28 जनवरी 2026,

बुधवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

रायगढ़-बिलासपुर की दूरी होगी 25 किमी कम

जिले में निर्माणाधीन राष्ट्रीय राजमार्ग तीन जिले के निवासियों के लिए सौगात लेकर आ रही है। इससे बिलासपुर, जांजगीर तथा रायगढ़ जिले के लोगों को कम दूरी सफर करने की सहूलियत मिलने वाली है। रायगढ़-बिलासपुर के बीच 25 किमी का फासला कम हो जाएगा, तो जांजगीर जिले के लोगों के लिए भी बिलासपुर व रायगढ़ पहुंचना आसान रहेगा।

3 min read
Google source verification

image

Piyushkant Chaturvedi

Jan 01, 2017

At a distance of 25 km Bilaspur-Raigarh will

At a distance of 25 km Bilaspur-Raigarh will

जांजगीर-चांपा.
जिले में निर्माणाधीन राष्ट्रीय राजमार्ग तीन जिले के निवासियों के लिए सौगात लेकर आ रही है। इससे बिलासपुर, जांजगीर तथा रायगढ़ जिले के लोगों को कम दूरी सफर करने की सहूलियत मिलने वाली है। रायगढ़-बिलासपुर के बीच 25 किमी का फासला कम हो जाएगा, तो जांजगीर जिले के लोगों के लिए भी बिलासपुर व रायगढ़ पहुंचना आसान रहेगा।


राष्ट्रीय राजमार्ग 49 के 84 किलोमीटर का हिस्सा जिले से गुजरा है और इस मार्ग में चौड़ीकरण के साथ कुछ स्थानों पर नए सड़क व रिंग रोड का निर्माण किया जा रहा है। इस निर्माण से आवागमन में सुविधा तो मिलेगी ही, साथ ही प्रमुख शहरों की दूरी भी कम हो जाएगी। वर्तमान में रायगढ़ से बिलासपुर की दूरी 168 किलोमीटर है, जो नई सड़कों के निर्माण के बाद घटकर 143 किमी रह जाएगी। इस 168 किमी के पेच में पांच स्थानों पर रिंग रोड का निर्माण किया जा रहा है, जिससे लंबी दूरी के यात्रियों को करीब 12 किमी की बचत होगी। वहीं तरौद से बिलासपुर जिले के ग्राम ढेंका तक नए सड़क का निर्माण किया जा रहा है, जिससे 13 किमी तक की दूरी कम हो जाएगी।


राष्ट्रीय राजमार्ग वर्तमान में ग्राम तरौद से बनाहिल होकर मुलमुला जाती है, फिर शिवरीनारायण-बिलासपुर मार्ग में मिल जाती है। इससे सड़क घुमावदार हो गई है, जिसके कारण लोगों का समय व इंधन दोनों का नुकसान हो रहा था। इस बात को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्रालय द्वारा नए सिरे से सर्वे कराया गया और मार्ग को सीधा करने प्रस्ताव बनाया गया। इसकी स्वीकृति मिल चुकी है और कार्य भी प्रारंभिकतौर पर शुरू हो गया है। यह मार्ग तरौद से ग्राम पकरिया, रसेड़ा, अर्जुनी, करूमहूं, पाराघाट, किरारी, लावर होकर बिलासपुर जिले के ग्राम ढेंका में फिर मुख्य मार्ग से मिल जाएगी। इस सड़क के बनने से 13 किमी का फायदा लोगों को मिलने लगेगा। ज्ञात हो कि राष्ट्रीय राजमार्ग को आवागमन के लिए सुगम बनाने की योजना बनाने के पहले विभाग द्वारा सर्वे कराया गया था। सर्वे का कार्य हरियाणा के गुडग़ांव की कंपनी मेसर्स फीडबैक द्वारा किया गया था। करीब छह महीने तक चले सर्वे के बाद नई योजना बनाई गई, जिसकी स्वीकृति के बाद कार्य प्रारंभ किया गया है।


गुणवत्ता के लिए कंसल्टेंट नियुक्त-
राष्ट्रीय राजमार्ग में निर्माण की गुणवत्ता बनाए रखने की जिम्मेदारी नेशनल हाइवे के अधिकारियों के साथ भोपाल के दो कंसल्टेंट की नियुक्ति की गई है। ग्राम ढेंका से बनारी तक के पोजेक्ट के लिए लायंस कंसल्टेंट तथा पुटपुरा से सक्ती मसनियाकला तक के लिए हाइवे कंसल्टेंट की नियुक्ति की गई है, जिनके सात-सात इंजीनियर कार्य की निगरानी करने के साथ भुगतान के लिए बिल बनाकर विभाग को प्रस्तुत करेंगे।


बनेंगी पांच बायपास सड़क-
राष्ट्रीय राजमार्ग के इस पेंच में ग्राम तरौद से किरारी बांध तक करीब पांच किमी बायपास सड़क बनाया जा रहा है, जिससे अकलतरा चौक का हिस्सा राष्ट्रीय राजमार्ग से अलग हो जाएगा। इसी तरह ग्राम बनारी से पहले जांजगीर बायपास का काम शुरू किया गया है। यह सड़क ग्राम पुटपुरा, खोखरा, पेंड्री, पिथमपुर होकर ग्राम घठोली में मुख्य मार्ग से मिल जाएगा। इससे जांजगीर तथा चांपा शहर को पार करने की जरुरत नहीं होगी। इस मार्ग के बनने से करीब छह किमी का सफर कम करना पड़ेगा। इसी तरह सारागांव तथा रिसदा गांव को छोड़ते हुए बायपास के साथ सक्ती के बाहर भी बायपास का निर्माण किया जा रहा है। इस सड़कों के बनने से भी करीब छह किमी की दूरी कम होगी। कुल मिलाकर इस तरह रायगढ़ से बिलासपुर की दूरी 25 किमी कम हो जाएगी और जांजगीर से बिलासपुर की दूरी 48 किमी रह जाएगी।


मार्ग पर बनेंगे तीन पुल और दो आरओबी-
इस निर्माण के दौरान तीन नए पुल तथा दो स्थानों पर रेल ओव्हरब्रिज भी बनाए जाएंगे। पहला पुल ग्राम ढेंका के पास अरपा नदी पर, दूसरा ग्राम पाराघाट के पास लीलागर नदी पर तथा तीसरा ग्राम पिथमपुर के पास हसदेव नदी पर बनाया जाएगा। इसी तरह केएसके तथा लाफार्ज के लिए गुजरे रेलवे लाइन के उपर ओव्हरब्रिज बनाने के साथ ग्राम सकरेली के पास मुख्य रेल मार्ग में ओव्हरब्रिज बनाने की योजना है। इससे बिलासपुर से रायगढ़ जाने वालों को किसी शहर में प्रवेश करने के साथ रेलवे फाटक का झंझट नहीं रह जाएगा।