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केंद्रीय कृषि मंत्री ने किया वर्चुअल संवाद, केवीके जैसलमेर सहित देशभर के केंद्रों से वर्चुअल संवाद

इस दौरान कृषि विज्ञान केंद्र जैसलमेर के वरिष्ठ वैज्ञानिक और प्रमुख डॉ. दीपक चतुर्वेदी भी कार्यक्रम में जुड़े।

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जैसलमेर कृषि के अग्रणी कार्यक्रमों की समीक्षा और उन्हें और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को देशभर के कृषि विज्ञान केंद्रों और आइसीएआर- अटारी के वैज्ञानिकों और अधिकारियों के साथ वर्चुअल संवाद किया। इस दौरान कृषि विज्ञान केंद्र जैसलमेर के वरिष्ठ वैज्ञानिक और प्रमुख डॉ. दीपक चतुर्वेदी भी कार्यक्रम में जुड़े।चर्चा के दौरान केंद्रीय मंत्री ने कहा कि विकसित भारत की कल्पना विकसित खेती और समृद्ध किसान के बिना संभव नहीं है। इस दिशा में कृषि विज्ञान केंद्रों की भूमिका सबसे अहम है। उन्होंने प्रत्येक केवीके से अपने जिले की विशिष्ट फसल को चिन्हित कर उसके उत्पादन को बढ़ावा देने, प्रगतिशील किसानों के साथ मिलकर एक हेक्टेयर का मॉडल फार्म विकसित करने और मृदा परीक्षण कार्ड के जरिये किसानों को जागरूक करने जैसे कार्यों को प्राथमिकता देने का आह्वान किया।मंत्री चौहान ने तिलहन और दलहन फसलों के क्षेत्र और उत्पादन को बढ़ाने पर विशेष जोर देते हुए किसानों तक अच्छे बीज की उपलब्धता और जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए। साथ ही प्राकृतिक खेती के वैज्ञानिक परीक्षण कर किसानों के बीच इसे बढ़ावा देने पर भी बल दिया। उन्होंने 'पर ड्रॉप मोर क्रॉप' के सिद्धांत पर जल संरक्षण की दिशा में ठोस कार्य करने को कहा।केंद्रीय मंत्री ने आगामी खरीफ सीजन से पहले कृषि विज्ञान केंद्रों को 15 दिवसीय विशेष अभियान चलाकर किसानों के बीच फसल पूर्व प्रबंधन, बीज उपलब्धता और तकनीकी मार्गदर्शन पहुँचाने के निर्देश भी दिए। वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. दीपक चतुर्वेदी ने जानकारी दी कि केंद्रीय मंत्री के निर्देशों के अनुरूप जैसलमेर जिले के विभिन्न गांवों में वैज्ञानिकों की टीमें किसानों तक पहुंचेंगी। आगामी खरीफ के मद्देनजर फसल प्रबंधन, उन्नत बीजों की उपलब्धता, उत्पादन लागत घटाने और वैज्ञानिक कृषि तकनीकों के प्रचार-प्रसार पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। जिले की प्रमुख फसलों—जीरा, चना, मोठ, इसबगोल और बाजरे—पर किसानों का क्षमता वर्धन कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के प्रयास किए जाएंगे।