
जीवाणा मंडी में अनार। फोटो: पत्रिका
जालोर/ जीवाणा। जीवाणा मंडी में अनार की बंपर आवक जारी है और मार्केट गुलजार है। रोजाना 500 टन से अधिक अनार यहां बिकने को पहुंच रहा है। प्रतिदिन हजारों किसान यहां अनार बिकवाली को पहुंच रहे हैंं। इसके बावजूद विडंबना यह है कि जिले की सबसे बड़े अनार उत्पादन क्षेत्र के लिए सरकारी मंडी घोषणा के बाद भी स्थापित नहीं हो पाई है।
अनार के लिए कोई प्रोसेसिंग यूनिट तक नहीं है। जिससे जीवाणा क्षेत्र में अनार बिकवाली की सीजन में व्यापारियों की ओर से मनमानी का सिलसिला जारी रहता है। यहां वर्तमान में करीब 10 निजी अनार मंडियां संचालित हो रही हैं, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में किसान अपनी अनार लेकर पहुंच रहे हैं। लेकिन यहां के व्यापारियों की मनमानी के शिकार हो रहे हैं।
जालोर जिले में 10 हजार हैक्टेयर से अधिक क्षेत्र में अनार की पैदावार होती है। इसमें से 5 हजार हैक्टेयर क्षेत्र केवल जीवाणा का है। यहां प्रति किसान 1 हजार से 3 हजार तक अनार की पौध किसानों के खेतों में हैं।
जीवाणा क्षेत्र में भी 7 साल पूर्व तक जीरा, सरसों समेत अन्य पारंपरिक खेती होती थी, लेकिन अब पिछले पांच सालों में अनार की खेती किसानों के लिए फायदे का सौदा साबित हो रहा है। अनार के बल्क प्रोडक्शन के बाद मनमर्जी के दामों पर बिकवाली किसानों की मजबूरी है। सरकारी मंडी होने पर किसानों को उपज बेचने में फायदे में होगा।
अनार मंडियों में किसानों को इस समय 80 से 100 रुपए प्रति किलो से ऊपर भाव मिल रहा है। कई किसान सीधे अपने फॉर्म हाउस पर ही व्यापारियों से सौदे कर रहे हैं, जहां अनार के दाम 100 से 120 रुपए प्रति किलो तक तय हो रहे हैं। किसानों का कहना है कि फॉर्म हाउस पर सौदा करने से उन्हें परिवहन और मंडी खर्चों में बचत होती है, जिससे उनकी आमदनी में इजाफा होता है। हालांकि किसानों का मानना है कि अगर क्षेत्र में सरकारी अनार मंडी शुरू हो जाए तो उन्हें और अधिक लाभ मिल सकता है।
किसानों का यह भी कहना है कि निजी मंडियों में कई बार बिचौलियों के कारण भाव में उतार-चढ़ाव और कटौती का सामना करना पड़ता है। यदि सरकारी मंडी चालू हो जाती है तो प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलेगा। साथ ही क्षेत्र में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे और अनार व्यापार को संगठित स्वरूप मिलेगा।
मुख्य रूप से यहां से अनार सउदी अरब, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, मलेशिया, चीन, श्रीलंका, नेपाल समेत अन्य देशों तक जालोर जिले में उत्पादित सिंदूरी अनार की खूब डिमांड है। इससे किसानों को फायदा मिल रहा है। हैडिंग सुझाव
इस समय हमें मंडी में 100 रुपए प्रति किलो से ऊपर भाव मिल रहा है, जो राहत की बात है। कई व्यापारी हमारे फॉर्म हाउस पर आकर 100 से 120 रुपए तक सौदा कर रहे हैं। अगर सरकारी अनार मंडी चालू हो जाए तो हमें सही तौल, पारदर्शी भाव और समय पर भुगतान मिलेगा।
-अम्बाराम, किसान, सांगाणा
जीवाणा क्षेत्र में रोजाना करीब 500 टन से ऊपर अनार की आवक हो रही है। बारिश के कारण कुछ फलों की क्वालिटी पर असर पड़ा है, लेकिन फिर भी बाजार में भाव 100 रुपए प्रति किलो से ऊपर चल रहे हैं। हम किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने का प्रयास कर रहे हैं।
-भीमाराम कलबी, अनार मंडी संचालक
अनार का व्यापार लगातार बढ़ रहा है। इस समय हमारे यहां रोजाना बड़ी मात्रा में अनार की आवक हो रही है। किसान खुद भाव देखकर माल लेकर आ रहे हैं। बारिश ज्यादा होने से अनार का रंग कुछ कमजोर जरूर हुआ है, लेकिन मिठास और वजन अच्छा है, इसी कारण बाजार में मांग बनी हुई है। हम मंडी में किसानों को खुले भाव पर बिक्री की सुविधा दे रहे हैं।
-हीराराम चौधरी, अनार मंडी, संचालक
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Published on:
14 Jan 2026 01:56 pm
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