जमशेदपुर। कहीं सुना है कि इश्क भी शर्तिया होता है..या किसी शर्त के लिए इश्क किया जाता है..या इश्क होने के बाद शर्त रखी जाती है...ये कहना है जमशेदपुर के युवा उपन्यासकार
शकील समर का.."तो फिर उस दिन जो कुछ भी हुआ वो क्या था! मेरा दिल तोड़ने का मुआवज़ा?" "नहीं, मैं उसे प्यार की आखिरी निशानी कहना ज़्यादा पसंद करुंगी," उसने कहा। कुछ ऐसे ही संवादों के साथ जब आपके हाथ में शकील समर का उपन्यास शर्तिया इश्क होगा तो आप खुद को पूरी किताब पढ़ने रोक नहीं पाएंगे।
इससे पहले भी शकील समर का एक उपन्यास एक्सीडेंट: अ लव स्टोरी प्रकाशित हो चुका है। जिसमें लेखक ने अपने उन जज्बातों को शब्दों में बयां किया है जो शायद वह किसी से कह नहीं सका। इसके बाद अब शकील का दूसरा उपन्यास 'शर्तिया इश्क' प्रकाशित हो चुका है। इस किताब को अंजुमन प्रकाशन ने पब्लिश किया है। शकील ने परा-स्नातक की डिग्री भोपाल के माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय से की है। इसके साथ ही शकील भोपाल में ही प्रदेश टुडे, दैनिक जागरण जैसे बड़े समाचार पत्रों में कार्य कर चुके हैं।

उपन्यास के विषय में लेखक शकील समर का कहना है कि इसमें एक त्रिकोणीय प्रेम कथा को शब्द दिए गए हैं। इसके जरिए प्रेम को केंद्र में रखकर समाज की कड़वी सच्चाईयों से लोगों को रूबरू कराने की कोशिश की गई है। इसके साथ ही कहानी के थोड़े से अंश के बारे में बताते हुए शकीर समर कहते हैं कि कहानी में बिहार के एक मशहूर बिजनेस घराने का लड़का कबीर अपनी बहन की मौत के बाद घर छोड़ कर दूसरे शहर आ जाता है जहां उसकी मुलाकात वाणी नाम की एक लड़की से होती है, जो अनाथआलय में पली-बढ़ी है, उसकी सपना एक सफल डांसर बनने का है। इसी बीचे दोनों एक दूसरे को दिल दे बैठते हैं, लेकिन इनकी कहानी में एक ट्विस्ट आ जाता है। वो ट्विस्ट क्या है इसे जानने के लिए आपको शकील की यह नॉवेल पढ़नी होगी।