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चितलवाना: यहां लाखों खर्च कर खोद डाले खारे पानी के ट्यूबवैल

नेहड़ के अधिकतर गांवों में पानी खारा, भूजल विभाग ने खारे पानी में दे डाली सर्वेक्षण रिपोर्ट

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नेहड़ के अधिकतर गांवों में पानी खारा, भूजल विभाग ने खारे पानी में दे डाली सर्वेक्षण रिपोर्ट

चितलवाना. बाढ़ से नर्मदा नहर के टूटने के बाद नेहड़ में पेयजल की समस्या से निजात दिलाने को लेकर सरकार ने भले मीठे पानी के लिए बजट आवंटित किया था, लेकिन विभाग ने आनन-फानन में नेहड़ के गांवों में खारा पानी होने के बावजूद ट्यूबवेल खुदवा कर राजकोष को चूना लगा दिया। जानकारी के अनुसार जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की ओर से नेहड़ के हर गांव में सिंगल फेज बिजली के कनेक्शन का ट्यूबवैल खुदवाकर उसी गांव में पेयजल मुहैया कराने के लिए राज्य सकार को अनुसंशा भेजी थी। इस पर राज्य सरकार ने इसके लिए छह करोड़ का बजट आवंटित किया। इसके बाद भू-जल विभाग की सर्वेक्षण रिपोर्ट के आधार पर हर गांव में ट्यबवेल खोदे गए।ऐसे में अधिकतर गांवों में ट्यूबवेलों में खारा पानी होने से पीने लायक भी नहीं रहा है। लोगों के विरोध के बावजूद विभाग ने कई जगह ट्यूबवेल खोद दिए।
खारे पानी के बावजूद, रिपोर्ट में मीठा!
गौरतलब है कि नेहड़ के अधिकतर गांव पूर्व में कच्छ रण का हिस्सा रहे हैं। जिसकी वजह से यहां की जमीन लवणीय होने से पानी खारा ही है। इसके बावजूद भू-जल विभाग की ओर से सर्वेक्षण रिपोर्ट में मीठा पानी बताकर ट्यूबवैल खुदवाने की अनुमति जारी कर दी।
ट्यूबवेल खुदवाए पर काम नहीं आए
जनस्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग की ओर से नेहड़ क्षेत्र में पेयजल किल्लत दूर करने को लेकर ट्यूबवेल खुदवाने की स्वीकृति ली गई। इसके बाद अधिकतर गांवों में ट्यूबवेल तो खुदवा दिए गए, लेकिन यहां बिजली के कनेक्शन नहीं होने व खारा पानी निकलने से ये ट्यूबवेल किसी काम नहीं आ रहे हैं।
इनका कहना है...
&नेहड़ के गांवों में विभाग ने ट्यूबवेल खुदवाए गए थे, लेकिन अधिकतर ट्यूबवेल में पानी खारा ही निकला है। ऐसे में विभाग की ओर से राजकोष को चूना लगाया गया है।
- सौभागदेवी, सरपंच, डावल
&जिन गांवों में खुदवाए गए ट्यूबवेल से खारा पानी निकला है, उन्हें हमने बंद करवा दिया है। कहीं और भी पानी खारा निकला है तो ऐसे ट्यूबवेल भी बंद करवा दिए जाएंगे। वैसे ट्यूबवेल खुदवाने से पहले हमने भू-जल विभाग से सर्वेक्षण रिपोर्ट ली थी।
- कमलजीत बेगरा, एसई, नर्मदा परियोजना
&ट्यूबवेल खुदवाने से पहले विभाग ने हमसे रिपोर्ट ली थी, लेकिन विभाग ने ट्यूबवेल कहां खुदवाए हैं इस बारे में हमें जानकारी नहीं है।
- रमेश माथुर, एईएन, भू-जल विभाग, जालोर