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Phoolan Devi: 21 लोगों को एकसाथ मौत देने वाली दस्यु सुंदरी, जमीनी विवाद ने बनाया बैंडिट क्वीन

Phoolan Devi: मशहूर दस्यु सुंदरी और पूर्व सांसद फूलनदेवी का जन्मदिन है। फूलनदेवी का नाम सामने आते ही मन मस्तिष्क में उनकी छवि डाकू वाली बन जाती है, लेकिन क्या फूलनदेवी वास्तव में खूंखार थीं या फिर जुल्म के खिलाफ लड़ाई में उन्होंने हथियार उठाए। आइए आपको इस कहानी से रू-ब-रू कराते हैं...

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Phoolan Devi: UP के शेखपुर गुढ़ा गांव में पैदा हुई फूलन देवी ने कई यातनाए सहीं हैं। अपनी ज़मीन के लिए इन्होने तमाम लड़ाइयां लड़ी पर मरने के बाद भी सफलता हासिल नहीं कर पाई। 60 साल पहले आज के ही दिन फूलन देवी का जन्म हुआ था।
74 साल पुराना केस, SDM कोर्ट ने किया ख़ारिज
फूलन के पिता देवीदीन ने 1949 में कालपी SDM कोर्ट में एक मुकदमा दर्ज कराया था। मुकदमा एक ज़मीन के विवाद को लेकर था। फूलन देवी का सफर गांव की गलियों और जंगलों से शुरू होकर सत्ता के गलियारों तक पहुंचा लेकिन फिर भी फूलन अपने परिवार को जमीन का वह टुकड़ा नहीं दिला सकी। कुल 74 साल हो गए, पर ये जमीन फूलन को नहीं मिल सकी, और उनके मरने के बाद उनके बाद परिवार को भी वो ज़मीन नसीब नहीं हो पाई। कालपी SDM कोर्ट ने फूलन के परिवार का दावा भी खारिज कर दिया है।

ऐसे पनपा था ज़मीन का विवाद
फूलन देवी के चचेरे भाई मैयादीन से विवाद था जबकि मैयादीन नई नज़र फूलन के ज़मीन पर थी। मैयादीन की दबंगई के कारण ही फूलन के परिवार से वो ज़मीन चली गई। ऐसा कहा जाता है कि ये ज़मीन लगभग 20 एकड़ है। मैयादीन की दबंगई के कारण फूलन देवी का परिवार अपनी पैरवी भी नहीं कर पाता था।

UP सरकार में मंत्री डॉ. संजय निषाद ने एक बार कहा था कि फूलन की प्रॉपर्टी से कब्जा छुड़ाकर उनकी मां को दे देना चाहिए। संजय निषाद 2021 में चुनाव के वक्त फूलन के गांव शेखपुर गुढ़ा गए थे और तब भी उन्होंने यही बात दोहराई थी।

जमींदारी प्रथा बनी थी ज़मीन का विवाद
आजादी से पहले जमींदारी प्रथा थी और ज़मीनों के लिए कोई विशेष लिखापढ़ी नहीं होती थी। ज़मीन का बंटवारा मुंहजुबानी भी कर लिया जाता था इसी सिलसिले में फूलन के परदादा ने पंचों के सामने जमीन बंटवारा कर दिया था। फूलन देवी को दस्‍यु सुंदरी के तौर पर जाना गया, उन पर फिल्‍म भी बनीं, राजनीतिक दलों ने उनके नाम पर अपनी राजनीती की जमीन भी मजबूत की। इसके बाद भी फूलन के परिवार को जमीन नहीं मिल पाई जो पूरे विवाद का जड़ था।


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