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चारे की तलाश में परिवार सहित इधर से उधर भटक रहा पशुपालक

जालोर से लेकर जोधपुर तक दर दर भटक रहे पशुपालक

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चारे की तलाश में परिवार सहित इधर से उधर भटक रहा पशुपालक

नारणावास. जिले भर में इन दिनों चारे के संकट के चलते पशुपालकों की हालत दिनों दिन खराब हो रही है। चारे के अभाव में पशुपालक गोवंश को लेकर जालोर से लेकर जोधपुर के बिलाड़ा तक भटक रहे हैं। फिर भी उन्हें चारा हाथ नहीं लग पा रहा है। ऐसे में इन दिनों जहां गोवंश की हालत चारे-पानी की समस्या के चलते खराब हो रही है, वहीं बकरी या गायों का पालन करने वाले देवासी समाज के लोगों के बच्चों की पढ़ाई भी इस वजह से छूट रही है। देवासी समाज के परिवारों ने बताया कि जब-जब चारे की समस्या पैदा हुई, तब-तब उन्हें गांवों से मजबूरीवश पलायन करना पड़ता है। ऐसे में उनके बच्चों को पढ़ाई छुड़ा कर मजबूरी में साथ ले जाना पड़ता है। उस दौरान बच्चों की पढ़ाई का क्रम भी टूट जाता है। जालोर जिले के बिबलसर निवासी पशुपालक रतनाराम देवासी व सांवलाराम देवासी ने नया नारणावास से गुजरते समय बताया कि उनके पास २०० से अधिक गायें है। उनके साथ रामसीन निवासी धुकाराम व रतनाराम देवासी भी थे और उनके पास भी ३०० से अधिक गायें और साथ में बछड़े भी थे। जिन्हें लेकर वे चार महीने पहले वे चराई के लिए बिबलसर व रामसीन से बागरा, नारणावास, नया नारणावास, आहोर, तखतगढ़, सांडेराव, पाली, सोजत व बिलाड़ा आदि गांवों तक गए। जोधपुर जिले के बिलाड़ा कस्बे के पास स्थित उचियारड़ा गांव तक पड़ाव डालने के बाद वे महीने भर पहले वापस बिबलसर के लिए रवाना हुए थे। शनिवार को नया नारणावास होकर अपने गांव बिबलसर व रामसीन के लिए जा रहे थे। उन्होंने बताया कि इतने गांवों में भटकने के बाद भी चारे की समस्या गम्भीर बनी हुई है। गायों की संख्या ज्यादा होने से कोई मदद भी नहीं करता। वहीं रुपए देने के बाद भी चार हाथ नहीं लग पा रहा है। संकट की इस घड़ी में वे ना तो अपने बच्चों की पढ़ाई करवा पा रहे हंै और ना ही सरकार भी किसी तरह से मदद कर रही है। ऐसे में अब उनके पास जार-जार रोने के सिवाय कुछ नहीं बचा है।
यहां और भी हालत खराब
पशुओं को लेकर दर-दर भटक रहे भानाराम ने बताया कि उसके साथ पूरा परिवार है। पत्नी रेखा देवी व एक वर्ष के छोटे बच्चे के साथ गायों को चराने के लिए चार महीने पहले जोधपुर जिले के बिलाड़ा के पास उचियारड़ा तक पहुंचे। इसके बाद वापस महीने भर पहले गायों के साथ रवाना हुए जो आज नया नारणावास तक पहुंचे। अब वो एक-दो दिन में बिबलसर तक पहुंचेंगे, लेकिन उन्हें चिंता है कि गांवों में चारे के संकट के चलते इतनी गायों को क्या खिलाएंगे। इसके अलावा सफर के दौरान रास्ते भर में गायों को पानी पिलाने की समस्या रही। कई बार ऐसा समय भी आया कि दो दिन में एक बार गायों को पानी नसीब हो पाया।

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