
jalore
जालोर।जिले भर में राशन की दुकानों पर विक्रेताओं की ओर से बरती जाने वाली अनियमितता के बावजूद एक साधारण सी प्रक्रिया के बाद उनका लाइसेंस निलंबित कर फिर से बहाल कर दिया जाता है। लाइसेंस निलंबन के बाद कुछ राशन विक्रेता तो बेइमानी की आदत में सुधार कर लेते हैं, लेकिन कुछ की आदत में कोई सुधार तक नहीं होता है। ऐसे में परेशान ग्रामीण बार-बार विभागीय अधिकारियों को शिकायतें करते हैं। रसद विभाग की ओर से मिले आंकड़ों पर गौर करें तो बीते 2 साल में विभाग की ओर से की गई जांच में राशन विक्रेताओं के विरुद्ध 252 प्रकरण बनाए गए और इन मामलों में विभाग ने राशन विक्रेताओं से अनियमितताएं बरतने पर 4 लाख 4 हजार 243 रुपए का जुर्माना वसूला भी है। वहीं इन दो सालों में 21 राशन डीलरों के लाइसेंस निलंबित किए गए।
90 दिन बाद फिर बहाली
विभागीय जानकारी के अनुसार वर्ष 2014 में 12 व 2015 में 9 राशन विक्रेताओं के लाइसेंस विभाग की ओर से निलंबित किए गए। इनमें से अधिकतर राशन डीलर्स का लाइसेंस 90 दिन बाद फिर बहाल कर दिया गया। वहीं विभाग की ओर से वर्ष 2014 में 6 जनों व 2015 में 1 राशन डीलर का लाइसेंस निरस्त किया गया है।
यह है निलंबन की प्रक्रिया
उपभोक्ताओं से मिली शिकायत के आधार पर विभागीय अधिकारियों की ओर से जांच की जाती है। जांच सही पाई जाने पर सम्बंधित डीलर का लाइसेंस 90 दिन के लिए निलंबित कर दिया जाता है। इस अवधि में अगर दुकानदार स्पष्टीकरण पेश करता है और उसकी ओर से कोई गम्भीर लापरवाही या अनियमितता नहीं बरती गई है तो उसका लाइसेंस फिर से बहाल कर दिया जाता है। अन्यथा उसका लाइसेंस निरस्त कर दिया जाता है।
यहां-यहां निलंबित हुए लाइसेंस
वर्ष 2014 में : विभाग की ओर से 12 राशन विक्रेताओं सहकारी समिति बावतरा, गुन्दाऊ, सहकारी समिति सांचौर वार्ड नम्बर 8 , बाली, चौरा, भादरड़ा, डबाल, सहकारी समिति मेड़ा ऊपरला, सहकारी समिति उम्मेदाबाद, पिपरला की ढाणी, सेडिय़ा व सहकारी समिति कोड़ी के लाइसेंस निलंबित किए। खास बात तो यह है कि 12 में से 5 सहकारी समितियों के लाइसेंस निलंबित हुए हंै।
वर्ष 2015 में : विभाग ने 9 राशन विक्रेताओं भड़वल, जसवंतपुरा, निम्बलाना, भूतेल, सहकारी समिति माण्डवला, भाटीप, तीखी, अगड़ावा व लाखावास दुकान के लाइसेंस निलंबित किए हैं।
यहां निरस्त हुए लाइसेंस
वर्ष 2014 में विभाग ने 6 राशन विक्रेताओं मोदरान, चौरा, पुर, मैत्रीवाड़ा व धानसा, जबकि वर्ष 2015 में भाटीप का एक लाइसेंस निरस्त किया। इसमें खास बात तो यह है कि वर्ष 2014 में विभाग की ओर से चौरा व वर्ष 2015 में भाटीप स्थित राशन डीलर का लाइसेंस निलंबित कर 90 बाद बहाल किया था, लेकिन इन डीलर्स की ओर से फिर अनियमितता बरतने पर इनका लाइसेंस निरस्त कर दिया गया।
अब नहीं कर पाएंगे गड़बड़ी
रसद विभाग की ओर से जिले भर की राशन दुकानों पर पोस (प्वाइंट ऑन सेल) मशीनों का वितरण शुरू हो चुका है। अप्रैल महीने से राशन उपभोक्ता को बायोमैट्रिक सत्यापन के बाद ही राशन सामग्री मिल सकेगी। इससे उनके अलावा अन्य कोई भी सामग्री नहीं ले सकेगा। पूर्व में राशन डीलर फर्जी तरीके से राशन सामग्री का वितरण करना दर्शा देते थे, लेकिन मशीन लगने के बाद यह फर्जीवाड़ा नहीं हो सकेगा।
लाइसेंस बहाली का प्रावधान है...
उपभोक्ताओं की शिकायत के बाद विभाग की ओर से उन मामलों की जांच की जाती है। जांच सही पाई जाने पर सम्बंधित राशन विक्रेता का लाइसेंस निलंबित किया जाता है। इसके बाद उससे स्पष्टीकरण मांगा जाता है। तीन माह के भीतर वह स्पष्टीकरण पेश करता है तो नियमानुसार जुर्माना लगाकर उसका लाइसेंस फिर से बहाल कर
दिया जाता है।- धर्मपाल शर्मा जिला रसद अधिकारी, जालोर
धर्मेन्द्र रामावत
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