
जालोर. जिले में मुख्य सड़कों पर कहीं ढलान तो कहीं खतरनाक मोड़ व स्पीड ब्रेकर अनजाने में हादसों का कारण बने हुए हैं। इन सड़कों पर कुछ स्थान तो ऐसे भी है, जहां अक्सर हादसे होते रहते हैं। जिसमें अधिकांश स्थानों पर खतरनाक मोड़ हादसों के कारण बने हुए हैं। वहीं कुछ स्थानों पर ढलान की वजह से हादसे हो रहे हैं। लेकिन प्रशासन ने अब तक इन हादसों की रोकथाम को लेकर धरातल पर कोई खास पहल नहीं की। प्रशासन की ओर से सड़कों पर महज हाई रिस्क जोन चिह्नित कर कागजी खानापूर्ति कर ली जाती है। ऐसे में हर साल सैकड़ों लोग सड़क हादसों की वजह से मौत के मुंह चले जाते हैं। जिले में पिछले तीन साल के सड़क हादसों के आंकड़ों को देखा जाए तो सालाना औसत २९१ सड़क दुर्घटनाएं हो रही है। जिसमें सालाना औसतन १७७ से अधिक लोग दम तोड़ रहे हैं। लेकिन इन हादसों में कमी लाने को लेकर जिम्मेदार विभागों की ओर से कोई खास प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। जबकि, जिले में विभिन्न मार्गों पर कई ऐसे स्थान है, जहां अक्सर हादसे होते रहते हैं। आस-पास के लोग ऐसे स्थानों को खतरनाक श्रेणी में शामिल कर वाहन चलाते समय सतर्क रहते हैं, लेकिन बाहर से आने वाले वाहन चालकों को इसकी जानकारी नहीं मिल पाती है। ऐसे में अनजान लोग ही ऐसे स्थानों पर अधिक हादसों का शिकार बनते हैं। पुलिस प्रशासन की ओर से चिह्नित ऐसे स्थानों को देखा जाए तो जिले में हर मुख्य मार्गों पर खतरनाक मोड़ आदि के रूप में यमराज खड़ा मिलता है।
अधिकांश जगह नहीं सूचना पट्ट
जिले में मुख्य सड़कों पर हाई रिस्क जोन में अधिकांश स्थानों पर संकेतक तक नहीं लगे हुए हैं। वहीं कई स्थानों पर संकेतक लगे हुए हैं, लेकिन क्षतिग्रस्त हालात है। ऐसे में वाहन चालकों को जानकारी नहीं मिल पाती है।
इन थाना क्षेत्रों में ज्यादा होते हैं हादसे
जिले में आहोर, बागरा, कोतवाली जालोर, सांचौर थाना क्षेत्र में सड़क दुर्घटनाएं ज्यादा होती है। सांचौर थाना क्षेत्र में डेडवा चौराहा और धमाणा सरहद में अक्सर हादसे होते रहते हैं। इसके अलावा बागरा थाना क्षेत्र में धानपुर फांटा से आशापुरी माता मंदिर के बीच मोड़ की वजह से हादसे होते रहते हैं। वहीं कोतवाली थाना क्षेत्र में भीनमाल रोड पर मोहनजी की प्याऊ से बागली प्याऊ के बीच भी अक्सर सड़क दुर्घटनाएं होती रहती है।
यह है फैक्ट फाइल
वर्ष हादसे मृतक घायल
२०१४ ३१० १८४ २७१
२०१५ २९१ १७७ २६१
२०१६ २७२ १७१ २५६
इनका कहना है...
जिले में सड़क हादसों की रोकथाम को लेकर पुलिस की ओर से प्रयास किए जाएंगे। हाई रिस्क जोन चिह्नित किए हुए हैं। अब सम्बंधित विभागों से समन्वय स्थापित कर ऐसे स्थानों पर संकेतक, स्पीड ब्रेकर बनाने के साथ-साथ सड़क पर कोई खामी होगी, तो उसे भी दूर करने का प्रयास किया जाएगा। ताकि, सड़क हादसों में कमी लाई जा सके।
-कल्याणमल मीना, पुलिस अधीक्षक, जालोर
Published on:
08 Jan 2017 10:33 am
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