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Video: ब्रह्म मुहूर्त में गाय व बछड़ों का पूजन, परंपरागत रूप से मनाई बछ-बारस

जैसलमेर. जिले भर में मंगलवार को बछ बारस का पर्व परंपरागत रूप से मनाया गया। इस दौरान गाय व बछड़े को बाजरी के आटे के लड््डुओं का भोग लगाया। नव-विवाहित जोड़ों ने भी गाय व बछड़े का पूजन किया। घरों में बछ बारस की कथा पढ़ी व सुनी गई।

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Video: ब्रह्म मुहूर्त में गाय व बछड़ों का पूजन, परंपरागत रूप से मनाई बछ-बारस

Video: ब्रह्म मुहूर्त में गाय व बछड़ों का पूजन, परंपरागत रूप से मनाई बछ-बारस

जैसलमेर. जिले भर में मंगलवार को बछ बारस का पर्व परंपरागत रूप से मनाया गया। इस दौरान गाय व बछड़े को बाजरी के आटे के लड््डुओं का भोग लगाया। नव-विवाहित जोड़ों ने भी गाय व बछड़े का पूजन किया। घरों में बछ बारस की कथा पढ़ी व सुनी गई। महिलाओं ने जगह-जगह समूहों में बैठकर बछ बारस की कथा सुनी। इससे पूर्व सुबह जैसलमेर शहर सहित ग्रामीण क्षेत्रों के विभिन्न गली-मोहल्लों व विभिन्न मार्गों पर महिलाओं की रेलमपेल शुरू हो गई। महिलाएं पूजा की थाली सजाकर अपने घरों से निकल पड़ी और बाड़ों व गोशालाओं में जाकर गाय व बछड़े की पूजा-अर्चना की। महिलाओं ने ब्रह्मï मुहूर्त में बछड़े की पूजा-अर्चना की और अपनी संतान की सलामति की कामना की। बछ बारस के दिन पुत्र वाली माताओं ने पूजा-अर्चना कर अपने बेटों के अक्षत तिलक लगा कर नजर उतारी और प्रसाद खिला कर उनके दीर्घायु होने की कामना की। इस दिन घरों में बाजरी व ज्वार की रोटी, बकरी व भैंस का दूध और उनके दूध से निर्मित घी का ही प्रयोग किया गया। महिलाओं ने गेहूं से बनी खाद्य सामग्री और लोहे से कटी भोजन सामग्री का उपयोग नहीं किया। घरों में परिवार के सदस्यों ने बाजरी व ज्वार से बनी रोटी के साथ बैरवा व चावल का आहार किया। शाम को गायों के लौटने से पूर्व व सूर्यास्त से पहले महिलाओं ने भोजन किया।

बच्छ बारस का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया
पोकरण. कस्बे में मंगलवार को बच्छ बारस का पर्व परंपरागत रूप से मनाया गया। पुत्रवती महिलाओं ने गाय व बछड़े की पूजा-अर्चना की। कस्बे में सुबह से ही महिलाएं पूजा की थाली सजाकर अपने घरों से निकल पड़ी तथा गायों के बाड़ों व गौ-शालाओं में जाकर गाय व बछड़े की पूजा-अर्चना की। सुबह के समय बारिश का दौर चलने से कस्बे में गाय व बछड़े की पूजा का क्रम सुबह 10 बजे तक भी जारी रहा। गाय व बछड़े को बाजरी के आटे के लड्डु व गुड़ खिलाया। महिलाओं ने जगह-जगह समूहों में बैठकर बच्छ बारस की कथा का श्रवण किया व उनकी रक्षा का संकल्प लिया। महिलाओं ने दिनभर गाय के दूध, उससे निर्मित किसी भी तरह के खाद्य पदार्थ मिठाई व गेहूं के आटे से निर्मित रोटियों आदि का सेवन नहीं कर भैंस या बकरी के दूध तथा बाजरे की रोटी का भोग लगाकर उसका सेवन किया।