
गणपत लाल: फोटो पत्रिका नेटवर्क
जालोर। जगदीश गैंग से लीक पेपर रटकर पीडब्ल्यूडी में जेईएन बना और प्रमोशन हासिल कर एईएन प्रमोट हुए गणपतलाल विश्नोई को एसओजी ने गिरफ्तार किया। गणपतलाल ने नौकरी हासिल करने के बाद जालोर पीडब्ल्यूडी कार्यालय में 2022 से वर्ष 2025 की शुरुआत तक ड्यूटी की। उसके बाद यहां से तबादला गडरारोड (बाड़मेर) हो गया।
बाद में गणपतलाल का प्रमोशन एईएन के रूप में प्रमोशन हुआ। वर्तमान में बाड़मेर में गणपत एईएन के रूप में कार्यरत था। बता दें जालोर में करीब दो साल के कार्यकाल में गणपतलाल को जेईएन के रूप में जालोर-बागरा फोरलेन प्रोजेक्ट की निगरानी का जिम्मा था। गणपत से एसओजी की ओर से प्रकरण को लेकर पूछताछ की जाएगी।
कनिष्ठ अभियंता (जेई) संयुक्त भर्ती परीक्षा-2020 का पेपर लीक होने के बाद परीक्षा निरस्त कर दी गई थी, लेकिन इसके बावजूद पेपर माफिया का नेटवर्क सक्रिय रहा। पहली परीक्षा रद्द होने पर खरीदार अभ्यर्थियों ने पैसे लौटाने का दबाव बनाया तो गिरोह ने उन्हें भरोसा दिलाया कि पुन: आयोजित परीक्षा का प्रश्नपत्र भी पहले ही उपलब्ध करा दिया जाएगा। 12 सितंबर 2021 को हुई पुन: परीक्षा का पेपर भी परीक्षा से पहले ही आउट कर बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों तक पहुंचाया गया। एसओजी के एडीजी विशाल बंसल ने बताया कि इस संबंध में नया प्रकरण दर्ज किया गया है।
मामले में पुन: आयोजित परीक्षा से पहले ही पेपर लेकर नौकरी हासिल करने वाले जालोर जिले के डेडवा निवासी हाल पीडब्ल्यूडी सहायक अभियंता गणपतलाल विश्नोई पुत्र गोवर्धनराम विश्नाई को गिरफ्तार किया। एसओजी ने मामले में 19 जनवरी 2026 को पेपर लीक माफिया दाता निवासी जगदीश विश्नोई के खिलाफ मामला दर्ज कर गिरफ्तार किया था। गणपत ने जगदीश गैंग के सहयोगियों से पेपर पढ़ा और उसके बाद परीक्षा देकर परीक्षा पास कर नौकरी पाई
एसओजी के अनुसार 12 सितंबर 2021 को जेईएन परीक्षा का पेपर लीक किया गया। इसके बाद 13 से 15 सितंबर 2021 के बीच आयोजित सब-इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा में भी प्रश्नपत्र लीक होने के तथ्य जांच में सामने आए। इससे स्पष्ट हुआ है कि उस समय राज्य की प्रमुख भर्ती परीक्षाओं को प्रभावित करने के लिए एक संगठित गिरोह सक्रिय था। यही एसओजी की जांच का आधार बना और इस प्रकरण का खुलासा हुआ।
इधर, पूछताछ में आरोपी जगदीश ने स्वीकार किया कि उसने अपने अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले अभ्यर्थियों तक पहुंचाया था। जांच में सामने आया कि पीडब्ल्यूडी में सहायक अभियंता के पद पर कार्यरत गणपतलाल विश्नोई ने अवैध और अनुचित साधनों से परीक्षा उत्तीर्ण की थी।
इसके चलते उसका मेरिट क्रमांक 12 आया और बाद में उसे पदोन्नति भी मिली। गणपतलाल को भी गिरफ्तार किया गया है, जो वर्तमान में एसओजी की रिमांड पर है। आरोपी गणपतलाल बाड़मेर स्थित अधिशासी अभियंता कार्यालय में पदस्थ है। अन्य आरोपियों के संबंध में जांच जारी है। परीक्षा से पहले पेपर लेने वाले कई आरोपी जेईएन पद पर भर्ती होकर वर्तमान में एईएन बन गए हैं।
एसओजी के अनुसार पेपर लीक माफिया दाता निवासी जगदीश विश्नोई अलग अलग गैंग के पास जेईएन भर्ती 2021 का पेपर पहुंचा। एसओजी ने 19 जनवरी 2026 को प्रकरण दर्ज कर जगदीश को गिरफ्तार किया था। जगदीश ही 2020 में जेईएन भर्ती परीक्षा के पेपर लीक का मास्टरमाइंड था। जगदीश पर नकल प्रकरणों से जुड़े दर्जनभर मामले दर्ज है।
पिछले डेढ़ दशक में आयोजित सभी प्रतियोगी परीक्षाओं में नकल गिरोह का जुड़ाव जालोर जिले में मुख्य रूप से सांचौर क्षेत्र से रहा है। पकड़े गए नकल सरगना, अभ्यर्थी यहीं के थे। पटवारी भर्ती परीक्षा, लेक्चरर, पीटीआई, पुलिस कांस्टेबल, एसआई भर्ती, शिक्षक भर्ती, वरिष्ठ लेखाकार भर्ती परीक्षा, ग्राम सेवक भर्ती परीक्षाओं में जालोर-सांचौर के नकल गिरोह की भूमिका सामने आई। अब पांच साल के दायरे में हुई भर्ती परीक्षाएं एसओजी के राडार पर है। जबकि हकीकत यह है कि पिछले 15 साल में आयोजित सभी प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल अभ्यर्थियों की सूची शक के दायरे में है।
Published on:
31 Jan 2026 04:44 pm

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