India Post -बाड़मेर, जैसलमेर, जालोर के दूरस्थ एरिया में डाक विभाग की नई कवायद - गुजरात के कच्छ एरिया में पायलट प्रोजेक्ट के बाद राजस्थान को चुना, सफल होने के बाद देश के दूर दराज एरिया में ड्रोन से हो सकेगी डाक से डिलीवरी
गजेंद्र सिंह दहिया
जालोर. बीसवीं सदी में थार मरुस्थल के दूरस्थ इलाकों में डाक विभाग जहां ऊंटों के माध्यम से चिठ्ठी भेजता था वहीं निजी तौर पर कई जने कबूतर का इस्तेमाल किया करते थे। इक्कीसवीं सदी में प्रवेश के बावजूद देश के दूसरे सबसे बड़े जिले जैसलमेर और उसके पड़ौसी जिले बाड़मेर और जालोर के दूरदराज के क्षेत्रों में डाक पहुंचाना आसान काम नहीं है। ऐसे में डाक विभाग ने अब ड्रोन से डाक डिलिवरी की कवायद शुरू करने जा रहा है। विभाग ने पायलट प्रोजेक्ट के तहत इसी साल सबसे पहले गुजरात के कच्छ में ड्रोन का ट्रायल किया था जो सफल रहा। अब ड्रोन का ट्रायल पश्चिमी राजस्थान में होगा। विभाग ने जोधपुर डाक परिमण्डल को ड्रोन की फिजिबिलिटी जांचने के निर्देश दिए हैं। जोधपुर डाक परिमण्डल में 13 जिले हैं जिसमें जोधपुर संभाग के अनुसार शेखावटी, बीकानेर और श्रीगंगानगर-हुनमानगढ़ का क्षेत्र भी शामिल है।
हवाई जहाज जैसा है ड्रोन, स्टार्ट अप कार्यक्रम में बनाया
डाक विभाग ने संचार विभाग के साथ मिलकर ड्रोन डिलिवरी शुरू की है। ड्रोन का निर्माण स्टार्ट अप कार्यक्रम के अंतर्गत टेकईगल ने बनाया है। गुजरात के भुज में इस ड्रोन ने 46 किलोमीटर दूर डाक की डिलिवरी 25 मिनट में की थी।
ऐसे होगी ड्रोन से डाक की डिलिवरी
गांव-ढाणी में बसे उप डाकघर के लिए मुख्य डाकघर या डाकघर से ड्रोन के जरिए आर्टिकल भेजा जाएगा। इसका रूट व समय तय होगा, जिसकी सूचना संबंधित उप डाकघर को भी होगी। ड्रोन सीधा उप डाकघर की ओर से बताए गए स्थान पर ही उतरेगा, जहां से डाककर्मी आर्टिकल को प्राप्त करेंगे। उसके बाद उसकी डिलिवरी डाकखाने में अथवा घर तक डाकिए द्वारा की जाएगी।
फिजिलिटी में यह जांचा जाएगा
- ड्रोन से डिलिवरी का समय और उसके अनुसार उसका चार्ज क्या होना चाहिए
- ड्रोन की उड़ान का रूट
- ड्रोन के उतरने की जगह और आर्टिकल प्राप्त होने पर वापसी में लगने वाला समय
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हमें ड्रोन से डाक डिलिवरी की फिजिबिलिटी जांचने के निर्देश मिले हैं। गुजरात के कच्छ के बाद दूसरा ट्रायल हमारे यहां होगा।सचिन किशोर, पोस्ट मास्टर जनरल, राजस्थान डाक परिमण्डल (पश्चिमी क्षेत्र)