
ज्यादातर ग्राम पंचायतें केवल कागजों में ही ओडीएफ
बम्हनीडीह. महात्मा गांधी रोजगार गारंटी व स्वच्छ भारत मिशन के तहत बम्हनीडीह ब्लाक को ओडीएफ (खुले में शौच मुक्त) बना लेने के भले ही प्रशासन लाख दावे करे, लेकिन हकीकत यही है कि यहां की ज्यादातर ग्राम पंचायतें केवल कागजों में ही ओडीएफ हुई हैं।
अधिकतर ग्राम पंचायतों में अभी भी लोग खुले में शौच जाने को मजबूर हैं। लच्छनपुर ग्राम पंचायत इसका जीता-जागता उदाहरण है। यहां मनरेगा के तहत 150 शौचालयों का निर्माण कराया गया था, लेकिन वह सिर्फ कागजों में ही बने हैं। इतना ही नहीं सबसे बड़ी लापरवाही तो उन अधिकारियों की है, जिन्होंने बिना निरीक्षण के मात्र सरपंच सचिव के कह देने मात्र से ग्राम पंचायत को ओडीएफ घोषित कर दिया है।
बम्हनीडीह विकास खण्ड के ग्राम पंचायत लच्छनपुर पुर के ग्रामीण खुले में शौच जाते हैं। 150 शौचालय कागज में बन चुकने के बाद भी आज तक इस पंचायत को शौचालय नसीब नहीं हो सका है। जब इस पंचायत का पत्रिका की टीम ने जायजा लिया तो सच्चाई सामने आई कि अधिकतर लोगों के घोरों में शौचालय नहीं है। जहां बने भी है तो वह अधूरे हैं। यहां के सचिव राम शंकर कश्यप व सरपंच सोनिया सिंह ने अधिकारीयों से मिली भगत करके कागजों में अपनी ग्राम पंचायत को ओडीफ घोषित करा दिया है।
कार्यक्रम आधिकारी ने दी सफाई
इस बारे में जब कार्यक्रम अधिकारी विभा मरावी से बात की गई तो उन्होंने बताया कि पंचायत के सरपंच व सचिव शौचालय निर्माण की जानकारी देते हैं। इसके बाद पंचायत को पूर्णता प्रमाण पत्र दिया जाता है। अगर शौचालय निर्माण कार्य अधूरा है तो सचिव ने गलत जानकारी देकर ओडीएफ का प्रमाण पत्र लिया है, जो कि गलत है।
शौचालय के नाम पर निकाली गई दूसरे मद की राशि
लच्छनपुर के सरपंच सचिव इतने शाति हैं शासन का पैसा खाने में कि शौचालय निर्माण कराने के नाम से पांच लाख बाईस हजार रुपए 14वें वित्त की राशि से भी निकाल कर खर्च दिखा चुके हैं। जबकि इस राशि को खर्च करने के लिए शासन का अलग दिशा निर्देश है।
सचिव के बिगड़े बोल
जब शौचालय निर्माण के संबंध मे लच्छनपुर सचिव से बात की गई तो तो उसका कहना था कि जानकारी चाहिए तो सूचना का अधिकार लगा दो और जानकारी ले लो।
Published on:
11 Jun 2018 12:45 pm
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