पोकरण. स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय बीकानेर से सम्बद्ध कृषि विज्ञान केंद्र पोकरण की ओर से वैज्ञानिक विधि से मधुमक्खी पालन एवं रोजगार सर्जन विषय पर तीन दिवसीय वर्चुअल प्रशिक्षण शिविर शुक्रवार को शुरू किया गया।
पोकरण. स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय बीकानेर से सम्बद्ध कृषि विज्ञान केंद्र पोकरण की ओर से वैज्ञानिक विधि से मधुमक्खी पालन एवं रोजगार सर्जन विषय पर तीन दिवसीय वर्चुअल प्रशिक्षण शिविर शुक्रवार को शुरू किया गया। जिसका शुभारंभ अनुसंधान निदेशालय के निदेशक प्रकाशसिंह शेखावत ने किया। उन्होंने शुष्क एवं अतिशुष्क क्षेत्रों में मधुमक्खी पालन से आय एवं रोजगार सर्जन के अवसरों की संभावनाओं की जानकारी दी। केंद्र के कार्यकारी प्रभारी कृष्णगोपाल व्यास ने प्रशिक्षण से कौशल विकास एवं क्षमता संवर्धन के महत्व पर चर्चा करते हुए किसानों को इस प्रशिक्षण से जुड़कर अधिक से अधिक लाभ लेने की बात कही। शिविर के पहले दिन एनसीआई पीटीएम नई दिल्ली के पूर्व निदेशक डॉ.डीबी आहुजा ने किसानों को मधुमक्खी के इतिहास, वर्तमान में इसके स्कॉप एवं दैनिक जीवन में महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कोरोनाकाल में किसानों के समक्ष उभरे आर्थिक संकट में शहद उत्पादन आजीविका का एक अच्छा अवसर होने की बात कही। कृषि विश्वविधालय जोधपुर के सहायक प्रोफेसर नेमाराम रणवा ने किसानों को मधुमक्खियों के जीवनचक्र एवं इसके प्रकार पर चर्चा करते हुए बताया की मधुमक्खी पालन में जगह का चुनाव और बेहतर प्रबंधन कर अच्छा मुनाफा अर्जित किया जा सकता है। उद्यमी शुकदेवसिंह ने मधुमक्खी पालन में सैद्धांतिक प्रशिक्षण एवं अनुभव अर्जित करके एक सफल व्यवसाय स्थापित करने की बात कही तथा अपने उद्यम की बारीकियों से अवगत करवाया। तकनीकी सत्र के दौरान डॉ.जीएस चूड़ावत ने मधुमक्खी पालन में काम आने वाले नवीनतम यंत्रों के उपयोग एवं इनकी लागत के बारे में जानकारी दी। केंद्र के कृषि वैज्ञानिक डॉ.चारु शर्मा, डॉ.बबलू शर्मा, सुनील शर्मा एवं डॉ.रामनिवास ढाका ने किसानों को मधु उत्पादन एवं इसकी मार्केटिंग के बारे में बताया।