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पाँच नदियों के संगम के बावजूद सूखे से जूझ रहा है जालौन

बुंदेलखंड का पंजाब कहे जाने वाले जालौन में 5 नदियों का संगम है, लेकिन यहां की धरा पिछले 6 सालों से सूखे की मार झेल रही है।

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jalaun Rivers

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अनुज कौशिक.

जालौन. बुंदेलखंड का पंजाब कहे जाने वाले जालौन में 5 नदियों का संगम है, लेकिन यहां की धरा पिछले 6 सालों से सूखे की मार झेल रही है। कारण यह है कि यहाँ पर सिंचाई की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। जिस कारण किसानों को अच्छी पैदावार कराने वाली बुंदेलखण्ड की धारा पर हमेशा सूखे का संकट बना रहता है और हर साल यहां पर अकाल जैसे हालत हो जाते हैं।

उत्तर प्रदेश के 22 जिले बाढ़ की चपेट में थे, लेकिन बुंदेलखंड में हालात सूखे जैसे हो गये हैं क्योकि यहाँ पर औसत से बहुत कम बारिश हुई है। जिससे एक बार फिर किसानों को सूखे की मार झेलनी पड़ रही है। वैसा ही हाल जालौन का है।वैसे बुंदेलखंड के इस इलाके को पंजाब कहा जाता है, लेकिन इस पंजाब में भी सूखे की हालत बन गयी है क्योकि यहां पर कोई भी बुनियादी सुविधाएं नहीं है जिस कारण किसान समय पर अपनी खेती में सिचाई नहीं कर पाता है। इससे उसके खेत सूख जाते हैं और वह फसल की बुबाई तक नहीं कर पाता है।

बुंदेलखंड के जालौन को है वरदान फिर भी हालत बदतर-
वैसे बुंदेलखंड के जालौन को एक वरदान भी हासिल है। वह चारों तरफ से नदियों से घिरा हुआ है। जालौन एक तरफ से बेतवा तो दूसरी तरफ पहूज और तीसरी ओर यमुना से घिरा हुआ है। जालौन के माधौगढ़ तहसील इलाके में 5 नदियों का संगम होता है जो पचनद इलाका कहलाता है। जहां पर पहुज नदी के साथ मध्य प्रदेश के भिंड से बहकर आने वाली सिंध, कुवांरी और इटावा से बहकर आने वाली चंबल का संगम यमुना में होता है। इस क्षेत्र में पानी बहुत होने के बावजूद इस क्षेत्र में खेत खाली पड़े रहते हैं और यहाँ पर कोई भी किसान सिंचाई नहीं कर पाता है। जिसका मुख्य कारण है कि इस पानी को किसान अपने खेत पर नहीं ला पाते हैं। जिस कारण किसानों को अपनी जमीन यूं ही खाली छोड़ने पर विवश होना पड़ता है। यहाँ पर दूर-दूर तक ट्यूबवेल नजर नहीं आते है, जहां ट्यूववेल होते हैं, लेकिन बिजली की कोई व्यवस्था न होने के कारण किसानों को परेशान होना पड़ता है। यही हाल नहर विभाग का है। जहां समय पर नहरों में पानी नहीं छोड़ा जाता जिससे किसान समय-समय पर अपने खेतों को सिंचित नहीं कर पाते हैं।

संसाधन की कमी से बने ऐसे हालात-
जालौन के किसान वीर सिंह और अवधेश का कहना है कि पिछले 6-7 साल से यहां पर सूखा पड़ रहा है और इस बार भी यहाँ पर बारिश बहुत कम हुई है। यहाँ पर 5 नदियों के संगम होने के बावजूद यहाँ पर सूखे के हालात बने रहते हैं क्योकि सरकार द्वारा यहाँ पर किसी प्रकार की व्यवस्था नहीं कराई गई है। यहाँ संसाधनों की कमी है। यदि यही हाल रहा तो आगे चलकर यह भी पानी खत्म हो जायेगा।

