जंतु खुले विचरण करते देखे जा सकते है। वन्यजीवप्रेमियों की ओर से आए दिन हिंसक पशुओं, श्वानों के हमले अथवा किसी वाहन की चपेट में आने से घायल होने पर उन्हें उपचार के लिए लाठी या पोकरण लाया जाता है। रविवार को एक साथ आवारा श्वानों की ओर से नौ हरिणों को मौत के घाट उतार दिए जाने से वन्यजीवप्रेमियों में रोष व्याप्त है। उनका मानना है कि यदि वन विभाग की ओर से इनके बचाव के लिए कोई कार्रवाई नहीं की गई, तो धीरे-धीरे वन्यजीव क्षेत्र खत्म हो जाएगा।उन्होंने वन विभाग से आवारा श्वानों, हिंसक पशुओं से हरिणों व वन्यजीवों को बचाने की मांग की है।

IMAGE CREDIT: patrika

नहीं हो रही है कार्रवाई
लाठी, धोलिया, खेतोलाई के आसपास आए दिन किसी न किसी दुर्घटना के चलते वन्यजीवों व पक्षियों की मौत हो रही है, जो चिंता का विषय है। हरिण, बाज, गोडावण, गिद्ध जैसे दुर्लभ प्रजाति के पशु पक्षी गांव के आसपास स्थित पशुखेलियों में पानी पीने के लिए आते है। हरिण आदि पशुओं को हिंसक जानवर अपना शिकार बना लेते है, तो पक्षी विद्युत तारों में उलझकर अपनी जान गंवा बैठते है। वन विभाग से वन्यजीवों की रक्षा के लिए कई बार मांग भी की गई, लेकिन उनकी ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे है।
-राधेश्याम पेमाणी, तहसील संयोजक अखिल भारतीय जीवरक्षा विश्रोई सभा पोकरण, धोलिया।

घायल हरिण का किया गया उपचार
वन विभाग के कार्मिक एक घायल हरिण को लेकर आए थे। जिसे श्वानों ने जगह-जगह से काट दिया था। जिसका उपचार कर वन विभाग को सुपुर्द किया गया।
-डॉ.रामजीलाल किरोड़ीवाल, चिकित्साधिकारी पशु चिकित्सालय, लाठी।

की जा रही है गश्त
जिस वन्यजीव स्थल पर श्वानों की संख्या अधिक है, यहां कर्मचारियों की ओर से गश्त कर श्वानों को भगाया जा रहा है। श्वानों के बढे आतंक को लेकर उन्हें हटाने के लिए ग्राम पंचायत को लिखा जाएगा।
-प्रकाशसिंह जुगतावत, क्षेत्रीय वन अधिकारी वन विभाग, लाठी।