5 नवंबर 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

34 माह में हुईं 7 बैठकें, विकास के नाम पर कुछ नहीं

बीते छह माह से नहीं हुई पंचायत समिति की साधारण बैठक
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

जालोर

•

image

Dinesh kumar Mali

•

Updated: 17 Dec 2017, 12:02 PM IST

Jalore News

Devlovment in Panchayat Samiti chitalwana

चितलवाना. जिले के सबसे पिछड़े नेहड़ इलाके वाली चितलवाना पंचायत समिति खुद विकास के मामले में पिछड़ती नजर आ रही है। बीते छह महीने में यहां एक भी साधारण सभा की बैठक नहीं हो पाई है। तीन साल गुजरने को है, लेकिन पंचायत समिति की ३४ माह में महज 7 बार बैठकें हो पाईहै। ऐसे में नेहड़ के गांवों के विकास को लेकर की जा रही बड़ी-बड़ी बातें खोखली साबित हो रही है। पंचायत समिति की इन बैठकों में ग्राम पंचायत के सरपंच, पंचायत समिति सदस्य, अधिकारी व कर्मचारी भाग लेते हैं। हर माह में होने वाली इन बैठकों में विकास का एजेन्डा तैयार करना होता हैं, मगर ना तो अधिकारी बैठकों को लेकर कोई रुचि दिखा रहे हैं और ना ही जनप्रतिनिधि। जिससे नेहड़ के गांवों में विकास की गति रुकी पड़ी है। पंचायत समिति में अधिकतर समय में बीडीओ का पद रिक्त रहता है। ऐसे में पंचायत समिति के कर्मचारी भी मनमर्जी झाड़ते हैं। पंचायत समिति की साधारण बैठक जून माह हुई थी। ऐसे में छह माह बीतने के बाद भी बैठक नहीं हो पाईहै। ऐसे में गांवों में विकास की कड़ी अटकी हुई है।
यह है नियम
पंचायतीराज विभाग की ओर से एक माह में दो बैठक ग्राम पंचायत मुख्यालय पर, हर माह में एक बैठक पंचायत समिति मुख्यालय पर और तीन माह में एक बार जिला परिषद की बैठक जिला मुख्यालय पर आयोजित करने का नियम है। वहीं एक बैठक किसी कारणवश नहीं होने पर दूसरी बैठक होना अनिवार्य है, लेकिन चितलवाना पंचायत समिति की साधारण सभा की बैठक पिछले छह माह से नहीं हुई है।
इनका कहना है...
साधारण सभा की बैठक हर माह होती है। किसी कारणवश एक माह में नहीं होने पर दूसरे माह होनी अनिवार्य है। वैसे मेरे पास अभी चार्ज आया है। बैठक नहीं हुई है तो इस बारे में पता करवाया जाएगा।
- रामावतार शर्मा, कार्यवाहक बीडीओ, चितलवाना
फिलहाल उपचुनाव में लगे हुए हैं। उपचुनाव पूरे होने के बाद इस बारे में विचार करेंगे।
- हनुमानप्रसाद भादू, चितलवाना प्रधान