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धान बेचने 7000 नए किसानों ने कराया पंजीयन, 31 तक मिलेगा मौका

समर्थन मूल्य पर धान बेचने किसानों का पंजीयन व सत्यापन जारी है। धान बेचने इस साल अब तक ७८१२ किसानों ने पंजीयन कराया है। ५०४३ हेक्टेयर रकबा बढ़ा है। पंजीयन कराने के लिए नए किसानों को अब पखवाड़े भर का समय और मिलेगा। ३१ अक्टूबर तक ही नवीन पंजीयन होगा क्योंकि १ नवंबर से धान खरीदी शुरु हो जाएगी।

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धान बेचने 7000 नए किसानों ने कराया पंजीयन, 31 तक मिलेगा मौका

धान बेचने 7000 नए किसानों ने कराया पंजीयन, 31 तक मिलेगा मौका

जांजगीर-चांपा. समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी शुरू होने से पहले नया किसानों का पंजीयन जारी है। वहीं रकबा, सुंगधित धान, आधार कार्ड, अकाउंट नंबर समेत अन्य संशोधन कराने के लिए सत्यापन भी किया जा रहा है।
पंजीयन व सत्यापन के लिए 31 अक्टूबर अंतिम समय है। डेढ़ माह से चल रहे किसान पंजीयन का आंकड़ा अब आना शुरू हो गया है। १४ अक्टूबर की स्थिति में सक्ती और जांजगीर-चांपा जिले में समर्थन मूल्य पर धान बेचने वाले ७८१२ नए किसानों का पंजीयन किया गया है। बंटवारा नामा के चलते लगातार जिले में समथज़्न मूल्य पर धान बेचने वाले किसानों की संख्या में बढ़ोत्तरी हो रही है।
पुराने किसानों का होगा स्वमेव पंजीयन
उप संचालक कृषि विभाग से मिली जानकारी के अनुसार पिछले साल समर्थन मूल्य पर धान बेचने वाले किसानों को पुन: पंजीयन कराने की जरूरत नहीं है। शासन स्तर से उनका स्वमेव पंजीयन हो जाएगा। उल्लेखनीय है कि पिछले साल जिले में एक लाख ९ हजार ९८८४ किसान पंजीकृत थे। इस साल ७ हजार नए किसानों का पंजीयन हो चुका है। यह आंकड़ा बढऩे की संभावना है। बहरहाल किसान पंजीयन के लिए किसान पहुंच रहे हैं। २५०० रुपए समर्थन मूल्य मिलने से हर साल जिले में किसानों की संख्या बढ़ती जा रही है।
जिले के साथ किसानों का भी बंटवारा
उल्लेखनीय है कि जांजगीर-चांपा से अलग होकर सक्ती नया जिला बन गया है। ऐसे में किसानों का भी बंटवारा हो गया है। जिले में अब तक पंजीकृत किसानों की संख्या २ लाख के करीब थी जिसके चलते प्रदेश में सबसे ज्यादा धान खरीदी जांजगीर-चांपा जिले में होती थी मगर दो जिलों में किसानों की संख्या बंटने से अब धान खरीदी की तस्वीर भी बदलेगी। किसान संख्या के साथ उपार्जन केंद्र, सहकारी समितियों की संख्या भी आपस में बंट गई है। जांजगीर-चांपा जिले में समितियां १०१ तो उपार्जन केंद्र १२३ हो गए हैं तो सक्ती जिले में सहकारी समितिया १०१ व उपार्जन केंद्र ९५ हो गई है।

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