
किसानों के हालात: मौसम की मार ने इस बार जीरे की फसल को पहुंचाया नुकसान
भाद्राजून/नारणावास. पश्चिमी राजस्थान जीरे की पैदावार का मुख्य केंद्र माना जाता है और यहां सर्दी के मौसम में बड़े क्षेत्र में जीरे की पैदावार होती है। यह फसल किसानों के लिए हमेशा से ही जुआ ही साबित होती है। मौसम में थोड़ा सा खराबा इस फसल को चौपट कर देती है। हर साल जिले में बड़े क्षेत्र में जीरे की बुवाई होती है और उसके बाद बड़े पैमाने में पैदावार से किसान लाखों कमाते हैं, लेकिन इस बाद मौसम के दगा देने से ऐसा संभव नहीं हो पाया है। फसल तैयार होने के बाद बारिश, ओस और कोहरे से इस फसल को बड़े स्तर पर खराबा हुआ है। मौसम से हुए खराबे को लेकर गिरदावरी चल रही है और इसकी रिपोर्ट के बाद ही आंकलन हो पाएगा, हालांकि किसानों की मानें तो इस बार जीरे की फसल को काफी ज्यादा नुकसान पहुंचा है।
हमेशा इतना क्षेत्र बुवाई का
सीजन में जीरे की बुवाई का रकबा कम रहा और खराबे का आकलन चल रहा है। जबकि पूर्व के सालों पर गौर करें तो वर्ष 2020 में जालोर जिले में 1 लाख 35 हजार हैक्टेयर क्षेत्र में जीरे की बुवाई हुई थी और बेहतर मौसम रहने पर जिले में 66 हजार 402 मेट्रिक टन उत्पादन भी हुआ।
पश्चिमी राजस्थान जीरा उत्पादन का बड़ा केंद्र
मारवाड़ क्षेत्र में जीरे की फसल को लेकर जीरो जिव रो वैरी गीत भी प्रचलित है। जिससे तात्पर्य है कि इस फसल की बुवाई से लेकर पकने और उसके बाद जीरे की फसल का एक एक बीज एकत्र करना आम फसल के जितना आसान नहीं और मौसम खराब हो जाए तो जीरे में खराब निश्चित है। देश का 80 प्रतिशत से अधिक जीरा गुजरात व राजस्थान राज्य में उगाया जाता है। राजस्थान में देश के कुल उत्पादन का लगभग 28 प्रतिशत जीरे का उत्पादन किया जाता है तथा राज्य के पश्चिमी क्षेत्र में कुल राज्य का 80 प्रतिशत जीरा पैदा होता है।
इसलिए संवदनशील है जीरे की फसल
जीरे की फसल के लिए वातावरण का तापमान 30 डिग्री सेल्सियस से अधिक व 10 डिग्री सेल्सियस से कम होने पर जीरे के अंकुरण पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। अधिक नमी होने पर इस फसल में छाछ्या तथा झुलसा रोग फैलता है। कोहरा और पाला पडऩे पर भी जीरा नष्ट हो जाता है।
इनका कहना
जीरे की बुवाई के बाद फसल पकने पर बिकवाली के लिए ऊंझा (गुजरात) जाते हैं। इस बार मंडी में भाव अच्छे चल रहे हैं, लेकिन मौसम खराब रहने से पैदावार आधी भी नहीं रही है। - गणेशाराम, किसान, रेवड़ाकल्ला
मौसम में नमी अधिक रहने के साथ साथ तेज हवाएं चलने से जीरे की फसल में सर्वाधिक नुकसान हुआ है। जीरे में कीटों का असर भी अधिक रहा और इस बार हमेशा की तुलना में 50 प्रतिशत ही पैदावार हुई है। - फकाराम मेघवाल, किसान, नया नारणावास
इस बार जीरे की बुवाई का रकबा कम रहा है। अभी गिरदावरी चल रही है। रिपोर्ट के बाद ही सही तरीके से उपज और खराबे का आकलन संभव हो पाएगा। - डॉ. आरबीङ्क्षसह, उप निदेशक, कृषि विस्तार
Published on:
27 Mar 2022 02:28 pm

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