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गिद्धों की आवक को माना जा रहा शुभ संकेत
पोकरण. धरती के लुप्तप्राय पक्षियों में शामिल हो रहे गिद्धों की लाठी क्षेत्र में उड़ान का नजारा देखा जा रहा है। इस प्रजाति के पक्षी अब बहुत कम देखे जाते हैं, ऐसे में यदि कहीं गिद्ध एक साथ झुण्ड के रूप में देखने को मिलते है, तो यह वन्यजीव प्रेमियों व वन विभाग के लिए सुकून की बात है। इन दिनों लाठी गांव के पास वन्यक्षेत्र में बड़ी संख्या में गिद्ध अपना डेरा डाले हुए हैं। गौरतलब है कि खुले जंगलों में अक्सर झुण्ड के रूप में गिद्ध नजर आते है। पश्चिमी राजस्थान में वर्षों पूर्व गिद्धों की बहुतायत थी, लेकिन इन्हें पर्याप्त भोजन नहीं मिलने के कारण गिद्धों ने यहां से प्रस्थान कर दिया। वन विभाग के जानकार बताते है कि गिद्धों के झुण्ड जैसलमेर में नहीं मिलते थे, लेकिन इन दिनों लाठी वन्यक्षेत्र में गिद्धों की आवक से शुभ संकेत दिख रहे हैं।
यहां बड़ी संख्या में देखे गए हैं गिद्ध
क्षेत्र के ओढ़ाणिया, लाठी, खेतोलाई, धोलिया, चांधन के आसपास गांवों में इन दिनों गिद्धों की संख्या बढ रही है। पूर्व में पोकरण सैटेलाइट क्षेत्र रामदेवरा, चांधन, रासला, फलसूण्ड, भणियाणा क्षेत्र में गिद्धों को देखा जा सकता था। लाठी में इन दिनों गिद्धों की आवक बढी है। एक अनुमान के अनुसार यहां 200 से अधिक गिद्ध है।
मृत पशु खाकर गिद्ध करते है सफाई
गिद्ध पक्षियों में एक बड़ा पक्षी होता है। जिसका औसतन वजन 20 से 30 किलो तक होता है। जिसके कारण इसकी उडऩे की क्षमता कम होती है, लेकिन इसकी आंखों की रोशनी इतनी तेज होती है कि दूर से ही उसे मृत पशु का शव दिखाई दे जाता है। जिससे वह तत्काल वहां पहुंच जाता है। गिद्ध किसी जीवित जीव जंतु को नुकसान नहीं पहुंचाते, बल्कि इनका मुख्य भोजन मृत पशु होता है। गौरतलब है कि ओढाणिया, लाठी, खेतोलाई, धोलिया, चांधन क्षेत्र के सबसे बड़े पशु बाहुल्य क्षेत्र है। इन गांवों में प्रतिदिन दर्जनों पशुओं की मौत होती है। जिसे जंगल में लाकर डाला जाता है। ऐसे में यहां निवास कर रहे गिद्धों को यहां पर्याप्त भोजन मिल जाता है। जंगलों में मृत पशुओं के शरीर पड़े रहते है। जिससे दुर्गंध फैलती है। ये गिद्ध उन्हें खाकर जंगलों की सफाई का कार्य भी करते हैं।
रेल पटरी के कारण हो रहे है काल के ग्रास
जोधपुर से जैसलमेर जाने वाले रेलवे लाइन इन गिद्धों के लिए मौत का कारण बन रही है। गत दो माह में दर्जनों गिद्धों की मौत रेल की चपेट में आने से हो चुकी है। गौरतलब है कि रेलवे लाइन ओढ़ाणिया, लाठी व चांधन गांवों से होकर गुजरती है। ये गांव पशु बाहुल्य होने के कारण यहां के पशु चरने के लिए रेलवे लाइन के इस पार से उस पार आवागमन करते हैं। कई बार गाय, बैल, ऊंट व अन्य पशुओं की रेल की चपेट में आने से मौत हो जाती है तथा उनके शव पटरियों पर ही कई दिनों तक पड़े रहते हैं। जिसे खाने के लिए गिद्ध यहां आते है। रेल के यहां से गुजरने के दौरान पशुओं के शवों पर बैठे गिद्ध जैसे ही उडऩे का प्रयास करते हैं, वे रेल की चपेट में आ जाते हैं।
मिले दो गिद्धों के शव
रेलवे पटरियों पर लाठी-ओढाणिया रेलवे स्टेशन के बीच धोलिया गांव के पास शुक्रवार को रेल की चपेट में आने से दो गिद्धों की मौत हो गई। गिद्धों के शव रेलवे पटरियों के किनारे पड़े होने की जानकारी मिलने पर अखिल भारतीय जीव रक्षा विश्रोई सभा के तहसील संयोजक राधेश्याम व वन्यप्रेमियों ने लाठी वन विभाग को सूचना दी। जिस पर वन विभाग के कानसिंह व वन्यजीवप्रेमी मौके पर पहुंचे। यहां मृत गिद्धों के शवों को अपने कब्जे में लिया। लाठी पशु चिकित्साधिकारी डॉ.रामजीलाल ने गिद्धों का पोस्टमार्टम कर वन विभाग को सुपुर्द किया। वन विभाग की ओर से गिद्धों को दफनाया गया।
Published on:
03 Feb 2018 10:20 pm
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