30 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

धान की बंपर पैदावारी: रकबे में कटौती हुई तो 2600 के धान को 1600 में बिक्री करने मजबूर किसान

जिले में इस वर्ष धान की बंपर उत्पादन हुआ है। क्योंकि इस वर्ष कीटप्रकोप का असर कम रहा। प्रत्येक एकड़ में किसानों ने ३० क्ंिवटल तक धान का उत्पादन किया है। लेकिन सोसायटी में वे मात्र १५ क्ंिवटल धान की बेच पा रहे हैं। लेकिन दुखद यह है कि गिरदावरी में रकबे की कटौती होने के बाद किसान अपनी गाढ़ी कमाई को औने पौने दामों में बिचौलियों के पास बेचने मजबूर हैं। क्योंकि उनका रकबा कम हो चुका है। जिसके चलते जिले के हजारों किसानों को तकरीबन १० करोड़ रुपए का नुकसान उठाना पड़ रहा है।

2 min read
Google source verification
धान की बंपर पैदावारी: रकबे में कटौती हुई तो 2600 के धान को 1600 में बिक्री करने मजबूर किसान

धान की बंपर पैदावारी: रकबे में कटौती हुई तो 2600 के धान को 1600 में बिक्री करने मजबूर किसान

जांजगीर-चांपा। सरकार ने धान का समर्थन मूल्य बढ़ाकर किसानों के चेहरे में चमक जरूर ला दी है लेकिन वहीं दूसरी ओर गिरदावरी रिपोर्ट में कई किसानों का रकबा कम बता रहा है। नतीजतन किसानों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ रहा है। जो किसान अपनी उपज को २६०० रुपए क्ंिवटल में बेचते आ रहे थे उनका धान बिचौलिए व मिलर्स १५०० रुपए से लेकर १६०० रुपए में खरीद रहे हैं। जिसके चलते किसानों को १ हजार रुपए तक प्रति क्ंिवटल नुकसान उठाना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि किसानों का सगा भाई भी अपनी पर्ची से भाई का धान सोसायटी में बिक्री करने से मना कर रहा है। क्योंकि वह खुद चाह रहा है कि उसकी पर्ची में भरपूर धान बिके और उसका लाभ खुद लेने के बजाए किसी दूसरे को क्यों दे। ऐसी स्थिति में किसान मिलर्स या बिचौलिए को औने पौने दामों में अपनी छह महीने के हाड़तोड़ कमाई को देने को मजबूर है।
सरकार ने जांच कराकर की कटौती
तुलसी-किरीत धान घोटाले से सरकार की आंख खोल दी और रकबा संसोधन कराया गया। इसके अलावा कलेक्टर के निर्देशन में गिरदावरी की जांच कराई गई। जिसमें तकरीबन दो हजार एकड़ में फर्जी खरीदी का खुलासा हुआ। जिसमें सबसे अधिक तुलसी किरीत सहित नवागढ़ ब्लाक के कई गांवों में फर्जीवाड़े कर धान खरीदी किए जाने की बात सामने आई। जिसका असर पूरे जिले में देखने को मिला। ऐसे में सैकड़ों ऐसे भी फंस गए जो अब तक किसी न किसी माध्यम से ज्यादा रकबे में धान की बिक्री करते आ रहे थे। अब उनकी उपज की पूछपरख करने वाला कोई नहीं है।
ऐसे समझें बचत की परिभाषा
दो हजार एकड़ में यदि हम १५ क्ंिवटल प्रति एकड़ धान खरीदते तो तकरीबन ४० हजार क्ंिवटल धान की खरीदी होती। जिसमें यदि २६०० रुपए प्रति क्ंिवटल के हिसाब से खरीदी करते तो तकरीबन १० करोड़ रुपए की अधिक खरीदी होती। सरकार इतनी खरीदी करने से बच गई। जिससे सरकार के बड़ा लाभ हुआ। जिसका खामियाजा ऐसे किसानों को भी भुगतना पड़ गया जिनके पास भरपूर धान है। अब इसी धान को बिचौलियों के पास बेचना पड़ रहा।
तुलसी किरीत के बाद कोरबी में एफआईआर
जिले में करोड़ों रुपए के धान घोटाले की फाइल परत दर परत खुलते जा रही है। पहले तो तुलसी किरीत मामले में पांच लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। वहीं अब कोरबी मामले में ५ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। जिसमें खरीदी प्रभारी का नाम भी शामिल है। कोरबी सोसायटी में वन भूमि की जमीन पर धान की बिक्री की गई है।
अगले साल अधिक खरीदी की उम्मीद जगी
आने वाला साल चुनावी वर्ष होगा। हर सरकार घोषड़ाओं के दम पर विधानसभा चुनाव लड़ेगी। मौजूदा सरकार में अभी से किसानों के बीच सुगबुगाहट डाल दी है कि हम २० क्ंिवटल धान समर्थन मूल्य में खरीदेंगे। जिससे किसानों को उम्मीद जगी है। किसान चाह रहे हैं कि अभी जो धान उपजाए हैं उसे सुरक्षित रखेंगे ताकि आने वाले वित्तीय वर्ष में मोटी कीमत के साथ-साथ ज्यादा मात्रा में सोसायटी में धान बेच सकें।

गिरदावरी रिपोर्ट तैयार करते वक्त बड़ी संख्या में किसानों के रकबे में संसोधन हुआ है। जिससे किसान परेशान हैं। ऐसे में किसान बिचौलियों के पास अपनी गाढ़ी कमाई को पानी के मोल बेचने मजबूर हैं। सरकार को कम से कम २० क्ंिवटल प्रति एकड़ धान की खरीदी करनी चाहिए। ऐसे मुद्दों को लेकर हम चरणबद्ध आंदोलन करने रूप रेखा बना रहे हैं।
- संदीप तिवारी, संयोजक, कृषक चेतना मंच

Story Loader