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स्थगन आदेश रद्द, न्यायालय ने नगर परिषद को दिए कार्रवाई करने के निर्देश

कोर्ट ने माना सही थे परिषद की ओर से पेश किए गए तथ्य और नोटिस

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Multy story building in Jalore

जालोर. शहर की पोश कॉलोनी शिवाजी नगर में भवन निर्माण के मामले बरती गईअनियमितताओं को लेकर मालिक की ओर से नगरपरिषद की कार्रवाई के खिलाफ लिए गए स्थगन आदेश को उच्च न्यायालय ने रद्द कर दिया है।
जानकारी के अनुसार नगरपरिषद की ओर से नियम विरुद्ध निर्माण को लेकर 17 जनवरी 2017 को भवन मालिक को नोटिस देकर भवन निर्माण इजाजत और इससे संबंधित आवश्यक दस्तावेज पेश करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद भवन मालिक ने इस कार्रवाई के विरुद्ध जोधपुर उच्च न्यायालय से स्थगन आदेश प्राप्त किया था। यह भवन नगरपरिषद उपसभापति मंजू सोलंकी के पति राजेंद्र सोलंकी के नाम से है। सोलंकी ने कोर्ट से स्थगन आदेश प्राप्त करने के लिए यह बताया था कि तत्कालीन आयुक्त त्रिकमदान चारण उनकी पत्नी (उपसभापति) से व्यक्तिगत द्वेषता रखते हैं वहीं उनकी पट्टाशुदा जमीन पर नगर परिषद के तय मापदंडों के अनुसार ही भवन निर्माण करवाया है। इसके बावजूद नगरपरिषद भवन निर्माण को अवैध ठहराकर यह कार्रवाई कर रही है। करीब नौ माहतक न्यायालय में चली कार्रवाई के बाद गत ६ अक्टूबर को न्यायालय ने परिषद की ओर से पेश किए गए तथ्यों व भवन मालिक को दिए नोटिस को सही ठहराया, साथ हीभवन मालिक राजेंद्र सोलंकी को सुनवाई का एक मौका देकर नगर परिषद को विधिवत रूप से कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
यह था मामला
शिवाजी नगर कॉलोनी स्थित जलदाय विभाग के कार्यालय के पास राजेंद्र सोलंकी की पट्टाशुदा जमीन पर बहुमंजिला भवन का निर्माण किया गया है। इस मामले में आरटीआई कार्यकर्ता हीराचंद भंडारी ने नगरपरिषद आयुक्त से निर्माण कार्यों में बरती अनियमितताओं की शिकायत की थी। इसके बाद तत्कालीन आयुक्त चारण ने भवन मालिक को 17 जनवरी 2017 को नोटिस देकर निर्माण इजाजत व इससे संबंधित दस्तावेज पेश करने के निर्देश दिए। इसके कुछ दिन बाद ही भवन मालिक ने जोधपुर न्यायालय से स्थगन आदेश प्राप्त कर लिया और न्यायालय ने इसके बाद परिषद को मौका रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए थे।
क्या था मौका रिपोर्ट में
नगरपरिषद की ओर से न्यायालय के निर्देशों पर गत 20 फरवरी 2017 को मौका रिपोर्ट तैयार कर भिजवाई। नगरपरिषद आयुक्त चारण, जेईएन शैलेंद्र यादव व गजधर समेत चार जनों की हस्ताक्षरयुक्त रिपोर्ट में कई अनियमितताएं दर्शाई गई। रिपोर्ट में बताया गया कि निरीक्षण के दौरान भवन के पूर्व में 44.10 फीट चौड़ी सड़क पाई गई, जबकि पट््टे में चौड़ाई 50 फीट थी। मौके पर रोड सेंटर से भवन की ऊंचाई 19.74 मीटर मिली, जबकि निर्माणकर्ता को 15 मीटर ऊंचाई तक निर्माण की इजाजत दी गईथी। इस तरह 4.74 मीटर ऊंचा अवैध निर्माण किया गया था। परिषद की ओर से अनुमोदित प्लान के विरुद्ध मालिक द्वारा 5वीं मंजिल का अतिरिक्त निर्माण किया गया व उक्त तल पर १००० लीटर क्षमता का 10 पीवीसी वॉटर टैंक तथा लिफ्टनुमा बनाया गया था, जो अवैध था। इसी तरह मौके पर अनुमति आज्ञा पत्र के विरुद्ध सेट बैक की जगह भी नहीं छोड़ी गई और प्लान के अनुसार भू-तल से चतुर्थ तल तक पैसेज के लिए दर्शाए गए स्थानों को भी नियम विरुद्ध भवन में समावेशित कर लिया गया। वहीं भू-तल पर पार्किंग दर्शाई गई थी जो मौजूद नहीं थी।
सरकारी जमीन पर निर्माण
मौका रिपोर्ट में यह भी बताया गया रोड की 7 फीट जमीन पर निर्माण किया गया। जबकि भवन के भू-तल क्षेत्र में पहले से ही वाणिज्यिक कर विभाग को किराए पर संचालित किया जा रहा था और यहां बिजली का कनेक्शन और पट्टा भी रहवासी था।
नियमानुसार की जाएगी कार्रवाई
फिलहाल हमारे पास दस्तावेज प्राप्त नहीं हुए हैं। न्यायालय के जो भी निर्देश होंगे उनकी पालना की जाएगी।
- सौरभ जिंदल, आयुक्त, नगरपरिषद जालोर
स्थगन आदेश रद्द होने जैसी कोई बात नहीं
स्थगन आदेश रद्द होने जैसी कोई बात नहीं है। वैसे मैं अभी बाहर हूं और कल आकर ही कुछ बता सकता हूं।
- राजेंद्र सोलंकी, भवन निर्माता