
- लाखों रुपए खर्च के बाद भी नहीं मिल पा रहा फायदा
चितलवाना. नेहड़ के गांवों में भले ही एक बूंद पानी के लिए लोगों के कंठ सूख रहे है। लेकिन विभाग की ओर से खारे पानी में टयूबवैल तैयार करवाकर लोगों को नहर के पानी का इंतजार करवाया जा रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि नेहड़ के गांवों में जलदाय विभाग की ओर से हर गांव के चौहटे पर जीएलआर तो बनवा दिया गया, लेकिन पानी की सप्लाई कई सालों से नहीं हो रही हैं। ऐसे विभाग की ओर से हर गांव में एक सरकारी ट्यूबवैल खुदवाकर लोगों को राजी किया जा रहा है। लेकिन ट्यूबवैल में पानी खारा होने से लोगों ने विरोध जताना शुरु कर दिया हैं। नेहड़ के गांवों में लुनी व सुकड़ी नदी के बहाव वाले गांवों में लोग कच्ची बेरियां खोदकर जमीन से रिसाव के पानी से अपनी प्यास बुझाने को मजबूर हैं। नेहड़ के गांवों में नर्मदा आने के बाद भी विभाग की ओर से समय पर सप्लाई नहीं हो रही।
कई बार बने ये हालात
सांचौर के नेहड़ क्षेत्र में गर्मी के मौसम में पेयजल संकट गहरा जाता है और आमतौर पर कच्ची बेरियों से पानी पीने के लिए उपयोग में लिया जाता है। यह पानी बरसात के दौरान सतह पर बहने वाला वह पानी होता है जो गर्मी आते आते समय के नीचे चला जाता है। जिसके बाद ग्रामीण 10 से 15 फीट गहरा गड्ढा बना इस पानी का उपयोग करते हैं। नेहड़ का क्षेत्र खारी सतह का है और इसलिए भूजल में पानी खारा रहने की संभावना ही अधिक रहती है। इस बार नर्मदा परियोजना से सप्लाई बंद है। इसलिए पानी के लिए ट्यूबवैल की खुदाई की जा रही है। लेकिन भूजल खारा निकल रहा है। हालांकि विभाग की ओर से ट्यूबवैल खुदाई से पूर्व सर्वे किया गया। लेकिन यहां की भौगोलिक परिस्थितिया इस सर्वे पर भारी पड़ रही है।
&नेहड़ के गांवों में खुदवाए ट्यूबवैल में पानी खारा होने से पानी लोगों के पीने लायक नहीं हैं। ऐसे में ग्रामीणों ने विरोध जताकर ट्यूबवैल की सप्लाई बंद करवाई हैं।
-पंखीदेवी, सरपंच चितलवाना
&मैने अभी चार्ज लिया हैं। मुझे जानकारी नहीं हैं। पानी खारा होने पर ट्यूबवैल खुदवाया है, तो गलत हैं। नहर आने पर समस्या का समाधान होगा।
-प्रहलाद पंवार, अधिशाषी अभियन्ता नर्मदा नहर सांचौर
Published on:
27 Mar 2018 09:31 am
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