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मरुस्थल में ‘वज्रघात’, दिखाई दी भारतीय सेना के तोपों की ताकत

जैसलमेर जिले की पोकरण फायरिंग रेंज में सेना की सदर्न कमांड के तत्वावधान में व्हाइट टाइगर डिविजन ने एक्सरसाइज वज्रघात के अंतर्गत सेना की तोप शक्ति का प्रदर्शन किया। तोपों की गर्जना और गोलों के विस्फोट से धोरां धरती गूंज उठी।

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जैसलमेर जिले की पोकरण फायरिंग रेंज में सेना की सदर्न कमांड के तत्वावधान में व्हाइट टाइगर डिविजन ने एक्सरसाइज वज्रघात के अंतर्गत सेना की तोप शक्ति का प्रदर्शन किया। तोपों की गर्जना और गोलों के विस्फोट से धोरां धरती गूंज उठी। इस प्रदर्शन के माध्यम से सेना ने रेगिस्तानी भूभाग में युद्धक क्षमता को परखा। इसमें सेना की आधुनिक तोपखाना क्षमता और तकनीकी दक्षता का मिश्रण देखने को मिला।

अभ्यास का मुख्य उद्देश्य रेगिस्तानी क्षेत्र में युद्ध संचालन की रणनीतियों को और अधिक मजबूत बनाना था। इस अभ्यास ने के-9 तोप प्रणाली की विनाशकारी युद्ध क्षमता को एक बार फिर प्रमाणित किया। सेना के अनुसार इसमें हर हाल में उभरने के लिए परिष्कृत टैक्टिक्स, टेक्रीक्स और प्रोसीजर्स पर केंद्रित इस अभ्यास में तोपखाने के इस प्लेटफार्म की गति, सटीकता और मारक क्षमता को प्रौद्योगिकी आधारित लक्ष्य की पहचा और संलग्रता प्रणालियों के साथ प्रभावी रूप से एकीकृत किया गया।

उड़ते रहे धूल के गुबार

अभ्यास के दौरान वास्तविक युद्धकालीन परिस्थितियों का निर्माण कर तोपों की ओर से सघन प्रहार किया गया। जिसमें तोपों के मुंह आग उगलते नजर आए और टैंकों की आवाजाही से चारों तरफ धूल का गुबार छा गया। इसका एक उद्देश्य सैनिकों को वास्तविक युद्ध परिस्थितियों का अनुभव दिलाना भी रहा। अभ्यास के जरिए सैनिकों को चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में तेजी से निर्णय लेने और दुश्मन के ठिकानों को सटीक निशाना बनाने का प्रशिक्षण दिया गया।