सभी सरकारों ने किसानों को ठगा-
किसानों का कहना है कि यहाँ पर प्रत्येक सरकार ने उन्हें ठगा है क्योकि जो भी सरकार आई है उनके नुमाइंदों ने पचनदा पर बांध बनाने की बात कही है। किसानों का कहना है कई वर्षों से यह बात सुनने में आती है कि यहाँ पर बांध बनाया जायेगा लेकिन इसे अभी तक धरातल पर किसी भी सरकार ने नहीं उतारा है। किसानों का कहना है कि यहाँ पर बांध बनाने की बात इंद्रा गांधी के समय हुयी थी। जब 2003 में मुलायम सिंह मुख्यमंत्री बने तो उन्होने भी यहाँ पर डैम बनाने की बात कही थी। लेकिन यह बाते सिर्फ हवा-हवाई है। किसानों ने बताया कि यहाँ बांध बन जाता तो रोजगार के साथ बिजली भी मिलती।

भगवान भरोसे करते हैं खेती
जालौन के माधौगढ़ इलाके के किसान मुनीम तिवारी और किसान राम कुमार मिश्रा का कहना है कि वह अपनी फसल की पैदावार सिर्फ भगवान भरोसे ही करते हैं। अगर बारिश होती है तो उनकी पैदावार हो जाती है और बारिश नहीं होती है तो उनको अपने खेतों को खाली ही छोड़ना पड़ता है। किसानों का कहना है कि यदि यहाँ पर सरकार पचनद बांध बना देती तो उनको सिंचाई के साथ अन्य सुविधाएं मिल जाती। किसानों ने बताया कि केंद्र की भाजपा सरकार में मंत्री उमा भारती भी कई बार इस क्षेत्र का दौरा कर चुकी हैं, लेकिन उन्होंने कोई कदम नहीं उठाया है। जिस कारण यहाँ सिचाई का अभाव है।

पर्याप्त पानी होने के बावजूद असंचित रहती है जमीन
सूखे से जूझ रहे किसानों का कहना है कि बारिश न होने के कारण वह अपनी फसल वो नहीं पाये है इसीलिये उन्हें अपने खेत समतल करने पड़ रहे हैं। किसानों ने बताया कि पानी पर्याप्त है, लेकिन जमीन ऊपर और नदियों का पानी नीचे होने के कारण खेत सिंचित नहीं हो पाते हैं। किसानों ने बताया कि यहाँ पर नहरो का पानी मिल नहीं पाता है और बारिश की इस बार उन्हे कोई आशा नहीं दिखाई दे रही है। किसानों ने बताया यदि बांध बन जाये तो उनकी समस्या दूर हो जाएगी।

सरकार के समक्ष रखेंगे समस्या
पचनद बाध के बारे में जब माधौगढ़ के भाजपा विधायक मूलचन्द्र निरंजन से पूंछा तो उन्होंने बताया कि किसानों के लिये सिचाई की बढ़ी समस्या है इसीलिए वह अपने इलाके में पचनदा बाध को बनबाने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इसके लिये पूरे बुंदेलखंड के विधायक के साथ बैठक करके सरकार के समक्ष यह प्रस्ताव रखेंगे जिससे प्रयास किया जायेगा जिससे इस समस्या का हल हो सके।

सूखे की स्थिति के बारे में जालौन के अपर जिलाधिकारी राकेश कुमार सिंह से जानकारी ली तो उन्होंने बताया कि जनपद में अभी इस तरह की कोई स्थिति नहीं है पिछले कुछ दिन यहाँ पर अच्छी बारिश हो गई है। इससे पहले बारिश न होने से कुछ स्थिति जरूर बनी थी। फिलहाल उन्होंने सभी विभागों की बैठक बुलाई है और उसमें जो भी बात सामने आयेगी उस आधार पर शासन को रिपोर्ट भेजी जायेगी।

राजनीति के प्रपंच में समाप्त न हो जाये अस्तित्व

यमुना-वेतवा सहित 7 नदियों से घिरे बुंदेलखंड के हालत में बड़ा सुधार हो सकता है अगर केंद्र व राज्य सरकारें इसकी ओर ध्यान दे। नहीं तो वह दिन दूर नहीं जब सियासत करने बाली इन पार्टियों की आपसी दुश्मनी में बुंदेलखंड का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा और यहाँ के किसानों-गरीबों का अंत हो जायेगा।


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