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ठेकेदार से दो पंप लगवा 40 फीट तक बहाया पानी, 20 घंटे बाद फंसे शव को निकाला

आपात स्थिति में सरकारी सिस्टम कितना अलर्ट और तैयार है। यह तासखाना बावड़ी में युवक के पानी में कूदने के बाद चले रेस्क्यू ऑपरेशन और उसके बाद उसके शव को बावड़ी में तलाशने के दौरान देखने को मिला।

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जालोर

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Kirti Verma

Aug 18, 2023

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जालोर/पत्रिका. आपात स्थिति में सरकारी सिस्टम कितना अलर्ट और तैयार है। यह तासखाना बावड़ी में युवक के पानी में कूदने के बाद चले रेस्क्यू ऑपरेशन और उसके बाद उसके शव को बावड़ी में तलाशने के दौरान देखने को मिला। इस ऑपरेशन में प्रशासनिक सिस्टम की पोल खुली। यहां फूलाराम (40) के बावड़ी में कूदने की सूचना बुधवार दोपहर को मिली थी। जिसके बाद से लेकर रात करीब 9 बजे तक केवल प्रयास हुए, धरातल पर कोई ज्यादा कार्य नहीं हुए। रात 10 बजे जलदाय विभाग के एक ठेकेदार से दो बड़े पंप मंगवाने के बाद सवेरे तक बावड़ी का 40 फीट तक पानी खाली किया गया, जिसके बाद एसडीआरएफ टीम मशक्कत के बाद शव को बाहर निकाल पाई। शव निकालने में 20 घंटे तक का समय लग गया। ये हालात प्रशासनिक तैयारियों की पोल खोलते है। बता दें अक्सर मॉक ड्रिल के माध्यम से आपात स्थितियों को जांचा जाता है, लेकिन जब भी आपात स्थिति बनती है तो सिस्टम फेल हो जाता है।

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3 टीमें जुटी, पानी अधिक होने से दिक्कत
बुधवार दोपहर को जालोर से सिविल डिफेंस की टीम मौके पर पहुंची और रेस्क्यू का प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। इधर, एसडीआरएफ टीम को सूचित किया गया, जो शाम को यहां पहुंची। लेकिन यह टीम भी पानी के अधिक भराव में काम नहीं कर पाई। इधर, देर रात को भीनमाल से एनडीआरएफ टीम भी जालोर पहुंची।

ठेकेदार के पंप बने मददगार
रात 10 बजे के करीब 12.5 एचपी के दो पंप लगाए गए। इन पंप से 600 एलपीएम (लीटर प्रति मिनट) पानी बावड़ी से बहाया गया। सवेरे तक 40 फीट पानी का लेवल कम हुआ। जिसके बाद टीम पानी में उतरी और शव को बाहर निकाला गया।

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रेस्क्यू टीम की जुबानी: बिलाई बनी मददगार
शव को गाद से बाहर निकालने में अहम भूमिका निभाने वाले एसडीआरएफ टीम के सदस्य दिनेश ने बताया कि मौके पर पहुंचने के बाद भी बावड़ी में पानी अधिक होने से शव की तलाश रात में शुरु नहीं हो पाई। सवेरे तक पानी पानी खाली किया गया, लेकिन उसके बाद भी बावड़ी में काफी पानी मौजूद था। टीम ने एकजुटता के साथ इस ऑपरेशन को अंजाम देने की ठानी। पानी के नीचे काफी गाद थी। इसलिए शव को खोजने के लिए बिलाई (लोहे की कांटेनुमा संरचना) जिसमें शव मिल गया। मेरे साथ पानी में मौजूद साथी मनिंदर की सहायता से उसे रस्से से बांधा। इधर बाहर मौजूद टीम के सदस्यों प्रभारी सुरेश कुमार, हैड कांस्टैबल ओमसिंह, कैलाश, दिलीपसिंह, विद्यानंद और सुंदर समेत अन्य टीमों ने भी हौसला बढ़ाया। जिसके बाद शव को बाहर निकाला जा सका।